सूचना के अधिकार ने नागरिकों को बनाया सशक्त: कमिश्नर श्री वासनीकर

जगदलपुर :  सूचना का अधिकार पर संभाग स्तरीय कार्यशाला का आयोजन

जगदलपुर, सूचना के अधिकार पर एक दिवसीय संभाग स्तरीय कार्यशाला का आयोजन कमिश्नर कार्यालय के सभा कक्ष में आयोजित किया गया। संभाग के सातों जिलों के प्रथम अपीलीय अधिकारियों के लिए आयोजित इस कार्यशाला में कमिश्नर श्री दिलीप वासनीकर ने कहा कि सूचना के अधिकार ने नागरिकों को सशक्त बनाया है। उन्होंने कहा कि कार्य में पारदर्शिता लाने के लिए बनाए गए इस अधिनियम ने अधिकारियों को और अधिक जिम्मेदारी से कार्य करने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम का मूल उद्देश्य नागरिकांे को सशक्त बनाना, सरकार के कार्यकरण में पारदर्शिता और जवाबदेही का संवर्धन करना, भ्रष्टाचार रोकना और लोकतंत्र को वास्तविक रूप से जनता के लिए काम करने के लिए तैयार करना है। कमिश्नर श्री वासनीकर ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 में दिए प्रावधानो का निष्ठापूर्वक एवं ईमानदारी से सही क्रियान्वयन करने की आवश्यकता है। सूचना के आदान-प्रदान से नागरिकों मंे विकास के प्रति समझ एवं सहभागिता बढ़ने के साथ-साथ प्रशासन में जनता के प्रति जवाबदेही और उत्तरदायित्व की भावना का भी विकास होता है। उन्होंने सूचना के अधिकार की मंशा को पूरा करने के लिए इस कार्यशाला का गंभीरतापूर्वक लाभ लेने की बात कही।
इस अवसर पर राज्य सूचना आयुक्त श्री मोहन राव पवार ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार एवं प्रशासन की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता एवं जिम्मेदारी को सुनिश्चित करने की उद्देश्य से सूचना का अधिकार प्रभावशील है। इस अधिनियम के द्वारा नागरिकों को क्रांतिकारी अधिकार प्रदत्त किया गया है जिससे पारदर्शिता एवं जिम्मेदारी को सुनिश्चित करते हुए लोकतंत्र को मजबूत किया जा सके एवं जनता की भागीदारी प्रजातंत्र एवं विकास में बढ़ सके।

इस अवसर पर बस्तर कलेक्टर श्री धनंजय देवांगन ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम के माध्यम से शासन प्रशासन से आधिकारिक रूप से सूचना प्राप्त करने का एक शक्तिशाली साधन नागरिकों को दिया गया है। शासन की क्रिया-कलाप के बारे में नागरिक को जानकार बनाने के लिए सूचना का अधिकार अधिनियम एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि कामकाज में अधिक से अधिक पारदर्शिता लाकर सूचनाओं को आमजन तक आसानी से पहुंचाना शासन का उद्देश्य है। सभी अधिकारियों का यह दायित्व है कि वे शासन की मंशा को पूर्ण करने के लिए सूचना के अधिकार अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।
कार्यशाला में मास्टर ट्रेनर श्री रमेश जोशी, श्री जीवनलाल वर्मा, श्री जी.पी. खरे ने सूचना के अधिकार अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के संबंध में विस्तार से जानकारी सभी अधिकारियों को प्रदान किया। कार्यशाला में बताया गया कि इस अधिनियम के तहत सिर्फ भारत के नागरिक को सूचना प्राप्त करने का अधिकार है। अधिनियम में निगम, संघ, कंपनी आदि को जो वैध व्यक्तिओं को परिभाषा के अंतर्गत तो आते हैं, किन्तु नागरिक की परिभाषा में नहीं आते को सूचना देने का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि समस्त जनसूचना अधिकारियों का दायित्व है कि वे इस अधिनियम के तहत प्राप्त पत्रों का समाधान अधिनियम में उल्लेखित धाराओं के तहत करें। उन्होंने बताया कि गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वालों को निःशुल्क जानकारी दिए जाने का प्रावधान है, किन्तु इसके लिए आवेदनकर्ता को गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन का प्रमाण पत्र संलग्न करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि सूचना के अधिकार के तहत अधिकतम 30 दिन तथा विशेष परिस्थितियों में 48 घंटे के भीतर जानकारी उपलब्ध कराना अनिवार्य है। अधिनियम के अंतर्गत केवल ऐसी सूचना देना है, जो विद्यमान है और जो लोक प्राधिकरण के पास अथवा उसके अधीन उपलब्ध है। जन सूचना अधिकारी द्वारा सूचना सृजित करना या सूचना की व्याख्या करना या आवेदक द्वारा उठाई गई समस्याओं का समाधान करना या काल्पनिक प्रश्नो का उत्तर देना अपेक्षित नहीं है।

कार्यशाला में बताया गया कि सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत अपील पर निर्णय करना एक अर्द्ध-न्यायिक कार्य है। इसलिए अपीलीय प्राधिकारी के लिए यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि न्याय केवल हो ही नहीं, बल्कि वह होते हुए दिखाई भी दे। इसके लिए अपीलीय प्राधिकारी द्वारा पारित आदेश स्पींकिंग आर्डर होना चाहिए जिसमें निर्णय के पक्ष में समुचित तर्क दिए गए हो।     कार्यशाला में  अपर कलेक्टर श्री हीरालाल नायक, उपायुक्त श्री एस.पी. नवरतन, श्री जदुवीर राम सहित संभाग के सभी जिलों के प्रथम अपीलीय अधिकारीगण उपस्थित थे।

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