भारत – ईरान के बीच की ऐतिहासिक रिश्तों की डोर को और मजबूत

नई दिल्ली: भारत दौरे पर आए ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी को शनिवार (17 फरवरी) को नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया.

हसन रूहानी ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य शीर्ष अधिकारियों के साथ एक छोटी-सी मुलाकात भी की. इसके बाद वे राजघाट पहुंचे, जहां उन्होंने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी.

हसन रूहानी शुक्रवार (16 फरवरी) को हैदराबाद से दिल्ली पहुंचे हैं.

इससे पहले ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने बीते शुक्रवार (16 फरवरी) को हैदराबाद में दुनियाभर के मुस्लिम समुदाय से एकजुट होने का आह्वान करते हुए कहा कि अगर वे एकजुट रहें तो अमेरिका कभी यरूशलम को इस्राइल की राजधानी के तौर पर घोषित करने की हिम्मत नहीं दिखायेगा.

अमेरिका के साथ बेहद प्रगाढ़ होते रिश्तों के बावजूद भारत ने आज यह स्पष्ट कर दिया कि ईरान के साथ उसके संबंधों को लेकर वह किसी भी दवाब में नहीं आएगा।

भारत आये ईरान के राष्ट्रपति हसन रोहानी और पीएम नरेंद्र मोदी के बीच तकरीबन डेढ़ घंटे चली बातचीत ने इन दोनों देशों के बीच की ऐतिहासिक रिश्तों की डोर को और मजबूत कर दिया है।

दोनों नेताओ के बीच हुई बातचीत और बाद में दोनों देशों की तरफ से जारी संयुक्त विज्ञप्ति अगर पड़ोसी देश पाकिस्तान को चेतावनी है तो चीन को भी एक संकेत है।

यह संकेत है कि भारत अब कनेक्टिविटी को अपनी कूटनीति का न सिर्फ एक अहम हिस्सा बना चुका है बल्कि वह अपनी परियोजनाओं को अब तेजी से लागू करने की क्षमता भी रखता है।

दोनो देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों पर नौ समझौते हुए। इनमें जल्द ही भारतीय कंपनी ‘इंडियन पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड’ को 18 महीने के लिए चाबहार बंदरगाह के पहले चरण का प्रबंधन सौंपने का समझौता शामिल है।

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