उत्तर प्रदेश में तूफान ने मचाई तबाही 16 की मौत

आगर : ब्रज में बुधवार को आए बवंडर ने चंद मिनटों में ऐसी तबाही मचाई कि 16 लोग काल के गाल में समा गए। भयंकर तूफान से शहर से देहात तक सैकड़ों पेड़, होर्डिंग, टीनशेड, खंभे उखड़ गए। कई जगह मकान और दीवार ढह गईं। आगरा के अछनेरा और डौकी में तीन-तीन जबकि ताजगंज में दो लोगों की मौत हो गई। मथुरा और फिरोजाबाद में चार-चार लोगों की मौत हो गई।

जनहानि के साथ तूफान का कहर ताजमहल पर भी टूटा। विश्वविख्यात इमारत के दो गेटों की मीनारें गिरने के साथ मुख्य स्मारक को भी नुकसान हुआ। तूफान जनित हादसों में चार दर्जन से अधिक लोग जख्मी हुए हैं। बवंडर में करोड़ों की हानि की भी सूचना है। वहीं कई इलाके पानी में डूब गए। गेहूं की 80 फीसदी तक फसल नष्ट हो गई।

बुधवार को आई तेज रफ्तार से आए तूफान से ताजमहल में भारी नुकसान हुआ है। यहां की दो मीनारें गिर गईं। एक रॉयल गेट और दूसरी दक्षिणी के गेट की मीनार गिरी है। यहां लगे कलश भी गिर कर टूट गए। इसके अलावा मुख्य गुंबद पर लगे कुछ पत्थर भी टूटकर नीचे गिर गए। वहीं फोरकोर्ट में खड़ा नीम का पेड़ भी धराशायी हो गया।

पुरातत्व विभाग के अधिकारी देर रात तक मौके पर पहुंचकर नुकसान का आंकलन करने में जुटे हुए थे।
ताजमहल के इन गेटों का निर्माण 1631 से 1638 के बीच हुआ था। इनमें अभी कुछ दिन पूर्व छह मार्च को रायल गेट के कुछ पत्थर टूटकर नीचे गिरे थे। बुधवार को तेज आंधी में गेट के साइड की मीनार भरभराकर नीचे गिर पड़ी।

इसके अलावा दक्षिणी गेट की भी एक मीनार टूटकर नीचे गिर गई। वहीं फोरकोर्ट में लगा वर्षों पुराना नीम का एक पेड़ भी तूफान की भेंट चढ़ गया। इसके किनारे बना चबूतरा तहस-नहस हो गया। रायल गेट और दक्षिणी गेट पर लगे कलश टूटकर नीचे गिर गए। ताजमहल के मुख्य गुंबद पर लगे कुछ पत्थर भी तेज आंधी में नीचे आ गिरे।

अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. भुवन विक्रम ने बताया कि मीनारों और पेड़ के गिरने के कारण काफी नुकसान हुआ है। नुकसान का आंकलन किया जा रहा है। आशंका जताई कि आंधी से कुछ और भी नुकसान हुआ होगा। इसका भी पता लगाया जा रहा है। कर्मचारियों को मौके पर भेज दिया गया है।

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