बढ़ते विवाद के मद्देनज़र साउथ चाइना सी पर चीन ने तैनात की क्रूज मिसाइल

साउथ चाइना सी पर विवाद बढ़ता जा रहा है. विवादित क्षेत्र में अमेरिकी जहाजों की उड़ान के बाद चीन ने अपने जंगी जहाजों का सैन्य अभ्यास किया था. अब चीन ने इससे एक कदम और आगे बढ़कर इस इलाके की निगरानी के लिए एंटी शिप क्रूज मिसाइलें और सतह से हवा में मार करने वाले मिसाइल सिस्टम की तैनाती कर दी है. चीन ने दावा किया है कि इस इलाके पर निर्विवाद रूप से उसी का हक है.साउथ चाइना सी पर एक ओर जहां चीन अपना दावा करता रहा है, वहीं वियतनाम, फिलिपींस, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान इसके उलट दावा करते हैं.यहां एक संवाददाता सम्मेलन में मिसाइल की कथित तैनाती पर विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनिइंग ने कहा कि चीन का नान्साहा (अलग नाम से पहचाना जाने वाला) द्वीप और इससे जुड़े द्वीप पर चीन का निर्विवाद रूप से आधिपत्य है. वियतनाम और ताइवान अलग-अलग इस पर चीन के विरुद्ध दावे करते हैं.चुनयिंग ने कहा कि साउथ चाइना सी में चीन की गतिविधियां हमारी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को बरकरार रखने के लिए है. यह हमारा अधिकार है. मिसाइलों की तैनाती किसी देख के खिलाफ नहीं है.अमेरिका भी इस इलाके में नजर रखे हुए है. अप्रैल के आखिरी हफ्ते में इस इलाके में अमेरिकी वायुसेना के बमवर्षक विमानों (B-52 Stratofortress) ने एक प्रशिक्षण मिशन के तहत दक्षिण चीन सागर के ऊपर से उड़ान भरी थी. वायु सेना के अनुसार, बमवर्षक विमान ने गुआम द्वीप स्थित एंडरसन हवाई अड्डे से उड़ान भरी थी, लेकिन इसका खुलासा नहीं हुआ था.अमेरिकी सेना के एक अधिकारी ने बताया था कि अमेरिका के दो बम वर्षक विमानों ने स्प्रैटली द्वीप समूह पर उड़ान भरी. चीन ने स्प्रैटली की भोगौलिक विशेषताओं का इस्तेमाल कृत्रिम द्वीप समूह बनाने में किया है. इनमें से कुछ को बीजिंग ने सैन्य सुविधाओं से लैस किया है.अधिकारी ने बताया कि चीनी सेना ने अमेरिकी विमान के मार्ग में कोई बाधा उत्पन्न नहीं की. एडमिरल फिलिप डेविडसन ने कांग्रेस को इस महीने बताया था कि चीन इन द्वीपों का इस्तेमाल दक्षिण चीन सागर पर अपना नियंत्रण स्थापित करने के लिए कर रहा है.अमेरिकी विमानों के बाद चीन ने इस इलाके में अपने जंगी जहाजों का अभ्यास किया था.डेविडसन ने कहा था कि चीन काफी समय से दक्षिण चीन सागर पर अपनी दावेदारी पेश कर रहा है. मेरा मानना है कि वह वहां अपना सैन्य ठिकाना स्थापित करना चाहता है, जिससे उन्हें दुनिया के उस क्षेत्र के माध्यम से वायु और समुद्री मार्गो पर नियंत्रण स्थापित करने में मदद मिलेगी.

साभारः आज तक

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