उप्र: मुख्यमंत्री में नहीं रह गया जनता से सामना करने का साहस – स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती

काशी (सुदीप्तो चटर्जी “खबरीलाल”): आज जिस तरह से पहले उत्तर प्रदेश के माननीय संवेदनशील मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी जी द्वारा काशी में मंदिरों, मूर्तियों को तोड़े जाने और पेंड़ को काटे  जाने के विरुद्ध चलाए जा रहे “मंदिर बचाओ आंदोलन” के लोगों को वार्ता के लिए आमंत्रित किया गया और फिर जिस तरह उनको बीच रास्ते रोक कर वापस लौटाया गया , उससे यह पता चलता है कि मुख्यमंत्री के अंदर जनता को सामना करने का साहस समाप्त हो गया है । यह विचार स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती  ने लोहटिया चौराहे से लक्ष्मी कुंड लौटने के उपरांत लोगों से कही । 

ज्ञात हो की स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद मंदिर बचाओ आन्दोलनम् के अंतर्गत विगत 16 मई से काशी में  पुराणोक्त मंदिरों के दर्शन, पूजन की यात्रा पर हैं जिससे काशी के प्राचीन मंदिरों को बचाया जा सके ।

स्वामी जी जब  लगभग 2 किलोमीटर वापस आ गए तब पुलिस के कुछ अधिकारी आये और कहा स्वामी जी वापस चलिए। स्वामी जी ने बताया कि हम मर्यादा मानसम्मान सबकी परवाह किये बगैर इसीलिए मुख्यमंत्री जी के पास जा रहे थे क्योंकि हमको आशा थी शायद मुख्यमंत्री जी को काशी में जो कुछ हो रहा वो ठीक से नहीं पता नहीं होगा । जब उनको हम सब बताएंगे , उनको ध्यान में आएगा और कार्यों को जो कि काशी में अनर्थ के रूप में हो रहे हैं उसे वे रोक देंगे। लेकिन जिस तरह से हम सभी को लौटाया गया उससे  पता चल गया की जनता से सामना करने की हिम्मत माननीय मुख्यमंत्री में नही  है । जरुर उनको कहीं ना कहीं अंतर्मन में अपराध बोध होगा । आगे स्वामी जी ने बताया कि मंदिरों और मूर्तियों के तोड़ने से रोकें जाने तक आंदोलन चलता रहेगा और किसी भी प्रकार से रुकेगा नहीं। हम आशा करेंगे कि सरकार के जिम्मेदार अधिकारियों को सद्बुद्धि आएगी और वह परिस्थिति की गंभीरता को समझेंगे और निर्णय लेंगे । 

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