भगवान् को भजना और भंजाना दोनों अलग चीजे : अविमुक्तेश्वरानन्दः

कांशी(सुदीप्तो चटर्जी “खबरीलाल”):हम लोग भगवान् का भजन करने में विश्वास करते हैं इसीलिए जो भी भजन करने वाले लोग हैं उन सभी को मन्दिरों के टूटने पर हृदय से पीडा हो रही है पर जो लोग भगवान् के नाम को भंजाकर सत्ता में आए उनको इस पीडा का अनुभव ही नहीं बल्कि वे तो स्वयं ही मन्दिरों को तोड रहे हैं ।

उक्त बातें स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती महाराज ने आज अभय संन्यास आश्रम में सायं 5 बजे आयोजित समारोह में व्यक्त किए । उन्होंने कहा कि लोगों को इस सरकार से बहुत उम्मीद थी कि वे अयोध्या में राम मन्दिर बनाएँगे पर आज लोग अपने को ठगा सा महसूस कर रहे हैं ।

उन्होंने कहा कि मरणं मंगलं यत्र यह श्लोक पूरी काशी के लिए नहीं अपितु विशेष रूप से मणिकर्णिका क्षेत्र के लिए कहा गया है । काशी खण्ड में इसके माहात्म्य का वर्णन है । आज हम इसी पवित्र क्षेत्र में है तो हमें बहुत आनन्द आ रहा है । जो लोग यात्रा मे साथ चल रहे है सब के सब चलते चलते थक जाते हैं पर पूछने पर कहते हैं कि बहुत आनन्द आ रहा है और यह थोडे समय का कष्ट जीवन भर आनन्द प्रदान करेगा । यही धर्म है कि हम कम से कम में कष्ट सहकर भी आनन्दित हो जाते हैं ।

उन्होंने आगे कहा कि हमारे पूर्वजों ने हमारे लिए अपने आध्यात्मिक ज्ञान के आधार पर ही पृथ्वी के कुछ क्षेत्रों को ऊर्जा स्थल के रूप में चिह्नित किया है जिससे कि वह ऊर्जा का लाभ हमारी भावी पीढी को भी मिले पर आज आधुनिकता की ओर सबका ध्यान जा रहा है जिससे हमारे बच्चे उस लाभ से वंचित हो रहे हैं ।

उन्होंने अपने पर साई की मूर्ति तोडने को फर्जी तौर पर हुए मुकदमे के सम्बन्ध में कहा कि हमें डराने के लिए हमारी आवाज को दबाने के लिए मुकदमा किया जा रहा है पर जब संन्यास दीक्षा होती है उसी समय यह संकल्प लिया जाता है कि “अभयं सर्वभूतेभ्यो” माने हमसे कोई न डरे और जब हम सबको अभय देते हैं तो सब भी हमें अभय देते हैं । क्योंकि हिंसा की भावना से ही हिंसा आती है । जब हमारे मन मे किसी के प्रति द्वेष न होगा तो दूसरे के मन से भी द्वेष समाप्त हो जाएगा ।

क्षेत्रीय प्रतिनिधि पप्पू यादव ने कहा कि मन्दिर को बचाने निकले स्वामिश्रीः पर मुकदमा कर दिया गया है । उन तक पहुँचने के पहले हम सब पर से गुजरना पडेगा ।

किरन खन्ना जी ने कहा कि हमारे भी घर को तोडने की योजना है। हमसे यही छीन लिया जाएगा तो हम कहाँ जाएँगे । सरकारी योजनाएं लोक हित में होनी चाहिए पर इस सरकार की योजना हम सबको कष्ट ही पहुँचा रही है।

काशी विदुषी परिषद् की महामन्त्री श्रीमती सावित्री पाण्डेय  ने कहा कि केदारनाथ में 2013 में घटना हुई उससे ही हम अब तक न उबर सके हैं और आज काशी जैसे पवित्र क्षेत्र में मन्दिरो को तोड़ा जा रहा है । दैवी आपदा न आए यहाँ इसका प्रयास करना चाहिए। 

धरोहर बचाओ समिति के राजेन्द्र ने कहा कि स्वामिश्रीः के आन्दोलन को दबाने के लिए वैसा ही प्रयास किया जा रहा है जैसे किसी राजनीतिक आन्दोलन को दबाया जाता है।

श्री वरुण जी ने कहा कि मन्दिरों का ध्वस्तीकरण अनुचित है । हमारा निवेदन है कि इस गम्भीर मसले पर चारों पीठों के शंकराचार्य और दशनामी अखाडो के लोगों को भी प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजना चाहिए। सतीश अग्रहरि ने कहा कि पिछले दिनों गणेश प्रतिमा का विसर्जन रोक दिया गया और इतने मन्दिर तोड दिए गए किसी पर भी एफ आई आर नहीं हुई और आज साई की उंगली टूट गई तो एफ आई आर हो गया । कौन बताएगा कि यह देश में क्या हो रहा है ?

अशोक अग्रहरि ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने जो रास्ता बनाया है आगे की पीढ़ियों के लिए उसे हम नहीं छोडेंगे । गुलाब के फूल को लेने पर कांटे लगते ही हैं इसलिए हम सबको एफ आई आर से नहीं डरना है । आगे बढ़ना है और मन्दिरों को बचाना है । सत्य प्रकाश ने कहा कि सत्ता पाने से पहले मोदी जी ने कहा था कि सबसे पहला काम अयोध्या में राम मन्दिर बनाएँगे पर ये तो काशी में 56 विनायको के मन्दिरों को ही तुड़वा रहे हैं । महज सौ साल पुरानी सभ्यता है साई की पर हमारे देवता तो आदि काल के हैं। उनके टूटने पर एफ आई आर हुआ और हमारे देवताओं पर प्रहार हुआ तो हमें कैसी चोट लगी हे यह सोचना पडेगा। खुद को हिन्दू कहकर सत्ता में आए पर हम समझते हैं कि नरेन्द्र मोदी और औरंगजेब में कोई अन्तर नहीं है ।

काशी विश्वनाथ मन्दिर के पूर्व महन्थ राजेन्द्र तिवारी बबलू ने कहा कि काशी के विकास का खाका उन लोगों ने खीचा है जिनका काशी से कोई नाता नहीं है। आज यह सवाल है कि काशीवासी धर्म को नष्ट करने वालों के साथ है या धर्म को बचाने वालों के साथ ?  राम को भजने वालों के साथ या राम को भजाने वालों के साथ ? 

छत्तीसगढ़ से पधारी उमा ठाकुर ने कहा कि हमें बडा दुख हुआ कि मोक्ष नगरी काशी में ऐसी हालत है । जिस सरकार को प्रमुख रूप से सन्तो ने चुना था कि वे अयोध्या में राम लला को छत देंगे पर यह तो काशी के देवताओं और भक्तों का ही छत छीन रहे हैं पर विश्वनाथ के धाम में कौन अनाथ हो सकता है ।

इलाहाबाद अधिवक्ता सभा के अध्यक्ष प्रदीप यादव ने कहा कि कही पर भी काशी के लिए कुछ करना हो तो काशी और प्रयाग को एक कर देंगे । आज हमने काशी की हालत देखी तो विश्वास ही नही हुआ कि मन्दिर बनाने का वादा करने वाले लोग कहाँ गए ? मन्दिर बचाओ आंदोलनम् से हम सब जुडेंगे और जहाँ भी आवश्यकता पड़े खड़े होंगे । पन्द्रह सदस्यों के प्रतिनिधिमण्डलने आन्दोलनम् को समर्थन दिया ।

डा विनय मिश्र ने कहा कि आज स्वामिश्रीः काशी खण्डोक्त सभी मन्दिरों का दर्शन कर रहे हैं यह केवल अपने लिए नहीं पूरे देश के लिए कर रहे हैं। काशी में चल रहा यह आन्दोलन छोटा नहीं है । इसका कोई न कोई निर्णय अवश्य आएगा । आन्दोलन में उन लोगों को भी आना पडेगा जिस मुहल्ले में मन्दिर मकान टूट रहे हैं ।

प्रमुख रूप से अभय संन्यास आश्रम के महेश चैतन्य ब्रह्मचारी जी, काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महन्थ राजेन्द्र तिवारी बबलू जी,  योगेश्वरानन्द जी, मुरारी स्वरूप जी, कृष्ण प्रियानन्द जी, महेश नवलगडिया जी, अभय शंकर तिवारी, नारायण माहेश्वरी, महेश कक्कड, प्रेम नारायण मलहोत्रा, रवि कक्कड, पीयूष नवलगडिया आदि जन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारम्भ वैदिक मंगलाचरण से हुआ । संचालन मयंकशेखर मिश्र ने तथा धन्यवाद ज्ञापन सलदाह, कवर्धा जिला, छत्तीसगढ़ के ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानन्द जी ने किया।

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