पैरों में छालों के बावजूद इस भीषण गर्मी में मंदिरों को बचाने स्वामिश्री कर रहे हैं कठिन तपस्या

काशी (सुदीप्तो चटर्जी “खबरीलाल”) : मई माह के भीषण गर्मी तथा तप्ती धरती में काशी के प्राचीन मंदिरों को बचाने हेतु दंडी स्वामी अविकुक्तेश्वरानंद सरस्वती कर रहे हैं कठिन तपस्या। स्वामिश्री 13 दिनों से नंगे पांव निरंतर पदयात्रा कर रहे हैं जिसमे आज 28 मई पंचक्रोशी यात्रा का तीसरा दीन है। उनके पदयात्रा में छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में स्थित सलदाह धाम के ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानंद महाराज, जशपुर आश्रम के ब्रह्मचारी, साध्वी, अनुयायी, बटुक एवं आम जनता उनके साथ नंगे पांव पदयात्रा कर रहे हैं जिससे स्वामिश्री के मंदिर बचाओ तपस्या पूर्ण हो सके। ज्ञात हो विगत दिनों में पुराणों में वर्णित 3 विनायक मंदिरों को तोड़ दिए गए जिससे स्वामिश्री व्यथित हैं और आम जनता में रोष व्याप्त है। इस आन्दोलनम के क्रम में उत्तरप्रदेश प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष व सांसद राज बब्बर, जदयूएस के युवा विंग तथा विभिन्न सामाजिक व धार्मिक संगठनों ने मंदिर बचाओ आन्दोलनम को अपना पूर्ण सहयोग दे रहे हैं। 

स्वामिश्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का कहना है – पैरों में छाले हों, फर्जी मुकदमें हों या कोई और व्यवधान हो हमें रोक नही सकती, हम ये नही कहते की हम सबकुछ ठीक कर लेंगे लेकिन जबतक शरीर है, धर्म के प्रति प्रतिबद्धता है, हम हर कोशिश करके अपने मूल्यों को अपनी आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का हमारा परम दायित्व है ।

पदयात्रा में चल रहे संत महात्मा, बटुक व नागरिक लगातार इन नारों से लोगों को जागृत कर रहे हैं – हर हर महादेव शम्भो काशी विश्वनाथ गंगे । बचाने हर मन्दिर प्रभु का, चले हैं काशी वासी संगे ।। जो विकास मंदिर तोडवाए, वो हमको स्वीकार नही । जनता का दुख-दर्द ना समझे, समझो वो सरकार नही ।।

हमको मनकी कहने दो, काशी को काशी रहने दो । खुद को हिन्दू बोल रहे हो, फिर भी मंदिर तोड रहे हो ।। यदि अब मंदिर एक भी टूटा, समझो भाग्य तुम्हारा फूटा । हम समझेंगे तोड के मन्दिर, हमसे रिश्ता तोड रहे हो ।।

आज 28 मई पंचक्रोशी यात्रा का तीसरा दीन है। 27 मई की रात स्वामिश्री लंगोटी हनुमान से चलकर रामेश्वर में विश्राम हेतु रुके तथा आज सुबह 5 बजे रामेश्वर से पदयात्रा शुरू हुई जो हरहुआ में कुछ पल विश्राम हेतु कमलेश यादव के निवास में रुका। यह पद यात्रा कल समाप्त होगा तथा स्वामिश्री आम जनों को संबोधित करेंगे।

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