राष्ट्रवाद किसी धर्म या जाति से बंधा नहीं : प्रणब मुखर्जी

नागपुर.पूर्व राष्ट्रपति और कांग्रेस नेता प्रणब मुखर्जी कल संघ के कार्यालय पहुंचे| प्रणब के संघ कार्यालय पहुँचने से देश की सभी राजनीतिक दलों में बेचैनी बढ़ गई थी|

सब की निगाहे इस बात पर टिकी थी की प्रणब आखिर संघ कार्यालय में क्या बोलते है| प्रणब ने गुरुवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मंच पर राष्ट्रीयता, राष्ट्रवाद और देशभक्ति पर अपनी बात साफ शब्दों में रखी।

संघ के दीक्षांत समारोह में दिए अपने भाषण में प्रणब ने कहा कि नफरत और असहिष्णुता हमारी राष्ट्रीय पहचान को धुंधला कर देगी। करीब 30 मिनट के भाषण के दौरान उन्होंने महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू, लोकमान्य तिलक, सुरेंद्र नाथ बैनर्जी और सरदार पटेल का जिक्र किया।

इससे पहले संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा- प्रणब को हमने क्यों बुलाया, ये चर्चा आज हर ओर हो रही है। लेकिन, हम सब भारत माता की संतान हैं.. ये कोई नहीं समझता।

उन्होंने कहा कि हेडगेवारजी भी कांग्रेस के आंदोलन में शामिल हुए और 2 बार जेल गए। इस कार्यक्रम से पहले प्रणब संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार के पैतृक निवास गए। उन्होंने यहां विजिटर बुक में लिखा- मैं भारत माता की महान संतान को श्रद्धांजलि देने आया हूं।

प्रणब ने अपने भाषण में कहा ”मैं यहां राष्ट्र, राष्ट्रवाद और राष्ट्रीयता पर अपनी बात साझा करने आया हूं। तीनों को अलग-अलग रूप में देखना मुश्किल है। देश यानी एक बड़ा समूह जो एक क्षेत्र में समान भाषाओं और संस्कृति को साझा करता है। राष्ट्रीयता देश के प्रति समर्पण और आदर का नाम है।’’

उन्होंने कहा ‘‘भारत खुला समाज है। बौद्ध धर्म पर हिंदुओं का प्रभाव रहा है। यह भारत, मध्य एशिया, चीन तक फैला। मैगस्थनीज आए, हुआन सांग भारत आए। इनके जैसे यात्रियों ने भारत को प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था, सुनियोजित बुनियादी ढांचे और व्यवस्थित शहरों वाला देश बताया।’’

प्रणब ने ”गांधी जी ने कहा था कि हमारा राष्ट्रवाद आक्रामक, ध्वंसात्मक और एकीकृत नहीं है। डिस्कवरी ऑफ इंडिया में पं. नेहरू ने राष्ट्रवाद के बारे में लिखा था- मैं पूरी तरह मानता हूं कि भारत का राष्ट्रवाद हिंदू, मुस्लिम, सिख, इसाई और दूसरे धर्मों के आदर्श मिश्रण में है।”

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