कवर्धा : खुली नेकी की दुकान

कवर्धा (अशोक साहू)जहाँ आप अपने घर मे रखे पुराने समान जैसे कपड़े, चप्पल जूते, बर्तन, कॉपी, पुस्तक.. चीजे छोड़कर चले जाते है और जो जरूरतमंद वो उस समान को ले जाता है.. क्या आपको लगता है वो समान वास्तविक जरूरतमंद को मिलता होगा.. आपके जाने के बाद उस समान का क्या होता है खुले आसमान में रात भर, पानी बरसात में पूरे समान 2-4 दिन में खराब हो जाते है.. साथ ही कही एक ही आदमी बार बार समान ले जाते है तो कही उन सामानों का व्यापार चालू हो चुका है..

इन सब बातों को ध्यान में रख कर नेकी की दुकान खोलने का विचार ज्यादा सही लग रहा है, जहाँ दिन भर एक लड़के को रखा जाए जो समान को व्यवस्थित रखे, साथ ही जो जरूरतमंद वहाँ आये उन्हें समान वितरित करता जाए.. और यदि समान ज्यादा एकत्रित होते है तो उन्हें आसपास के गांवों में भी जरूरतमंदों तक पहुँचाया जाए..

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