पुरुषों की कुण्डली में “शुक्र” को पत्नी और वैवाहिक जीवन का कारक ग्रह क्यू माना गया है

रायपुर ,ज्योतिषीय दृष्टि से व्यक्ति की जन्मकुंडली उसके सम्पूर्ण जीवन चक्र का ही एक प्रतिरूप होती है और कुंडली में बनी ग्रह स्थितियां ही व्यक्ति के जीवन के प्रत्येक पक्ष को नियंत्रित करती हैं और प्रत्येक व्यक्ति की कुंडली में बनी अलग – अलग ग्रह स्थितियां प्रत्येक व्यक्ति को भिन्न-भिन्न प्रकार से और भिन्न-भिन्न समय पर सफलताएं देती हैं, कुंडली में बने ग्रह योग व्यक्ति के भाग्य की सफलता और संघर्ष को तो निश्चित करते ही हैं पर ग्रहों की कुछ विशेष स्थितियां व्यक्ति को अन्य व्यक्तियों के द्वारा भाग्योदय प्रदान करती हैं इसी दृष्टिकोण को लेकर यहाँ हम पुरुषों की कुंडली में स्त्री भाग्य को लेकर ज्योतिषीय चर्चा कर रहे हैं।
ज्योतिष में कुछ ऐसे विशेष ग्रह योग होते हैं जिनमे व्यक्ति का भाग्योदय स्त्री के द्वारा होता है अर्थात कुछ विशेष ग्रह-स्थितियों में व्यक्ति को विवाह होने के उपरांत विशेष भाग्योदय और सफलता मिलती है तथा जीवन में विवाह और पत्नी के आगमन के बाद व्यक्ति के जीवन सकारात्मक परिवर्तन आने लगते हैं क्योंकि कुछ पुरूषों की कुंडली में कुछ ऐसे विशेष ग्रह योग होते हैं जिनमे स्त्री ही उनके भाग्योदय का कारण बनता है और जीवन में उनकी पत्नी का आगमन होने के बाद ही भाग्योदय होता है तो आईये प्रसिद्ध ज्योतिषी डॉ. विश्वरँजन मिश्र से जानते हैं ऐसे कुछ विशेष ग्रहयोग..

पुरुषों की कुण्डली में “शुक्र” को पत्नी और वैवाहिक जीवन का कारक ग्रह माना गया है इसके अलावा सप्तम भाव और सप्तमेश विवाह और वैवाहिक जीवन को नियंत्रित करते हैं तो इन्ही ज्योतिषीय घटकों की कुछ विशेष स्थितियां व्यक्ति को स्त्री से भाग्योदय देता है।

1. कुंडली में बारहवे भाव का भाग्योदय से भी सम्बन्ध होता है बारहवे भाव में स्थित ग्रह व्यक्ति का भाग्योदय कराता है अतः जिन पुरुषों की कुंडली में शुक्र बारहवे भाव में स्थित होता है उनका विशेष भाग्योदय उनके विवाह के बाद ही होता है, ऐसे लोगों के विवाह के बाद उनके जीवन में विशेष सफलताएं मिलती हैं और पत्नी जीवन में बहुत सहायक होती है।

2. जिन लोगों की कुंडली में शुक्र दशम भाव में हो या चतुर्थ भाव में होकर दशम भाव पर शुक्र की दृष्टि हो तो ऐसे में भी व्यक्ति के विवाह के बाद भाग्योदय और करियर में विशेष सफलताएं मिलती हैं
और पत्नी का जीवन में आगमन जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है।

3. पुरूषों की कुंडली में शुक्र यदि नवम भाव (भाग्य स्थान) में हो या तीसरे भाव में होकर भाग्य स्थान को देख रहा हो तो ऐसे में भी जीवन में पत्नी के आगमन अर्थात विवाह के बाद भाग्य में उन्नति होती है और भाग्योदय होता है।

4. शुक्र का दशमेश और भाग्येश के साथ होना भी स्त्री के भाग्य से सफलता और भाग्योदय देता है।

5. दशमेश और सप्तमेश का राशि परिवर्तन अर्थात सप्तमेश दशम भाव में और दशमेश सप्तम भाव में हो तो ऐसे में भी व्यक्ति के विवाह के उपरांत जीवन में विशेष उन्नति होती है।

6. सप्तमेश और नवमेश (भाग्येश) का राशि परिवर्तन भी जीवन में पत्नी के आगमन के बाद विशेष भाग्योदय देता है।

7. पुरुषों की कुंडली में सप्तमेश का नवम या दशम भाव में स्थित होना या सप्तमेश का नवम या दशम भाव को देखना भी विवाह उपरांत विशेष सफलता और भाग्योदय देता है।

8. कुंडली में यदि सप्तमेश या शुक्र दशम भाव में हों या दशम भाव को देखते हों तो ऐसे में पत्नी भी वर्किंग होती है और जीवन निर्वाह में सहायक होती है।

9. सप्तमेश का भाग्येश और दशमेश के साथ योग होना भी जीवन में पत्नी के आगमन के बाद भाग्योदय देता है।

तो पुरुषों की कुंडली में इन कुछ विशेष ग्रहयोगों के उपस्थित होने पर व्यक्ति के जीवन में स्त्री के भाग्य से सफलता का कारण बनता है और विवाह उपरांत जीवन में पत्नी के आगमन के बाद विशेष भाग्योदय होता है।
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भविष्यवक्ता
(पं.) डॉ. विश्वरँजन मिश्र, रायपुर
एम.ए.(ज्योतिष),रमलाचार्य, बी.एड., पी.एच.डी.
मोबाइल :- 9806143000,
8103533330

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