राफेल डील हिंदुस्तान का सबसे बड़ा घोटाला – प्रदीप यदु

रायपुर । सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर प्रदीप यदु ने एक निजी होटल में पत्रकार वार्ता की जिसमें कहा कि पिछले कुछ सालों से सेना को नीचे लाया जा रहा है। उसके साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है।और सातवें वेतन आयोग ने सेना की आवाज नहीं सुन रही है। हार्ड एरिया एलाउन्स में सेना के साथ भेदभाव किया जा रहा है।सेना के पेंशनरों को औसतन 15500 रुपए प्रति माह पेंशन दिया जाता है।और उन्होंने कहा कि वित्तमंत्री अरुण जेटली ने वन रैंक वन पेंशन को लेकर गुमराह किया है। आज तक केंद्र सरकार ने वन रैंक वन पेंशन नहीं दी है. वन रैंक वन पेंशन की मांग को लेकर एक हज़ार दिन से पूर्व सैनिकों का आन्दोलन जारी है।
उन्होंने कहा कि अरुण जेटली अमृतसर से चुनाव हारने के बाद पूर्व सैनिकों के विरोधी हो गए ।क्योंकि उनके लगता है कि पूर्व सैनिकों ने उन्हें हराया है, जबकि अमृतसर में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक है।  प्रदीप यदु ने कहा कि आज भारतीय सशस्त्र सेना की जो तकलीफ है उसके बारे में जानकारी देने मैं यहां आया हूं। आज उन्हें आर्थिक और अन्य परेशानी से जूझना पड़ रहा है। हमारे लिये पहले देश है फिर वो जवान जो हमारे लिए काम करते है उसके बाद भी हम खुश है।


नक्सल ऑपरेशन हुआ हैं फेल उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में 2005-12 तक 1012 जवान शहीद हो चुके है। ये कैसा नक्सल विरोधी ऑपरेशन है।
सेना के साथ हो रहा सौतेला व्यवहार हो रहा हैं
आज तक 7वें पे कमीशन में सशस्त्र सेना की डिमांड को नहीं सुना गया, लेकिन हमारी सेना में इतनी सहनशीलता है कि वो कभी आवाज नहीं उठाते है । अभी हार्ड एरिया एलाउंस जैसे कोई आईएएस, आईपीएस, आईआरएस जैसे लेह-लद्दाख या गोवाहाटी में अगर पोस्ट होते है उन्हें 48 हजार रुपये एक्स्ट्रा एलाउंस मिलता था, लेकिन हमारे सैनिक जो सियाचिन में है उन्हें क्या मिलता है। सेना के आर्मी, नेवी के पेंशनर्स की संख्या 25 लाख है और इनको मिलने वाला बजट 33 हजार करोड़ रुपये मतलब औसतन 15 हजार प्रतिमाह प्रत्येक को, लेकिन सेना के संविलियन्स स्टाफ को और आईएएस, आईपीएस जिनकी संख्या 2.5 लाख इन्हें हर महीने 93 हजार मिलता है।
जम्मू-कश्मीर में जवानों को लोग पत्थर मार रहे
उन्होंने बताया कि जम्मू कश्मीर में फौजियों पर लोग पत्थर मार रहे है. वहां फौजी के हाथों में बंदूक है लेकिन उसने आज तक गोली नहीं चलाई. वहां राजनीति के चलते फौजियों को ज्यादती कब तक सहने देंगें, गृहमंत्री वहां जाकर जब भाषण देते है और बोलते हैं कि कुछ बच्चे यहां के नादान है वो पत्थरबाजी कर रहे है। जवानों के साथ बर्बरता करने वालो को ये नादान कहते है।
देश में अब तक तीन रक्षा मंत्री सरकार ने बदल दिए। बाकी मंत्रालयों में तो फेरबदल नहीं हुआ, आज रक्षा मंत्री 2 सौ करोड़ से ज्यादा के बजट को स्वीकृत नहीं कर सकते है. सेना की स्थिति पर 10% पिछली सरकार और आज की मौजूदा सरकार 90% जिम्मेदार है। मैं पहले भी आवाज उठाता रहा हूं और आगे भी उठाता रहूंगा।

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