बीवी से संबंध बनाने को लेकर हाई कोर्ट का चौंकाने वाला फैसला

अपने एक फैसले में मद्रास हाई कोर्ट ने साफ किया है कि शादी के 16 साल बाद पत्नी के संबंध बनाने से इनकार करने को क्रूरता नहीं कहा जा सकता है। अदालत ने हाल ही में दायर की गयी एक याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की है।

दरअसल हाई कोर्ट में पेश की गयी याचिका में एक शख्स ने अपनी पत्नी पर क्रूरता का आरोप लगाया था। इस शख्स ने 1998 में एक महिला से प्रेम विवाह किया था। 2014 में वह इरोड की एक अदालत में तलाक की अर्जी लेकर पहुंचा था।

पीड़ित युवक ने तलाक की अर्जी देते हुए आरोप लगाया था कि, मेरी पत्नी मेरी निष्ठा पर शक करती है और दाम्पत्य अधिकारों से वंचित रखती है। लेकिन इस अधर पर अदालत ने उसे तलाक देने से इनकार कर दिया और शख्स को लताड़ भी लगाई एवं हिदायत दी कि उम्र के साथ आने वाले बदलावों को स्वीकार करना आना चाहिए।

इरोड की अदालत के फैसले के खिलाफ इस शख्स ने हाई कोर्ट में अपील की थी और उसकी इस याचिका पर जस्टिस आर. सुबइया और जस्टिस सी. सरवानन की बेंच सुनवाई कर रही थी। शख्स के वकील ने हाई कोर्ट को उस फैसले की याद दिलाई जिसमें बेंच ने कहा था कि पत्नी का पति को शारीरिक संबंधों से वंचित रखना क्रूरता की श्रेणी में आता है।

इस पर अदालत ने साफ किया कि यह मामला उस श्रेणी में नहीं आता है क्योंकि दोनों की शादी 1998 में हुई थी और दोनों के एक बच्ची भी है। कोर्ट ने कहा, ‘शादी के 16 साल बाद दैहिक इच्छाओं की पूर्ति में सहयोग ना करने को क्रूरता नहीं कहा जा सकता।’

अदालत ने कहा कि, ‘यह प्राकृतिक है जो कई तथ्यों पर निर्भर करता है, उनमें से बढ़ती उम्र भी एक है, इसके लिए किसी को दोष नहीं दिया जा सकता है।’ कोर्ट के सामने यह भी आया कि इस मामले में पत्नी असल में प्रताड़ित हुई है। 2014 में उसे पति के किसी बाहरी लड़की से संबंध के बारे में पता चला था और दोनों उसी साल एक-दूसरे से अलग हो गए थे।

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