एक परंपरा ऎसी भी, गुलाल लगाओ और वो तुम्हारी ….

हिन्‍दी फिल्‍मों में मेला देखने गए नायक-नायिका के मिलन और बिछड़ने की कहानियां तो आपने बहुत देखी होगी लेकिन भारत में एक ऐसा भी मेला लगता है जो कुंआरों के मन की मुराद पूरी करता है.

दरअसल मध्‍यप्रदेश, इंदौर के आदिवासी आदिवासी इलाकों धार, झाबुआ और खरगोन में भगोरिया मेला बेहद धूमधाम से मनाया जाता है.

भगोरिया हाट-बाजारों में युवक-युवतियां सजधज कर जीवनसाथी को ढूढंने आते हैं. इनमें आपसी रजामंदी जाहिर करने का तरीका भी बेहद निराला होता है.

सबसे पहले लड़का लड़की को पान खाने के लिए देता है अगर लड़की पान खा ले तो हां समझी जाती है. इसके बाद लड़का-लड़की को लेकर भगोरिया हाट से भाग जाता है और दोनों विवाह कर लेते हैं. दूसरा तरीका है, अगर लड़का-लड़की के गाल पर गुलाबी रंग लगा दे और जवाब में लड़की भी लड़के के गाल पर गुलाबी रंग लगा दे तो भी रिश्‍ता तय माना जाता है.

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