ममता बनर्जी के विरोध में भाजपा ने निकाली मौन रैली

रायपुर। पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान लगातार हिंसा और भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या जारी है मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इशारे पर तृणमूल कांग्रेस के गुंडे मतदान को प्रभावित कर रहे हैं, डरा धमका रहे हैं बूथ में घुसकर जबरिया तृणमूल के पक्ष में वोट डलवा रहे हैं। मामला यही शांत नहीं हुआ तृणमूल के गुंडों के हौसले इतने बढ़ गये की भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह जी के रोड शो में हमला किया गया, सैकड़ों कार्यकर्ताओं पर जानलेवा हमला करते हुए गाडिय़ों को जला दिया गया और यह सब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इशारे पर किया जा रहा है। भारतीय राजनीति में चुनाव के दौरान किसी राज्य सरकार द्वारा किया जाने वाला अब तक की सबसे बड़ी लोकतंत्र की हत्या है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी के गुण्डों द्वारा हमला किये जाने के विरोध में भारतीय जनता पार्टी द्वारा देश भर में अनेक स्थानों पर प्रदर्शन किया गया। इसी के तहत रायपुर भाजपा कार्यालय एकात्म परिसर से काली पट्टी बांधकर एक मौन रैली निकाली गयी। एक तरफ जहां लोकतंत्र के महापर्व के रूप में देश भर में लोकसभा चुनाव चल रहे हैं वहीं दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल में वहां की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा लोकतंत्र की हत्या की जा रही है लोकतंत्र में प्रचार प्रसार, रैली भाषण के माध्यम से लोगों तक अपनी विचारधारा पहुंचाने की परम्परा है।
आयोजित मौन रैली के पश्चात पूर्व मुख्यमंत्री एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, राष्ट्रीय महामंत्री सुश्री सरोज पांडे एवं प्रदेश महामंत्री (संगठन) पवन साय, रायपुर जिलाध्यक्ष राजीव अग्रवाल ने रायपुर जिलाधीश को ज्ञापन सौंपा।
जिलाधीश के माध्यम से मुख्य चुनाव आयोग दिल्ली से मांग किया गया कि चुनाव के अंतिम चरण तक पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के ऊपर चुनावी गतिविधियों में भाग लेने पर प्रतिबंध लगाया जाय ताकि निष्पक्ष एवं स्वतंत्र चुनाव सम्पन्न हो सके।
रैली में प्रमुख रूप से पूर्व विधायक श्रीचंद सुंदरानी, देवजी भाई पटेल, प्रदेश प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव, सच्चिदानंद उपासने, छगन मुंदड़ा, केदारनाथ गुप्ता, प्रफुल्ला विश्वकर्मा, जीपी शर्मा, अशोक पाण्डेय, बीरगांव महापौर अम्बिका यदु, मिर्जा एजाज बेग, अंजय शुक्ला, किशोर महानंद, जयंति पटेल, श्यामसुन्दर अग्रवाल, बजरंग खंडेलवाल, योगी अग्रवाल, मुकेश शर्मा, राजेश पाण्डेय, अनुराग अग्रवाल, अनिता महानंद, अकबर अली, गोपी साहू, विजय शर्मा, अमरजीत, विजय जयसिंघानी आदि सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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