बैलाडीला मामले को लेकर आदिवासियों में आक्रोश

रायपुर । छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज ने बैलाडीला मामले को लेकर आक्रोश में है। समाज ने सरकार पर आदिवासियों के हितों की रक्षा करने में नाकामी का आरोप लगाया है। समाज के नेता अरविंद नेताम ने कहा कि जिस पहाड़ को लीज में दिया जा रहा है वो आदिवासियों का आस्था का केंद्र है ऐसा में उसे लीज में नही दिया जा सकता।

नेताम ने कहा कि डिपाजिट 13 बहुत बड़ा डिपाजिट है जिसे अडानी को दिया गया है पर अडानी ने जो बात कही है की वो पिक्चर में नही है ये सही है।

हम लोगो ने बस्तर में टाटा को भी देखा है और अडानी को भी देख रहे है। टाटा को भागना पड़ा क्योकि वो समझ गए थे की कानून आदिवासी के हित में है। अडानी ग्रुप लाभ कमाने के लिए काम कर रहा है। nmdc और cmdc दोनों के कंधे में बंदूक रख चला रहा है अडानी ग्रुप। पूरा इलाका पांचवी अनुसूची में है वहां पैसा क़ानूल भी लागू है जिसके तहत कोई भी प्राइवेट सेक्टर वहां नही घुस सकता।

ये जो विवाद है ये अलग तरीके का नियम है। ये दूसरा केस होगा देश में जहां आदिवासियों के देवता को लीज में देने की बात की जा रही है। इस देश में सब की धार्मिक भावनाओं को महत्व दिया जाता है, लेकिन आदिवासियों की आस्था का केंद्र है इसलिए इसे लीज में देने की बात हुई है। हम सरकारों से निवेदन कर रहे है की हमारी समस्या को गंभीरता से लें नही तो दूरगामी परिणाम गंभीर होंगे।

नेताम ने कहा जब हम अंग्रेजों से लड़ सकते है तो अपनी सरकार से लड़ने में की दिक्कत नही है। जब मोदी जी की सरकार बनी तब उन्होंने कहा था की अच्छे दिन आएंगे पर मैन कहा था की आदिवासियों के अच्छे दिन कभी नही आएंगे। आदिवासी कोम्प्रोमाईज़ के मोड़ में नही है।

कल मुख्यमंत्री ने कब जो राज्य सरकार के अधिकार के मामले है उन्हें हम आदिवासियों का पूरा ध्यान रखेंगे। राज्य सरकार से भी शिकायत है उन्होंने कहा था की 15 दिन का समय दे तो ग्राम सभा करेंगे, जब की मामले की गंभीरता को देकगते हुए ग्रामसभा 1-2 दिन में करना था। भूपेश सरकार को एक डेलिगेशन भी भेजना था जो नही भेजा गया।

ये मामला केवल बैलाडीला का मामला नही है, आदिवासियों से जुड़े सभी मामले को समाज गंभीरता से लेगा, अदालत और यूनाइटेड नेशन्स में भी उठाएंगे अगर रास्ता नही निकला तो।

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