रोजगार के अवसर पैदा करना और गांवों की समृद्धि ग्रामीण विकास योजनाओं का लक्ष्य – टी.एस. सिंहदेव

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री ने मैराथन बैठक लेकर की विभागीय योजनाओं की समीक्षा

सड़कों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने अधिकारियों को निर्देश प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-2 में अच्छे काम के लिए कहा ‘वेल डन

 

रायपुर-छत्तीसगढ़ के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री टी.एस. सिंहदेव ने कहा है कि ग्रामीण विकास की सभी योजनाओं का मूल लक्ष्य रोजगार के अवसरों में वृद्धि और गांवों की आर्थिक मजबूती है। विकास योजनाओं के क्रियान्वयन के दौरान भवन और सड़क जैसे निर्माण कार्य होते हैं, लेकिन गांवों और वहां रहने वाले लोगों के लिए बनी योजनाओं का असल मकसद उनके जीवनस्तर को ऊंचा उठाना है। विभागीय योजनाओं का क्रियान्वयन इस तरीके से हों कि इनका पूरा लाभ ग्रामीणों को मिले और उनका जीवन बेहतर हो।

श्री सिंहदेव ने आज यहां निमोरा स्थित ठाकुर प्यारेलाल पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान में विभिन्न विभागीय योजनाओं की समीक्षा की। दिनभर चले मैराथन बैठक में उन्होंने जिलेवार नरवा, गरूवा, घुरवा, बारी योजना के तहत गौठान व चारागाह निर्माण, मनरेगा कार्यों, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना, मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क योजना, स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना एवं राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के साथ ही ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, पंचायत संचालनालय तथा विकास आयुक्त कार्यालय के कार्यों की समीक्षा की।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री टी.एस. सिंहदेव ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना तथा मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को गुणवत्तापूर्ण सड़कों का निर्माण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण सड़कों का निर्माण विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी है। खराब सड़कों के निर्माण पर वे ठेकेदारों पर दोष नहीं मढ़ सकते। उन्होंने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-2 के तहत सड़क निर्माण में पूरे देश में छत्तीसगढ़ को सर्वश्रेष्ठ स्थान मिलने पर विभागीय अधिकारियों की पीठ थपथपाई। उन्होंने कहा कि सड़कों की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। कुल निर्मित सड़कों की लंबाई और गुणवत्ता दोनों में हमारा प्रदेश नम्बर वन होना चाहिए।

श्री सिंहदेव ने नरवा, गरूवा, घुरवा, बारी योजना के तहत गौठान व चारागाह निर्माण के लिए अब तक किए गए कार्यों पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि गौठानों की व्यवस्था और इसके दीर्घकालीन संचालन के लिए पंचायतों एवं ग्रामीणों को सहभागिता के लिए प्रेरित करें। उन्होंने पशुओं के लिए हरे चारे की व्यवस्था के लिए चारागाह विकास के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। पंचायत मंत्री ने नालों को रिचार्ज करने जीआईएस और भुवन मैप की मदद से शीघ्र कार्ययोजना तैयार कर काम शुरू करने कहा। उन्होंने कहा कि गौठान, चारागाह और कम्पोस्ट निर्माण से गांव के कम से कम 10 परिवारों को नियमित रोजगार मिलना चाहिए।

श्री सिंहदेव ने मनरेगा के अंतर्गत निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप कार्यों को तेजी से पूर्ण करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा कि लक्ष्य के अनुसार कार्य पूर्ण होने पर भारत सरकार से और भी राशि मांगी जा सकती है। बैठक में बताया गया कि चालू वित्तीय वर्ष में मनरेगा के तहत जल संरक्षण-संवर्धन कार्यों के लिए 28 हजार 590 निजी डबरियों, छह हजार 170 नए तालाबों और 11 हजार 630 कुंओं के निर्माण का लक्ष्य है। इन कार्यों के स्वीकृति की प्रक्रिया भी शुरू की जा चुकी है।

समीक्षा बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री आर.पी. मंडल, प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री राकेश चतुर्वेदी, अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (कैम्पा) श्री श्रीनिवास राव, जल संसाधन विभाग के सचिव श्री अविनाश चंपावत, मनरेगा आयुक्त एवं प्रधानमंत्री आवास योजना के संचालक श्री भीम सिंह, छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री आलोक कटियार, संचालक पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्री जितेन्द्र शुक्ला, स्वच्छ भारत मिशन के मिशन संचालक श्री नरेन्द्र दुग्गे और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के संचालक श्री अभीजित सिंह सहित सभी 27 जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा वरिष्ठ विभागीय अधिकारी मौजूद थे।

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