सरकारी मिशनरी की शिथिलता से उद्यमी परेशान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2 वर्षों से अधिक समय से पूर्ण बहुमत के साथ भाजपा की सरकार अस्तित्व में है जिसके मुखिया योगी आदित्यनाथ एक स्वच्छ कर्मठ और राजनेता के रूप में प्रसिद्ध हैं। मार्च 2017 में नई सरकार के गठन होते ही उत्तर प्रदेश के उद्यमियों को एक नई आशा की किरण दिखाई दी थी क्योंकि सरकार ने प्राथमिकता के आधार पर प्रदेश में नई औद्योगिक निवेश एवं रोजगार सृजन पॉलिसी 2017 की घोषणा कर दी थी। वर्ष 2017 में ही इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक सोलर हैंडलूम फूड प्रोसेसिंग क्षेत्रों के लिए नीतियों की घोषणा सरकार द्वारा की गई।
वर्ष 2018 में यूपी वेयरहाउसिंग टूरिज्म डिफरेंस मिल्क फार्मास्यूटिकल क्षेत्रों के लिए 5 नई नीति की घोषणा की गई इस प्रकार प्रदेश में बीजेपी सरकार द्वारा अब तक 13 विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित औद्योगिक नीतियों की घोषणा की जा चुकी है। इससे स्पष्ट है कि सरकार शीर्ष स्तर पर उत्तर प्रदेश में निवेश आकर्षित करने एवं औद्योगिक स्थापना के लिए गंभीर है। प्रदेश में पहली बार फरवरी 2018 में उत्तर प्रदेश का आयोजन किया गया था जिसमें 4.2 लाख करोड़ रुपए के 1045 अनुबंध प्रदेश में उद्योग लगाने के लिए किए गए थे इन सभी बातों को देखते हुए उत्तर प्रदेश के उद्यमी काफी उत्साहित थे। इस प्रकार सरकार में उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान संभव हो पाएगा परंतु आज 2 वर्ष से अधिक समय व्यतीत होने के बाद प्रदेश के उद्यमियों की आशाएं धूमिल होती नजर आ रही है क्योंकि प्रदेश सरकार द्वारा जितने भी औद्योगिक नीतियां घोषित की गई थी उनके क्रियान्वयन एवं औद्योगिक संगठनों के साथ अनुश्रवण की कोई भी प्रक्रिया स्थापित नहीं है।

इन सब बातों से प्रदेश के सरकारी मशीनरी की सक्रियता पर प्रश्न चिन्ह लग गया है

यह बातें आईआईए भवन स्थित विभूति खंड गोमती नगर लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कही गई हैं.

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