मध्य प्रदेश में दो साल तक नहीं खुलेगा नया बीएड कॉलेज, न बढ़ेंगी सीटें

इंदौर. नेशनल काउंसिल ऑफ टीचिंग एजुकेशन (एनसीटीई) ने निर्देश जारी करते हुए प्रदेश में नए बीएड कॉलेजों पर रोक लगा दी है. ऐसे में 2018 तक नए कॉलेजों के लिए कोई आवेदन नहीं कर सकेगा. बीएड-एमएड कोर्स में कम होते एडमिशन को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है. साथ ही कोर्स में सीटें बढ़ाने से भी इनकार कर दिया है.

शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए एनसीटीई सत्र 2018-19 तक किसी भी नए कॉलेज का आवेदन स्वीकार नहीं करेगा. उसका मानना है प्रदेश में छात्रों की संख्या से अधिक कॉलेजों में सीटें हैं. ऐसे में काउंसलिंग के बाद खाली सीटें भरने के लिए कॉलेज संचालक कॉलेज लेवल काउंसलिंग (सीएलसी) की मांग करते हैं. इसको लेकर कई बार शासन पर दबाव बनाया जाता है.

फिलहाल प्रदेशभर में लगभग 475 कॉलेज संचालित हो रहे हैं, जिनमें बीएड की छह हजार और एमएड की पांच हजार सीटें हैं. अकेले इंदौर में 54 कॉलेज हैं. एनसीटीई ने साफ कर दिया है कि शासन की अनुशंसा होने पर भी नए कॉलेज शुरू करने पर विचार किया जाएगा. सूत्रों के मुताबिक प्रदेशभर के कॉलेजों में 30 फीसदी छात्र बिहार, गुजरात और उप्र के हैं.

दो साल पहले वाले आवेदन भी अटके

सत्र 2014-15 के दौरान एनसीटीई को भेजे गए 15 आवेदन पर अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है. इस कारण कई कॉलेज खोलने की प्रक्रिया अटक गई. मामले में राज्य शासन से संस्था ने राय पूछी है. हालांकि अभी तक शासन ने नए कॉलेजों के बारे में प्रदेश में कोई जरूरत नहीं बताई है.

एमएड में सीएलसी पर असमंजस

2016-17 में एमएड कोर्स में बहुत कम एडमिशन हुए हैं. इसी कारण कॉलेज संचालक अभी उच्च शिक्षा विभाग और शिक्षा मंत्री से सीएलसी की मांग कर रहे हैं. जबकि विभाग ने इस प्रक्रिया को मना कर दिया है. वहीं मंत्री की तरफ से स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है.

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