बेंगलुरू : कुछ सप्ताह पहले कहा जा रहा था कि विराट कोहली मिट्टी को छू लें, तो वो सोना हो जाएगी. विराट कुछ करें, तो वो गलत हो ही नहीं सकता. बल्ले के साथ उतरते हैं, तो रन बरसते हैं. गेंदबाजी में बदलाव करते हैं, तो विकेट मिलते हैं. लेकिन अब क्या वो दौर समाप्त हो रहा है?

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच दूसरे टेस्ट के तीसरे दिन विराट कोहली का आउट होना बदकिस्मती ही कहा जा सकता है. विराट को जोश हेजलवुड की गेंद पर एलबीडबल्यू घोषित किया गया. उन्होंने 12 रन बनाए थे. विराट को अंपायर नाइजल लॉन्ग ने आउट दिया. उसके बाद विराट ने डीआरएस लेने का फैसला किया. यहा भी फैसला उनके खिलाफ गया.

हालांकि फैसला इतनी आसानी से नहीं लिया जा सका. दरअसल, हेजलवुड की इन कटर कोहली के पैड पर लगी. ऐसा लगा कि बल्ले का अंदरूनी किनारा लेकर गेंद पैड पर लगी है. तीसरे अंपायर ने हर एंगल को देखा. करीब पांच मिनट का वक्त लिया गया. इसके बावजूद किसी फैसला पर नहीं पहुंचा जा सका. मैदान के अंपायर पर फैसला छोड़ दिया गया. नाइजल लॉन्ग पहले ही आउट दे चुके थे, इसलिए विराट को पैवेलियन लौटना पड़ा.

विराट काफी नाराज थे. ऐसा ड्रेसिंग रूम के दृश्य दिखाए जाने पर नजर आया. दिलचस्प ये रहा कि इसके ठीक बाद बीसीसीआई ने विराट आउट या नॉट आउट लिखकर ट्वीट किया.

लेकिन सवाल सिर्फ इस बार का नहीं है. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चारों पारियों में विराट का बल्ला नहीं चला है. ऑस्ट्रेलिया के आने से पहले विराट ने पिछली कई सीरीज में लगातार रन बनाए थे. पुणे में उन्हें मिचेल स्टार्क ने पहली पारी में आउट किया. वो खाता भी नहीं खेल पाए थे. दूसरी पारी में स्टीव ओ’कीफ की गेंद को छोड़ने की कोशिश में बोल्ड हो गए. 37 गेंद में उन्होंने 13 रन बनाए.

बेंगलुरू टेस्ट की पहली पारी में एक बार फिर उन्होंने गेंद को छोड़ा और विकेट के सामने पकड़े गए. उन्होंने 17 गेंद में 12 रन बनाए. दूसरी पारी में वो 15 रन बनाकर आउट हुए. यानी चार पारियों में उनके 40 रन हैं. इसे सिर्फ चार पारियों में फेल होना माना जाए या बुरे वक्त की शुरुआत की तरह देखा जाए? काश, दूसरी बात न हो, क्योंकि भारतीय क्रिकेट को विराट के शानदार प्रदर्शन की सख्त दरकार है.