रायपुर :मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आज यहां महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित समारोह में राज्य के आंगनबाड़ी केन्द्रों के तीन से छह वर्ष तक के बच्चों के लिए संस्कार अभियान और शेष 26 जिलों में संकटग्रस्त महिलाओं के लिए खुलने वाले वन स्टाप ‘सखी-केन्द्रों’ का एक साथ शुभारंभ किया।

नन्हें बच्चों के भविष्य निर्माण में आंगनबाड़ी केन्द्रों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए डॉ. सिंह ने कहा – दिखने में छोटे लगने वाले रचनात्मक कार्यों का बड़ा असर समाज और पूरे देश में होता है। अच्छा काम स्वयं बोलता है। उन्होंने कहा-राज्य के लगभग 50 हजार आंगनबाड़ी केन्द्रों में हमारी कार्यकर्ता बहनें नन्हें बच्चों की देखभाल, उन्हें स्कूल पूर्व शिक्षा देने और कुपोषित बच्चों की सेवा का जो सराहनीय कार्य स्थानीय स्तर पर कर रही है, वह देखने में छोटा जरूर लगता है पर उसका सकारात्मक असर भावी पीढ़ियों सहित पूरे देश पर होता है। समारोह का आयोजन बूढ़ातालाब (विवेकानंद सरोवर) के सामने इण्डारे स्टेडियम में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में किया गया।
मुख्य अतिथि की आसंदी से समारोह को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा – आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों के भविष्य को गढ़ने का काम हो रहा है। ये बच्चे ही आगे चलकर डॉक्टर, इंजीनियर बनेंगे और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए देश का नाम रौशन करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा बड़े शहरों में लोग अपने ढाई-तीन साल के बच्चों को नर्सरी में दाखिल करवाते हैं। नर्सरी में जो शिक्षा बच्चों को मिलती है, गांवों में यही कार्य हमारे आंगनबाड़ी केन्द्रों की बहनें कर रही हैं। डॉ. सिंह ने कहा – हमारी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बहनें इन बच्चों की शिक्षक और मां के रूप में भी अपनी भूमिका निभाती है। वे बच्चों में स्कूल का भय दूर करती है और आंगनबाड़ी केन्द्रों के प्रति उनमें दिलचस्पी जगाती है। यही हमारी इन कार्यकर्ता बहनों की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा- स्वच्छ भारत मिशन के तहत छत्तीसगढ़ की महिलाएं गांवों को साफ-सुथरा बनाने की दिशा में सराहनीय कार्य कर रही है। स्वयं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी विगत छत्तीसगढ़ यात्रा के दौरान डोंगरगढ़ की आम सभा में 104 वर्षीय माता कुंवर बाई का चरण स्पर्श कर इसके लिए उन्हें सम्मानित कर चुके हैं, जिन्होंने बकरियां बेचकर उसकी आमदनी से गांव में अपने घर में शौचालय बनवाया और ग्रामीणों भी प्रेरित किया। मुख्यमंत्री ने कहा बालक-बालिका जन्म अनुपात में छत्तीसगढ़ आदर्श स्थिति में हैं। हमारे यहां प्रत्येक एक हजार बालकों में 991 लड़कियां पैदा होती हैं। हमारे यहां भ्रूण हत्या का पाप नहीं होता। महिला साक्षरता में भी वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री ने अपने उद्बोधन के प्रारंभ में छत्तीसगढ़ की संस्कृति और यहां के संस्कारों का उल्लेख करते माता कौशल्या, डोंगरगढ़ की देवी बम्बलेश्वरी, दंतेवाड़ा की देवी दंतेश्वरी, रतनपुर की मां महामाया और चन्द्रपुर की मां चन्द्रहासिनी देवी को भी याद किया और कहा कि इन देवियों के आशीर्वाद से छत्तीसगढ़ में सुख-शांति है। जेन्डर अनुपात में छत्तीसगढ़ की स्थिति पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों से बेहतर है। डॉ. रमन सिंह ने इस बात पर खुशी जतायी कि महिला और बाल विकास विभाग द्वारा शुरू किए गए संस्कार अभियान के तहत आंगनबाड़ी केन्द्रों में तीन साल से छह साल तक आयु समूहों के बच्चों को स्कूल जाने के पहले खेल-खेल में प्रारंभिक बाल्य अवस्था की शिक्षा और भी ज्यादा रोचक तरीके दी जाएगी। इसके लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने विभाग द्वारा एक वीडियो प्रशिक्षण फिल्म भी तैयार की गई है। डॉ. सिंह ने इस अवसर पर संस्कार अभियान के तहत आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों को खेल-खेल में दी जाने वाली शिक्षा से जुड़ी गतिविधियों का प्रत्यक्ष अवलोकन भी किया।

उन्होंने आज के कार्यक्रम में संस्कार अभियान के प्रतीक चिन्ह सहित उसके वीडियो ट्यूटोरियल का विमोचन किया और कुछ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को अभियान की स्रोत सामग्री भी सौंपी। डॉ. सिंह ने कार्यक्रम में प्रदेश के सात जिलों की आठ हजार 500 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए मोबाइल फोन वितरण और पर्यवेक्षकों के लिए कम्प्यूटर टेबलेट वितरण कार्य का भी शुभारंभ किया। आंगनबाड़ी सेवाओं में मोबाइल फोन के इस्तेमाल के लिए पायलेट प्रोजेक्ट के तहत इनमें रायपुर, महासमुंद, दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, कबीरधाम (कवर्धा) और गरियबांद जिले शामिल किए गए हैं। इन्हें मिलाकर 27 में से 17 जिलों में विश्व बैंक की सहायता से 43 एकीकृत बाल विकास परियोजनाओं का संचालन किया जा रहा है। डॉ. रमन सिंह ने प्रदेश के शेष 26 जिलों में संकटग्रस्त महिलाओं के लिए वन स्टाप सखी केन्द्रों के शुभारंभ का उल्लेख करते हुए कहा – राजधानी रायपुर में 16 जुलाई 2015 को इसकी शुरूआत हो चुकी थी, अब अन्य 26 जिलों में भी ये केन्द्र शुरू हो गए हैं। वहां अब किसी भी माता-बहन को अगर कोई परेशानी आती हो, वे किसी प्रकार के संकट में हो, कोई उन्हें प्रताड़ित कर रहा हो तो तत्काल इन केन्द्रों में सूचना और एफआईआर भी दर्ज करा सकती है। मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की लाडली नोनी योजना का जिक्र करते हुए बताया कि यह गरीब परिवारों की बेटियों के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए शुरू की गई है।  लाडली नोनी योजना में बेटी के जन्म पर सरकार की ओर से पांच हजार रूपए उसके नाम पर बैंक में जमा किए जाते हैं। बेटी के 18 वर्ष के होने पर उसे एक लाख रूपए की धनराशि मिलेगी। डॉ. सिंह ने कहा छत्तीसगढ़ की महिलाएं सार्वजनिक जीवन के हर क्षेत्र में आज अपनी अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। सांसद, विधायक, मंत्री और निगम मंडलों और आयोगों की अध्यक्ष के रूप में भी वे अपनी प्रतिभा और कार्य दक्षता का परिचय दे रही है। राज्य की तीन स्तरीय पंचायतों के चुनावों में महिलाओं को 50 प्रतिशत का आरक्षण दिया गया।

डॉ. सिंह ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू की गई उज्ज्वला योजना की चर्चा करते हुए कहा – प्रधानमंत्री ने देश के पांच करोड़ गरीब परिवारों की महिलाओं को रसोई में होने वाली परेशानी को देखते हुए यह योजना शुरू की गई है। इसके अंतर्गत छत्तीसगढ़ में 35 लाख परिवारों को महिलाओं के नाम पर सिर्फ 200 रूपए के पंजीयन शुल्क पर रसोई गैस कनेक्शन दिए जा रहे हैं। अब तक नौ लाख परिवारों को इनका वितरण किया जा चुका है।  डॉ. सिंह ने कहा कि लकड़ी से चूल्हा जलाकर रसोई बनाने में कम से कम दो घंटे का समय खर्च होते था, जबकि अब यह काम 20 मिनट में होने लगा है। मुख्यमंत्री के मुख्य आतिथ्य में आयोजित समारोह में महिला एवं बाल विकास और समाज कल्याण मंत्री श्रीमती रमशीला साहू, खाद्य मंत्री और रायपुर जिले के प्रभारी श्री पुन्नूलाल मोहले, महिला एवं बाल विकास विभाग की संसदीय सचिव श्रीमती रूपकुमारी चौधरी, पूर्व लोकसभा सांसद सुश्री सरोज पांडेय, राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष श्रीमती शताब्दी पांडेय, राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष श्रीमती हर्षिता पांडेय, समाज कल्याण बोर्ड की अध्यक्ष श्रीमती शोभा सोनी, निशक्तजन वित्त विकास निगम के अध्यक्ष श्रीमती सरला जैन और महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव डॉ. एम. गीता सहित विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी भी उपस्थित थे।