नई दिल्ली : वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शुक्रवार को कहा कि नोटबंदी के बाद लाए गए 2000 रुपए के नोट को वापस लेने का कोई प्रस्ताव नहीं है. लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में वित्त मंत्री ने कहा कि 2000 रुपए की करेंसी को वापस लेने का कोई प्रस्ताव नहीं है. जेटली ने आगे कहा कि 10 दिसंबर 2016 तक 12.44 लाख करोड़ रुपए के 500 और 1000 रुपए के नोट भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की चेस्ट में आए.
बता दें कि नरेंद्र मोदी ने पिछले साल 8 नवंबर को 500/1000 रुपए के बड़ी करेंसी बंद करने का एलान किया था. सरकार के इस फैसले से देश की 85% करंसी चलन से बाहर हो गई थी. इसके बाद 500 और 2000 के नई करेंसी छापी गई.वित्त मंत्री ने कहा कि नोटबंदी के जरिए सरकार ने कालाधन, भ्रष्टाचार, आतंकी फंडिंग और नकली नोटों पर कड़ी कार्रवाई हुई. इसका फायदा हुआ कि बैंकों में ज्यादा नकदी जमा हो पायी और ब्याज दर कम हो गया.
गौरतलब है कि नई करेंसी की छपाई में लागत के सवाल पर सरकार ने कहा है 500 रुपये और 2,000 रुपये के प्रत्येक करेंसी नोट को छापने पर 2.87 रुपये से 3.77 रुपये की लागत बैठती है लेकिन सरकार ने पुराने नोटों को नये नोटों से बदलने पर आई कुल लागत के बारे में कोई संकेत नहीं दिया.

एक प्रश्न के लिखित उत्तर में वित्त राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संसद को बताया कि 500 रुपये के प्रत्येक नोट को छापने पर करीब 2.87 रुपये से 3.09 रुपये की लागत बैठती है तथा 2,000 रुपये के प्रत्येक नोट को छापने पर करीब 3.54 रुपये से 3.77 रुपये की लागत बैठती है.

उन्होंने कहा कि 500 रुपये और 2,000 रुपये के नये नोटों को छापने पर आने वाली कुल लागत के बारे में संकेत देना अभी जल्दबाजी होगी क्योंकि अभी भी इनकी छपाई की जा रही है.