दिल्ली एनसीआर में ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल से जनजीवन अस्तव्यस्त

नई दिल्ली : दिल्ली एनसीआर में ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल से जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है. ट्रांसपोर्टरों की ये हड़ताल सर्कार के नए ट्रैफिक नियम को लेकर बुलाई गई है. नए ट्रैफिक नियमो के तहत बढे हुए जुर्माने के खिलाफ ट्रांसपोर्टरों ने हड़ताल बुलाई है जिसमे दिल्ली एनसीआर के 51 यूनियन शामिल होने का दावा किया जा रहा है.

बतादें इसका असर से रेलवे स्टेशन से लेकर एअरपोर्ट तक सब जगह देखने को मिल रहा है, लोग परेशान नज़र आ रहे है. बच्चो के स्कूल की बसे भी नहीं चलने से स्कूल जाने वाले बच्चो को परेशानी न हो इस लिए कई स्कूल बंद रखे गए है. इधर दिल्ली में लोगो ने बताया की बंद का असर साफ़ टूर पर सब्जी मंडी में भी देखने को मिल रहा है.

ऑटो- टैक्सी की यूनियनें भी इस हड़ताल में शामिल हो रही हैं। मेट्रो और बसों में भीड़ बढ़ सकती है। एसटीए ऑपरेटर एकता मंच के अध्यक्ष सुरिंदर पाल सिंह और महासचिव श्यामलाल गोला का कहना है कि कॉन्ट्रैक्ट कैरिज की 25 हजार बसों में से करीब 7 हजार बसें दिल्ली-एनसीआर के प्राइवेट स्कूलों में चलती हैं और कई प्राइवेट स्कूलों ने ट्रांसपोर्टर्स की हड़ताल के चलते अपने स्कूलों में छुट्टी का ऐलान कर दिया है।

ज्ञात हो दिल्ली-एनसीआर में करीब 25000 कॉन्ट्रैक्ट कैरिज की प्राइवेट बसें चलती हैं और इन बसों से लोग नोएडा, गुड़गांव, गाजियाबाद, बहादुरगढ़, पानीपत, मेरठ तक का सफर करते हैं। ट्रांसपोर्टर्स के दावे के मुताबिक, अगर कॉन्ट्रैक्ट कैरिज की बसें नहीं चलती हैं तो लोगों को अपने ऑफिस जाने के लिए मुश्किल होगी। इसका असर मेट्रो-डीटीसी की बसों में नजर आएगा।

बतादें बढ़े हुए जुर्माने से ऑटो- टैक्सी ड्राइवर भी पीड़ित हैं। उनका कहना है कि ऑटो- टैक्सी चलाने वालों के 20 से 30 हजार रुपये तक के जुर्माने हो रहे हैं और ऐसे में वे अपना घर कैसे चलाएंगे। उनका कहना है कि विभिन्न कंपनियों में चलने वाली ओला- उबर टैक्सियों के ड्राइवर भी हड़ताल को अपना समर्थन देंगे, क्योंकि बढ़े हुए जुर्माने से सभी परेशान हैं। किशन वर्मा का कहना है कि स्कूल कैब असोसिएशन से भी कल स्कूल वैन नहीं चलाने की अपील की गई है। इसके अलावा टूरिस्ट टैक्सी के भी हड़ताल में शामिल होने का दावा किया जा रहा है। एयरपोर्ट पर भी लोगों को काली-पीली टैक्सी और कैब मिलने में परेशानी हो सकती है।