छत्तीसगढ़ में राम राज्य परिषद् की स्थापना होनी चाहिए : स्वरूपानंद सरस्वती

बिलासपुर(सुदीप्तो चटर्जी) : ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती चार दिन के प्रवास पर विगत दिनों बिलासपुर के पावन धरती पर अपने चरण रखे। बिलासा नगरी में उनहोंने अपने शिष्यों एवं भक्तों से मिले और उन्हें आशीर्वचन दिया। छत्तीसगढ़ के विभिन्न जगहों से भक्तगण रोजाना जगद्गुरु शंकराचार्य से मिलने तथा उनका आशीर्वाद लेने पहुँचते थे। जगद्गुरु इतने दयालु हैं की वे देर रात तक उनसे मिलने के लिए पहुंचेवाले भक्तों से मुलाक़ात कर ही शयन हेतु जाते थे। उन्हें देख कर लगता ही नहीं के वे 93 वर्ष के हैं। उम्र के इस पड़ाव में भी उनमे आज भी वही ऊर्जा है जो एक पूर्ण व्यस्कों में होता है। उनके संगस्पर्श में  रहने से उनके आभामंडल से सकारात्मक ऊर्जा निकलती है जो हमे शक्ति प्रदान करती है जीवन में सच्चाई के साथ धर्म का पालन करते हुए अपने पथ पर अग्रसर होने के लिए।

जगद्गुरु शंकराचार्य ने बहुत सी महत्त्वपूर्ण बाते कहीं :

उनसे जब पूछा गया की भारत  जैसे  धार्मिक देश में गौ माता को माता मानने वाले उस माता की निर्दयतापूर्ण हत्या कर दी जाती है और यह व्यवसाय फल फूल रहा है इस पर जगद्गुरु ने कहा – “ धार्मिक दृष्टि से यदि हम देखें तो गौ की आवश्यकता मनुष्य को होती है , इसलिए प्रत्येक गाँव में गोचर भूमि होती है।  साथ ही हम लोग मानते हैं की गौ के रोम रोम में तैंतीस कोटि देवी देवताओं के वास होते हैं। गोबर में लक्ष्मी , मूत्र में गंगा रहती है।  जो व्यक्ति गौ की रक्षा करता है वह सबसे ज्यादा सुखी रहता है। आगे उनहोंने कहा कि जिस किसी मनुष्य को कोई भी कष्ट यदि है, उन्हें अपने घर के गाये के कान में अपना कष्ट बताना चाहिए जिससे उनके कष्टों का निवारण धीरे धीरे हो जाता है। ”

जगद्गुरु शंकराचार्य ने कहा यह तो धर्म की दृष्टि से था, अब यदि हम भौतिक दृष्टि से देखे तो गौ माता का गोबर खाद के रूप में किया जाता है जिससे खेती की पैदावार अच्छी होती है या यूँ कहे की उपज बढ़ती है। गौ मूत्र से औषधि बनते हैं तथा गौ माता के स्वास से ऑक्सीजन की प्राप्ति होती है जिससे वातावरण शुद्ध रहता है।  गौ माता हमको खेती करने के योग्य बैल देती है और घास चर के मीठा दूध देती है। दूध से दही , मठा , घी हमे मिलता है।

गौ माता कभी हिन्दू , मुसलमान , ईसाई आदि का भेदभाव नहीं करती है। इसलिए गौ हत्या अनिवार्य रूप से बंध होनी चाहिए। जगद्गुरु ने आगे कहा की अभी भारत देश गौ मांस का सबसे बड़ा निर्यातक देश है। गोबर को खाद के रूप में इस्तेमाल न कर रसायनिक यूरिया झोंककर खाद्य पदार्थ को अशुद्ध कर रहे हैं। इसलिए गौ माता को बचाएं , गोबर खाद का इस्तेमाल कर शुद्ध अनाज पैदा करें और स्वस्थ जीवन जियें। साथ में उनहोंने यह भी कहा की गौ मूत्र में यदि नीम की पत्ती मिलाकर छिड़काव करते हैं तो कीटों का नाश होता है।

छत्तीसगढ़ में शराब बंदी पर जब उनसे पूछा गया तो उनहोंने कहा  – “ मनुष्य सभी प्राणियों में से श्रेष्ठ माना जाता है।  क्यों ? क्यों कि मनुष्य की बुद्धि होती है।  बुद्धि के कारण ही वे सही और गलत में फर्क महसूस करते  हैं और उसी अनुरूप कार्य भी करते हैं। जितने प्रकार के नशे हैं वे हमारे बुद्धि को ही खराब करते हैं  और नशा उसे कहते हैं जिसके बिना मनुष्य व्याकुल हो जाए। सभी नशा जैसे बीड़ी , सिगरेट , तम्बाखू , खैनी ,पान मसाला  लिए हानिकारक तो है ही लेकिन शराब सबसे ज्यादा हानिकारक है क्यों की वह सीधे मन और मष्तिष्क को ख़राब करता है। ड्रग्स बुद्धि को खराब करने के साथ साथ मनुष्य को मार डालता है। उनहोंने एक वाक्या बताया की नरसिंहपुर के पास एक गाँव था जहाँ 60 स्त्रियाँ विधवा हो गयी क्यों की उनके पति नशा करते थे। ” इसलिए शराब बंदी होनी चाहिए।

जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी सरस्वती से जब पूछा गया की धर्म के नाम पर लोगों को बांटे जा रहे हैं  आप क्या कहेंगे।

शंकराचार्य जी ने कहा की शिर्डी के साईं का समूचे भारतवर्ष में बहुत प्रचार और प्रसार हो रहा है, जो हमारे धर्म के साथ साथ मन्त्रों को बिगाड़ रहे हैं। हम सीता -राम बोलते हैं और आज साईं राम हो गया। हम हनुमान चालीसा पड़ते हैं तो अब साईं चालीसा भी लोग पड़ने लगे हैं। यह सम्पूर्ण धर्म  खिलवाड़ है। शंकराचार्य जी ने कहा की जो लोग साईं राम बोलते हैं , साइन चालीसा पड़ते हैं वे साईं कुरआन बनाकर बताएं , साईं बाइबिल बनाकर बताएं।  उन्होंने प्रश्न उठाया की क्यों नहीं मस्जिदों में साईं की मूर्ती रखते ? हिंदुओं को अपने शास्त्र के अनुसार चलना चाहिए और अपने धर्म शास्त्र की रक्षा करनी चाहिए। हम मिटटी की पूजा नहीं करते अपितु हम भगवान् की पूजा करते हैं। उन्होंने पूछा की साईं की मूर्ती स्थापित करने और प्राण प्रतिष्ठा के कौन से मन्त्र हैं ? हिंदुयों को चाहिए की वे वैचारिक आक्रमण करे। सदाचार की शिक्षा सबसेव महत्त्वपूर्ण है। कुछ लोग लगे हुए हैं लोगों को सदाचार के पथ से हटाने के लिए। पथ भ्रष्ट न होइए। भगवान् का भक्त वही है जो भगवान् की आज्ञा का पालन करे। पत्नी यदि पति की सेवा करे तो भगवान् प्रसन्न होते हैं। आज जो दुनिया बची हुई है वह केवल धर्म के लिए ही बची हुई है। धर्म का ज्ञान जिसे है वह कभी गलत कार्य कर ही नहीं सकता।

जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने यह सन्देश दिया की भारत के लोगों को धर्मान्तरित करने के लिए वेदेशी मशीनरी सक्रिय है जो शिक्षा , मेडिकल , कपडा , अनाज देकर उन्हें धर्म परिवर्तन करवा रही है। हमे उनकी सेवा करनी चाहिए। सनातन धर्म की जानकारी देनी चाहिए। तरह तरह के लोग कान फूंक कर सदाचार से विमुख कर रहे हैं , इसे न होने दे।

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