नरसिंह चतुर्दशी को विष्णु ने लिया था नरसिंह का अवतार

नरसिंह चतुर्दशी यानि नरसिंह चतुर्दशी के दिन भगवान नरसिंह प्रकट हुए थे। आज नरसिंह चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु आधा शेर और आधा नर यानि नरसिंह के रूप में अवतार लिए थे। बैसाख महीने की शुक्ल पक्ष की चर्तुदशी को नरसिंह मनायी जाती है। हिन्दूओं के लिए नरसिंह चतुर्दशी का एक बहुत बड़ा त्यौहार है। इस साल नरसिंह चतुर्दशी 17 मई को है। भगवान नरसिंह को शक्ति का प्रतीक माने जाते हैं। तो आइए नरसिंह चतुर्दशी पर भगवान नरसिंह के शक्ति तथा शौर्य के बारे में जानते हैं।
नरसिंह चतुर्दशी का व्रत से सभी परेशानियां दूर करता है और इस व्रत से भगवान की कृपा बनी रहती है। नरसिंह अवतार में भगवान ने आधा आदमी और आधा शेर का रूप धर लिया था। इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से मनुष्य के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। नरसिंह चतुर्दशी के दिन भगवान नरसिंह के साथ लक्ष्मी माता की भी पूजा करनी चाहिए। इससे लक्ष्मी की भी कृपा बनी रहती है। 
 
नरसिंह चतुर्दशी के दिन कब करें पूजा 
वैसे तो नरसिंह चतुर्दशी का दिन बहुत शुभ होता है लेकिन इस बार शाम पूजा का शुभ मुहूर्त केवल दो घंटा है। नरसिंह चतुर्दशी के दिन पूजा 4:20 से 6:58 तक कर सकते है। 
 
नरसिंह चतुर्दशी से जुड़ी कथा 
ऐसा माना जाता है कि नरसिंह चतुर्दशी के दिन ही भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लेकर दैत्यों के राजा हिरण्यकश्यपु का वध किया था। प्राचीन काल में कश्यप नाम के ऋषि रहते थे। उनकी पत्नी का दिति था। ऋषि कश्यप के दो पुत्र थे एक नाम हरिण्याक्ष और दूसरे का नाम हरिण्यकशिपु था। हरिण्याक्ष से पृथ्वी को बचाने के लिए भगवान विष्णु ने वाराह का रूप धारण कर उसकी हत्या कर दी। उसके बाद हिरण्यकश्यपु अपने भाई के वध से बहुत क्रुद्ध हुआ और उसने वर्षों तक कठोर तपस्या की। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने उसे अजेय होने का आशीर्वाद दिया। इस तरह हिरण्यकश्यपु अजेय बनकर अपनी प्रजा पर अत्याचार करने लगा। अब कोई भी हरिण्यकश्यपु को हरा नहीं सकता था।
हरिण्यकश्यपु की पत्नी कयाधु से उसे प्रहलाद नाम का एक पुत्र पैदा हुआ। प्रहलाद के अंदर राक्षसों वाले गुण नहीं था। वह बहुत संस्कारी था और नारायण का भक्त था। प्रहलाद की आदते देख हरिण्यकश्यपु ने उसमें बदलाव लाने की कोशिश की। लेकिन भक्त प्रहलाद में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। उसके बाद हरिण्यकश्यपु ने बालक प्रहलाद को मारने के लिए अपनी बहन होलिका की गोदी में बैठाकर अग्नि में प्रवेश का आदेश दिया लेकिन इस घटना में प्रहलाद को कुछ नहीं हुआ और होलिका जलकर भस्म हो गयी। उसके बाद हरिण्यकश्यपु ने प्रहलाद को मारने के लिए योजना बनानी शुरू कर दी। एक दिन हरिण्यकश्यपु ने बालक प्रहलाद से कहा कि तुम्हारे भगवान कहां है? तो प्रहलाद ने कहा कि वह तो अन्तर्यामी है और सर्वत्र व्याप्त है। इस पर हरिण्यकश्यपु ने कहा कि वह खम्भे में हैं तो बालक बोला हां। इस पर वह दैत्य राजा ने खम्भे पर मारना प्रारम्भ कर दिया। तभी भगवान नरसिंह खम्भा फाड़ कर बाहर आए और उन्होने हरिण्यकश्यपु का वध कर दिया। 
 
नरसिंह चतुर्दशी का व्रत 
नरसिंह चतुर्दशी का व्रत करने से सभी दुखों का अंत होता है और भगवान की कृपा बनी रहती है। नरसिंह चतुर्दशी के दिन सुबह नहा कर भगवान की पूजा करनी चाहिए। साथ ही हवन में गंगा जल का इस्तेमाल करना चाहिए। 
 
ऐसे करे पूजा 
1.  चंदन, कपूर, रोली और धूप दिखाने के बाद भगवान नरसिंह की कथा सुनें।
2. शाम को मंदिर के पास नरसिंह के साथ माता लक्ष्मी की मूर्ति रखें।
3. पूजा में फल, फूल, चंदन, कपूर, रोली, धूप, कुमकुम, केसर, अक्षत, गंगाजल, काले तिल और पीताम्बर इस्तेमाल करें।
4. पूजा के बाद गरीबों में तिल, कपड़ा दान करें।
5. नरसिंह भगवान की पूजा हमेशा शाम को होती है।
6.  नरसिंह भगवान और मां लक्ष्मी को पीले कपड़े पहनाएं।
 
प्रज्ञा पाण्डेय

Source: Astrology

Leave a Reply