देश का हर 10 में से एक बच्चा Diabetes की दहलीज पर

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नई दिल्ली
10 में से 1 भारतीय बच्चा प्री-डायबीटिक स्टेज का शिकार है। इसके मायने यह हुए कि वह डायबीटीज की दहलीज पर है। यह बात 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हुए पोषण-मूल्यांकन के एक सर्वे में सामने आई है। सर्वे यह भी बताता है कि ये बच्चे बड़े होने पर तेजी से डायबीटीज (मधुमेह) के रोगी बन रहे हैं। पोषण-मूल्यांकन के लिए कराए गए देश का यह पहला सर्वे बताता है कि देश के बच्चों में नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज यानी एक से दूसरे में न फैलने वाली बीमारी का खतरा ज्यादा बढ़ रहा है।

1 से 19 साल के बीच के बच्चों के बीच कराया गया सर्वे
फरवरी 2016 से अक्टूबर 2018 तक करीब 1.12 लाख बच्चों और किशोरों, जिनकी उम्र 1 से 19 साल थी के बीच यह सर्वे करवाया गया था। इनमें से 10 फीसदी बच्चों में हाई ट्राइग्लिसराइड्स पाया गया। बता दें कि ट्राइग्लिसराइड्स की अधिक मात्रा दिल के लिए बुरी है। यह धमनियों को मोटा कर देता है जिससे दिल का दौरा या स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

28 फीसदी किशोरों में की मात्रा अधिक
सर्वे में यह बात भी सामने आई है कि 28 फीसदी किशोरों में खराब कलेस्ट्रॉल (लिपोप्रोटीन) की मात्रा भी अधिक पायी गई जिससे उनमें हृदय रोग होने का खतरा अधिक है। 5 फीसदी बच्चों में हाई की भी शिकायत पाई गई। 7 फीसदी बच्चों और किशोरों में क्रॉनिक किडनी रोग के लक्षण दिखे। ये बच्चे मूलत: दक्षिण, पूर्व और पूर्वोत्तर के राज्यों से ताल्लुक रखते हैं। सरकार अब बच्चों में नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज के जोखिम से निपटने के लिए नई नीति का मसौदा तैयार करने के लिए सर्वेक्षण के नतीजों का करीब से अध्ययन कर रही है।

होने के कारण
आजकल अधिकांश बच्चे लगातार अपने गैजेट्स से चिपके रहते हैं। कई बार तो यह होता है कि माता-पिता या देखभाल करने वाले ही बच्चों का ध्यान बंटाने या उन्हें काबू में रखने के लिए उन्हें स्मार्टफोन या दूसरे गैजेट्स दे देते हैं। बच्चे मनोरंजन के लिए कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर बहुत अधिक निर्भर हो रहे हैं। फिजिकल ऐक्टिविटी न के बराबर हो गई है और इसका उनके फिजिकल और मेंटल हेल्थ पर बुरा असर पड़ रहा है। बिजी लाइफस्टाइल की वजह से बाहर का खाना खाने से फैट बढ़ता जाता है और यही सारी चीजें डायबीटीज की वजह बनती हैं।

लाइफस्टाइल में करें बदलाव
– छोटी उम्र से ही उनको हेल्दी और न्यूट्रिशंस से भरपूर खाना खिलाएं। समय से हेल्दी फूड इनटेक करने से बच्चों को ताउम्र फायदा होता है
– बच्चों को कई तरह का खाना दिया जाना चाहिए जिसमें हेल्दी फैट, साबुत अनाज और लो-फैट डेयरी शामिल हो
– शुगरी ड्रिंक्स, प्रोसेस्ड फूड, रिफाइंड सिरिल्स में कटौती करनी चाहिए
– ताजा फल, सब्जियों और कई फलों वाले जूस दिए जाने चाहिए
– बच्चे पैरेंट्स की लाइफस्टाइल फॉलो करते हैं, अगर माता-पिता हेल्दी फूड खाते हैं, तो उनके बच्चे भी हेल्दी फूड का ऑप्शन ही चुनते हैं
– घर में बच्चे के लिए हेल्दी फूड का ही ऑप्शन रखें

Source: Jara Hat Ke

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