ओवरलोडिंग और अवैध उत्खनन का दीमक चट कर रहा सरकार का राजस्व

रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश अपनी खनिज संपदा के लिए देश भर में जाना जाता है छत्तीसगढ़ में गौण खनिजों का भरमार होने के कारण छत्तीसगढ़ प्रदेश को पूरे देश में खनिज प्रदेश के रूप में जाना और माना जाता है छत्तीसगढ़ के इस खनिज संपदा को जिससे कि सरकार को भारी भरकम राजस्व की प्राप्ति होती है उसे विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से खनन माफिया चट कर रहे हैं।

छत्तीसगढ़ प्रदेश में ओवरलोडिंग और अवैध उत्खनन कर राजस्व की चोरी अब नई बात नहीं रह गई है काफी लंबे समय से सरकार के बहुमूल्य राजस्व में सेंधमारी कर अवैध उत्खनन और परिवहन में लगे लोग अब इतने बड़े हो गए हैं कि अब वे विभाग के कुछ आला अधिकारियों को भी अपने साथ इस गोरखधंधे में मिलाकर एक समांतर सरकार चलाने लग गए हैं जिसमें सारे नियमों को ताक में रखकर धड़ल्ले से अवैध उत्खनन और ओवरलोडिंग कर सरकार के राजस्व में सेंधमारी की जा रही है।

राजस्व में सेंधमारी के इस गोरखधंधे में खदान लीज में लेने वाले से लेकर ट्रांसपोर्ट करने वाले लोगों के साथ विभाग के आला अधिकारियों की सांठगांठ इस तरह फूल फैल रही है कि इस कारोबार में जुड़े लोग सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाने में भी पीछे नहीं है बता दे सरकार ने रेत खदानों को खनिज अभिवहन पास जारी करते समय 10 घन मीटर के परिवहन की इजाजत दी है लेकिन खदानों को लीज में लेने वाले धड़ल्ले से दुगने से अधिक भार क्षमता का माल लादकर रॉयल्टी की चोरी के साथ-साथ नियमों कोई भी अवहेलना कर रहे हैं ऐसे में विभागों का शक्ति के साथ कार्रवाई नहीं करना किसी बड़े गोलमाल की तरफ इशारा करता है।

मालूम हो छत्तीसगढ़ में खनिज के अवैध उत्खनन और परिवहन का मामला काफी लंबे समय से जारी है और विभाग द्वारा केवल खानापूर्ति के तौर पर कार्यवाही की जा रही है बीते दिनों विभाग ने कुछ वाहनों पर कार्यवाही तो की लेकिन आधी अधूरी कई वाहनों को जिन्हें खनिज विभाग ने पकड़ा उन्हें परिवहन के सुपुर्द नहीं किया या फिर ऐसे ही छोड़ दिया ऐसा ही मामला परिवहन विभाग में भी देखने को मिला जिन वाहनों पर परिवहन विभाग ने कार्यवाही की उन पर खनिज विभाग ने कोई भी कार्यवाही शायद नहीं की। खनिज परिवहन के कारोबार से जुड़े एक व्यक्ति ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि विभाग ने केवल उन्हीं पर कार्रवाई की है जो कि कारोबार में नए हैं या जिनकी अधिकारियों के साथ सेटिंग पूरी नहीं है इससे साफ जाहिर होता है कि मामले में बड़े स्तर पर सांठगांठ कर सरकार को चूना लगाया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ के गौण खनिजों का अवैध कारोबार इतना बढ़ गया है कि बीते दिनों रायपुर की रॉयल्टी से महासमुंद के रेत घाटों से रेत का परिवहन किया जा रहा था जिस पर विभाग ने कलेक्टर के दखल के बाद कार्रवाई के नाम पर कारोबारियों को समझाइश देकर मौके पर ही छोड़ दिया इन सारे मामलों का बारीकी से अध्ययन करने पर यही बात साफ होती है कि खनिज का मामला काफी हाई प्रोफाइल है और इसमें बड़े लेवल पर सांठगांठ होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

आपको बता दें कि बीते दिनों ही खनिज विभाग द्वारा छापामार कार्यवाही की गई थी जिसमें तीन ट्रेक्टर ट्राली रेत व 16 ट्रक हाइवा रेत मुरुम पकड़ी गई इन गाड़ियों को भरने के लिए जेसीबी मशीन को भी खनिज विभाग द्वारा पकड़ा गया, इस पर media passion ने ख़बर जब प्रकाशित किया था, उस पर अधिकारियों से इस बावत जानकारी भी ली गई थी, अधिकारियों द्वारा बताया गया था कि किसी भी गाड़ी के पास रॉयल्टी पर्ची नही है, साथ ही मुरुम रेती ओवरलोड़ है, इस पर खनिज विभाग कार्यवाही कर रहा है। ओवरलोड़ पर परिवहन विभाग कार्यवाही करता है।
परिवहन अधिकारी को भी हमारे द्वारा सूचना दी गई थी परंतु क्या कार्यवाही हुई यह एक पहेली बन गया है !
सूत्रों की माने तो ओवरलोड़ गाड़ियों पर परिवहन विभाग ने कोई कार्यवाही नही की मामला बड़े लोगो से था तो ले देकर मामले को सेटल कर लिया गया है।
वही खनिज विभाग ने तो गाड़ी पकड़ कर बाकायदा थानों के सुपुर्द भी किया, जहाँ के रजिस्टर पर 12 गाड़ियों की जानकारी मिली, परंतू बिना कार्यवाही के गाड़ियों को छोड़ देना और राज्य सरकार को हो रही राजस्व हानि की जिम्मेवारी किस की?
सनद रहे कि परिवहन विभाग को सिर्फ पैसा कमाने का एक जरिया बना लिया गया है! सूत्रों की माने तो परिवहन विभाग खनिज विभाग गाड़ियां पकड़कर सेटिंग के तहत थाना परिसर में खड़ा करती है और थानों का हिसाब किताब करने के बाद ही मामले को रफा दफा करने का पूरा खाका तैयार किया जाता है जहां से जिसको जो मिल सके वह अपना जुगाड़ फिट कर लेता है मोटर मालिकों और अधिकारियों के इस तालमेल का खामियाजा प्रदेश सरकार के खजाने पर पड़ता है जिससे किसी को कोई भी फर्क नहीं पड़ता, छत्तीसगढ़ में प्रचुर मात्रा में गौण खनिज उपलब्ध है इसके बावजूद चोरी रुकने का नाम नहीं ले रही है, और चोरी रुकेगी भी कैसे जब सैंया भए कोतवाल तो फिर डर काहे का ! प्रदेश सरकार के खाली होते खजाने का सबसे बड़ा कारण अधिकारियों की मिलीभगत लगती है।

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