नीतीश कुमारमुजफ्फरपुर : ठीक सौ साल बाद मुजफ्फरपुर के ऐतिहासिक लंगट सिंह कॉलेज (एलएस) के ग्राउंड में गांधी-विल्सन की वार्ता हुई, तो इतिहास फिर से जीवंत हो उठा. इसके गवाह सूबे के मुखिया मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बने. इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हम चाहते हैं कि देश गांधी के विचारों पर आगे बढ़े. यह करने के क्रम में अगर हम नयी पीढ़ी तक बापू के विचारों को पहुंचाने में सफल हो जाते हैं, तो अगले 15-20 साल में देश बदल जायेगा, तब इसमें नफरत और हिंसा की कोई

एलएस कॉलेज ग्राउंड में चंपारण स्मृति समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि कैसे 10 अप्रैल, 1917 को गांधी जी पटना पहुंचे थे, जिसके वाहक राजकुमार शुक्ल बने थे. वह उसी दिन मुजफ्फरपुर आ गये थे. यहां स्टेशन पर उनका स्वागत एलएस कॉलेज में शिक्षक रहे आचार्य जेबी कृपलानी ने अपने छात्रों के साथ किया था. उन्हें लेकर एलएस कॉलेज आये थे. यहां पर उन्होंने रात्रि विश्राम किया था. सुबह कॉलेज परिसर में स्थित कुएं पर स्नान किया था. 11 अप्रैल को उन्होंने विभिन्न लोगों से मुलाकात की थी, जिन्होंने चंपारण में निलहों के अत्याचार के बारे में बापू को जानकारी दी थी.

इसमें विंध्यवासिनी बाबू, रामदयालु बाबू व रामनवमी बाबू प्रमुख थे. इन लोगों ने गांधी जी को एहसास कराया कि पूर्व में राजकुमार शुक्ल जी ने जो बातें बतायीं, वे सही हैं. गांधी जी ने 11 अप्रैल को ही प्लांटर्स एसोसिएशन के सचिव जेम्स विल्सन से मुलाकात की थी, जिसका मंचन अभी आपके सामने किया गया. उसके लिए हम आयोजकों को बधाई देते हैं. जिस अंदाज में दोनों के बीच वार्ता हुई. उससे लग रहा था कि सौ साल पहले जो कुछ हुआ, उसको हम सब लोग अपनी आंखों से देख और सुन रहे हैं. बहुत बेहतरीन प्रस्तुति रही. मुख्यमंत्री ने कहा कि  गांधी जी चार दिन तक मुजफ्फरपुर में रहे थे. इस दौरान उन्होंने 13 अप्रैल को तत्कालीन कमिश्नर मार्सेड से मिले थे. अब आजाद भारत के कमिश्नर यहां बैठे हुए हैं. इनके चैंबर में उसका मंचन होने जा रहा है, जिसे हमने स्क्रीन पर दिखाने को कहा है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि गांधी जी जैसे मुजफ्फरपुर पहुंचे और यहां जिस तरह से उन्होंने काम किया. उसके बाद उथल-पुथल शुरू हो गयी थी. तत्कालीन प्रशासन के लोगों को भय हो गया था. तब सभी लोगों ने गांधी जी को हतोत्साहित किया था कि आप चंपारण मत जाइए. कमिश्नर ने भी यही बात कही थी, लेकिन गांधी जी संकल्प के साथ आये थे. आगे बढ़े और मोतिहारी पहुंच गये. उसके बाद 18 अप्रैल को मोतिहारी के एसडीओ कोर्ट में सुनवाई हुई थी. वह अद्भुत है, जिस प्रकार से गांधी जी ने सुनवाई के दौरान कहा कि मैं अपना जुर्म कबूल करता हूं. प्रशासन ने छोड़ने का छोड़ने का आदेश दिया है, लेकिन मैं उसको मानने के लिए तैयार नहीं हूं और मैंने इसका उल्लंघन किया है, इसलिए जुर्म को कबूल करता हूं.

मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय लोगों को लगा था कि गांधी जी वकील है. जिरह करेंगे, लेकिन गांधी जी ने अपनी गलती स्वीकार की, तो लोगों को लगा कि ये हो क्या रहा है. इसके बाद कहा गया कि फाइन जमा कीजिए, लेकिन गांधी जी ने मना कर दिया. जमानत लेने की बात से भी गांधी जी ने इनकार कर दिया था. इसके बाद उनके ऊपर से मुकदमा ही वापस लेना पड़ा था, जिसके बाद 22 अप्रैल को गांधी जी बेतिया के लिए रवाना हुए थे.  मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय गांधी जी ने बेतिया में किस तरह से लोगों की शिकायत सुनी थी. एक-एक चीज को दर्ज कराया था. इसके बाद से ही माहौल बनता गया और अंगरेजी हुकूमत की नींव हिलती गयी. चंपारण सत्याग्रह सफल हुआ. इससे देश की आजादी की लड़ाई में नया मोड़ आ गया. इसके बाद आजादी की लड़ाई इतना जोर पकड़ लेती है कि चंपारण सत्याग्रह के तीस साल के अंदर ही देश आजाद हो गया.

इसलिए हम लोग यहां पूरे जोश और विश्वास के साथ शताब्दी वर्ष मना रहे हैं. पटना में हमने राष्ट्रीय विमर्श का आयोजन किया, जिसमें देश भर के गांधीवादी विचारक जुटे. इसमें जिनको भी बुलाया गया, वे लोग आये. इसमें नब्बे साल से ज्यादा के कई लोग थे. गांधी जी के परिवार से कई लोग आये थे. सब लोग इसमें पधारे. आज ही इसका समापन हुआ है. इस विमर्श का पटना से संकल्प पत्र जारी हुआ है. मुख्यमंत्री ने कहा कि गांधी जी का नाम तो लोग लेते हैं, लेकिन उनके विचार का अनुसरण नहीं करते हैं. आज जो देश की स्थिति है. हम लोगों का सौवें साल में यही संकल्प है. हम केवल कुछ कार्यक्रमों का आयोजन नहीं करने जा रहे हैं. इसकी शृंखला चलेगी. दो साल पहले भी इस तरह का आयोजन हुआ था. आज का आयोजन भी अच्छा है.

17 अप्रैल को देश भर के स्वतंत्रता सेनानियों को पटना में सम्मानित किया जायेगा, जिसमें राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी शामिल होंगे. केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल व राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद समेत सभी दलों के नेता भाग लेंगे. मुख्यमंत्री ने कहा कि हमरा मकसद गांधी जी के विचारों को नयी पीढ़ी तक पहुंचाना है. नाम तो सब जानते हैं, सब दिन जानेंगे. कुछ लोग गांधी जी की पूजा करने लगे हैं. उन्हें इनसान से भगवान के रास्ते में ले जा रहे हैं, लेकिन हम चाहते हैं कि इनसान के रूप में गांधी जी ने जो कुछ किया, उसको बताना चाहते हैं. गांधी जी से पूछा गया कि आपका क्या संदेश है, तब गांधी जी ने कहा था कि मेरा जीवन ही मेरा संदेश है. हम गांधी जी के काम को जन-जन तक पहुंचायेंगे.