लोकवाणी आपकी बात-मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ

लोकवाणी (आपकी बात-मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के साथ) : 
एंकर
– सभी श्रोताओं को नमस्कार, जय जोहार।
– लोकवाणी की पांचवीं कड़ी का मंच तैयार है । इस बार का विषय है ‘‘आदिवासी विकास-हमारी आस’’।
– माननीय मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल जी पधार चुके हैं।
– माननीय मुख्यमंत्री जी, आपका आकाशवाणी के स्टूडियो में हार्दिक स्वागत है।
माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब
– धन्यवाद, नमस्कार, जय जोहार।
– मुझे खुशी है कि आज मैं लोकवाणी के माध्यम से प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों, वन क्षेत्रों, आदिवासी अंचलों की जनता से सीधे बात कर रहा हूं।

– वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, प्रदेश में अनुसूचित जनजाति की आबादी लगभग एक तिहाई है। आप लोगों ने अपनी सोच, अपनी परम्परा, अपनी संस्कृति, अपने योगदान से छत्तीसगढ़ को एक विशेष पहचान दी है।
– अनुसूचित जनजाति के लोग अपनी जिंदगी में रमे होते हैं। अपनी आकांक्षाएं मुखर करने में भी संकोच करते हैं। इसलिए लोकवाणी का विषय ‘‘आदिवासी विकास-हमारी आस’’ अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस विषय पर अपने विचार रखने वाले सभी श्रोताओं का मैं हार्दिक अभिनंदन करता हूं।
एंकर
– माननीय मुख्यमंत्री जी, सबसे पहले हम आपको कुछ ऐसे विचार सुनाना चाहते हैं, जो आदिवासी समाज के बहुत से विषयों को सामने लाते हैं।
– नारायणपुर के फरस कुमार तथा रामजी ध्रुव सहित अनेक साथियों ने तेंदूपत्ता संग्रहण पारिश्रमिक के संबंध में कहा है।
– लीजिए सुनते है उनकी ही आवाज में उनकी बात….
1. (फरस कुमार, जिला नारायणपुर- तेंदूपत्ता संग्रहण में हम कार्य करते हैं, जहां हम अच्छा बोनस भी पाए हैं। हम मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद देते हैं।)
2. (रामजी ध्रुव, जिला नारायणपुर- अबुझमाड़ी समाज अध्यक्ष अभी जो तेंदूपत्ता वाला काम किये हैं ये बहुत ही अच्छा है, लेकिन हमारा मानना है कि उसमें कुछ बदलाव किया जा सके। अभी हमारे अबुझमाड़ में खासकर आवागमन सुविधा बिलकुल भी ठीक नहीं है तो उसके लिये कुछ हो जाता तो और भी अच्छा हो जाता।)
माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब
– धन्यवाद, फरस कुमार जी और रामजी ध्रुव जी हमने तेंदूपत्ता संग्रहण मजदूरी को 2500 रू. से बढ़ाकर 4000 रू. प्रति मानक बोरा कर दिया है, ताकि आप लोगों की आमदनी में तुरंत और सीधी बढ़ोत्तरी हो जाए।
– मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि वर्ष 2019 में 15 लाख मानक बोरा से अधिक तेंदूपत्ता संग्रहण हुआ, जिसके एवज में 602 करोड़ रू. मजदूरी का भुगतान किया गया।
– यह राशि पिछले वर्ष की तुलना में 226 करोड़ रू. अधिक है।
– इसके साथ ही हमने लघु वनोपजों के समर्थन मूल्य पर खरीदी का दायरा भी बढ़ा दिया है।
– पहले सिर्फ 7 वनोपजों की खरीदी करते थे जबकि अब हमारी सरकार द्वारा 15 वनोपजों की खरीदी की जा रही है।
– 3 लघु वनोपजों, रंगीनी लाख पर 20 रू. किलो, कुल्लू गोंद पर 20 रू. किलो तथा कुसमी लाख पर 22 रू. किलो अतिरिक्त बोनस देने का इंतजाम भी किया गया है।
– आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि प्रदेश में वनोपज का कारोबार लगभग 18 सौ करोड़ रू. का होता है, जिसमें हमारे आदिवासी समाज को समुचित भागीदारी नहीं मिली थी। अब हमारी सरकार ने ऐसे नये रास्ते तलाशे हैं, जिससे आप सभी भाई-बहनों की आय बढ़ सकेगी।
– हम आदिवासी समाज में मातृ-शक्ति को और सशक्त बनाना चाहते हैं, इस दिशा में एक नया कदम उठाते हुए यह निर्णय लिया है कि वनोपजों के कारोबार से महिला समूहों की 50 हजार से अधिक सदस्याओं को जोड़ा जाएगा।
– परम्परागत वैद्यकीय ज्ञान भी छत्तीसगढ़ के वन अंचलों की विशेषता है। इस कौशल को लम्बे अरसे में न तो मान्यता मिली और न सुविधा, जबकि जड़ी-बूटियों के औषधीय गुणों को लेकर कोई संदेह नहीं है।
– हमने परम्परागत वैद्यों के कौशल और ज्ञान को सहेजने तथा इसे उपयोग में लाने के लिए 1200 परम्परागत वैद्यों का एक सम्मेलन आयोजित किया, अब इस दिशा में कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है।
– अबुझमाड़ में आवागमन की सुविधा बढ़ाने का सुझाव बहुत अच्छा है।
– मैं बताना चाहता हूं कि अबुझमाड़ में राजस्व सर्वे ही नहीं हुआ था, जिसके कारण यहां विकास के कार्य प्रभावित हुए थे। हमारी सरकार ने पहली बार अबुझमाड़ का राजस्व सर्वे कराने का निर्णय लिया है।
– अब अबुझमाड़ में विकास की रौशनी पहुंचने से कोई रोक नहीं सकता। हम प्राथमिकता से यहां सड़क, बिजली, पानी, अस्पताल, शिक्षा जैसी सारी सुविधाएँ पहुंचाएंगे।
– इस समय नारायणपुर-ओरछा/नारायणपुर-धौड़ाई-कन्हार गांव- बारसूर/ नारायणपुर-सोनपुर-कांेगे जैसी अनेक सड़कों का निर्माण किया जा रहा है, जिनकी लम्बाई लगभग 250 कि.मी. तथा लागत लगभग 300 करोड़ रू. है।
– इसके अलावा भी एक दर्जन से अधिक सड़कों का निर्माण 150 करोड़ रू. की लागत से किया जा रहा है। जिससे ओरछा – गुदाड़ी-कोडोली-गारपा-आकाबेड़ा-किहकाड़ आदि स्थानों पर पहुंचना आसान हो जाएगा और करीब 20 करोड़ रू. की लागत से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, कन्या छात्रावास, शाला भवन आदि का काम भी चल रहा है।
एंकर
– माननीय मुख्यमंत्री जी, अब सुनते हैं- ग्राम पंचायत सिरसिदा, जिला धमतरी के भाई चंद्रभान मरकाम के विचार…..
(हमारे गांव में 98 प्रतिशत आदिवासी गोंड़ समाज के लोग रहते हैं। यहां बालका नदी बहती है, जिससे यह क्षेत्र कटाव और क्षतिग्रस्त स्थिति में है। यहां नई पुलिया बनाने के लिए शासन को काफी बार आवेदन-निवेदन किया गया है। मुख्यमंत्री जी के लोकवाणी कार्यक्रम ‘‘आदिवासी विकास-हमारी आस’’ के माध्यम से एक बार फिर मैं निवेदन कर रहा हूं। क्या हमारी आस पूरी हो पायेगी?)
माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब
– मरकाम जी, आपने नदी की चिंता की इसलिए मैं आपको विशेषतौर पर साधुवाद देता हूं। मैं आपसे सहमत हूं। नदी बचाने से ही जिन्दगी बचती है। इसीलिए नदियों को जीवनदायिनी कहा जाता है।
– हमारी सरकार ने आते ही ‘नरवा-गरवा-घुरवा-बारी’ के लिए एक महाअभियान शुरू किया। जिसमें नरवा का आशय नालों के साथ हर तरह के जलाशयों को बचाना है। नदी, नाले, झील, तालाब, कुएं और ऐसी हर संरचना जिससे बारिश का पानी बहने से रूके, भू-जल की रिचार्जिंग हो, नये जल स्त्रोत मिलंे, ऐसे सारे उपाय हम कर रहे हैं।
– बस्तर की जीवनदायिनी नदी इंद्रावती को बचाने के लिए हमने प्राधिकरण का गठन किया है।
– नदी तट कटाव में कमी लाने हेतु इंद्रावती, खारून तथा अरपा नदियों के 462 हेक्टेयर क्षेत्र में 6 लाख पौधों का रोपण किया जा रहा है।
– बालका नदी पर करीब पौने 3 करोड़ की लागत से रावन सिंघी एनीकट बनाने के लिए कार्य योजना बनाई गई है।
– हम प्रयास करेंगे कि इस दिशा में ठोस काम हों।
एंकर
– माननीय मुख्यमंत्री जी, अब सुनते हैं-जिला बस्तर के माखन लाल सोनी के विचार………..
(प्रदेश के 66 प्रतिशत में अनुसूचित क्षेत्र है, जिसमें संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन हो रहा है। मैं जानना चाहता हूं इस स्थिति में विकास कैसे संभव है। पेसा कानून, वनाधिकार, भू संपदा, धारा 165, 170 पर कोई कार्यवाही पालन नहीं हो पा रहा है। इस पर आपकी सरकार क्या कदम उठाएगी।)
माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब
– माखनलाल जी, आपकी चिंता जायज है, लेकिन अब वक्त बदल गया है। अब पहले वाली बात नहीं रही।
– हमारी सरकार को अभी एक साल पूरा नहीं हुआ है लेकिन मुझे यह कहते हुए संतोष है कि हमने आदिवासी समाज के जीवन और उनके संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा हेतु अनेक बड़े फैसले लिए हैं।
– सरकार की बागडोर सम्हालते ही, हमारा सबसे पहला फैसला लोहण्डीगुड़ा में आदिवासियों की जमीन वापस करने का था।
– भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 165, 170 के संदर्भ में स्पष्ट रूप से जान लीजिए कि समस्त अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी से गैर आदिवासी भूमि क्रय की अनुमति नहीं दी जा रही है।
– पूर्व में इस प्रकार के जो अंतरण हुए हैं, उनमें भी न्याय दिलाने की पहल की गई है और आदिवासी भूमिस्वामी को पुनः अधिकार दिए गए हैं।
– अधिसूचित क्षेत्र के आदिवासी समाज के सांस्कृतिक, आर्थिक एवं सामाजिक अधिकारों का पूर्णतः संरक्षण किया जा रहा है।
– पेसा कानून के अंतर्गत ग्राम सभा की महती भूमिका है। सभी शासकीय कार्यों में ग्रामसभा की अनुमति के बाद ही सभी शासकीय, अशासकीय भू-अर्जनों की कार्यवाही की जा रही है।
– विभिन्न शासकीय योजनाओं में सामाजिक अंकेक्षण के माध्यम से ब्यौरा ग्रामसभा में रखा जाता है।
– जहां तक सामुदायिक वन अधिकारांे का विषय है तो यह हमारी प्राथमिकता है। कोण्डागांव जिले के 9 गांवों में 9 हजार 220 एकड़ जमीन के पट्टे दिए गए हैं, वहीं धमतरी जिले के नगरी विकासखण्ड के जबर्रा गांव में लगभग साढ़े 12 हजार एकड़ भूमि सामुदायिक वन अधिकार के तहत पट्टा दी गई है।
– वन अधिकार कानून के क्रियान्वयन में एक ओर जहां सामुदायिक वन अधिकारों की घोर उपेक्षा की गई थी। वहीं दूसरी ओर व्यक्तिगत दावों को भी बड़ी संख्या में निरस्त किया गया था। हमने ऐसे प्रकरणों पर पुनर्विचार का बड़ा निर्णय लिया है।
– दूर-दूर फैले गांवों का नए सिरे से परिसीमन कराकर उन्हें पंचायतों का दर्जा दिया गया है।
– पंचायत प्रतिनिधियों के निर्वाचन हेतु 5वीं और 8वीं परीक्षा उत्तीर्ण होने की अनिवार्यता हमने समाप्त कर दी है।
– राज्य में पेसा क्षेत्रों के लिए नियम बनाने के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है।
– जाति प्रमाण-पत्र बनाने की प्रक्रिया सरल की गई है। अब पिता की जाति के आधार पर नवजात को जाति प्रमाण-पत्र दे रहे हैं।
– जिन निर्दोष लोगों को झूठे मामलों, मुकदमों में फसाया गया था। उन्हें न्याय दिलाने के लिए जस्टिस पटनायक आयोग काम कर रहा है।
– सारकेगुड़ा में न्यायिक जांच आयोग का प्रतिवेदन भी प्राप्त हो गया है, मैं आश्वस्त करता हूं कि दोषियों के विरूद्ध कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
– बस्तर, सरगुजा आदिवासी विकास प्राधिकरण में पहले मुख्यमंत्री अध्यक्ष होते थे। हमने विधायकों तथा अन्य स्थानीय लोगों को प्राधिकरणों में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी।
– हम महात्मा गांधी, पंडित नेहरू, बाबा साहेब अम्बेडकर, सरदार वल्लभ भाई पटेल, लाल बहादुर शास्त्री, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, मौलाना अबुल कलाम आजाद, श्रीमती इंदिरा गांधी, राजीव गांधी जैसे महान नेताओं के पद चिन्हों पर चलते हैं, जिन्होंने आदिवासी समाज को सबसे पहले और सबसे तेजी से विकास की सुविधाएं देने की पहल की थी। उनकी संस्कृति और परम्पराओं को बचाए रखते हुए सर्वांगीण विकास पर बल दिया था।

एंकर
– माननीय मुख्यमंत्री जी ‘‘राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव’’ के आयोजन का संदेश प्रदेश के कोने-कोने तक पहुंच गया है। हम दो प्रतिनिधि विचार इस कार्यक्रम में शामिल कर रहे हैं जिसमें से एक सुदूर अबुझमाड़ से है तो दूसरा सुदूर कोरिया जिले से है।
– लीजिए सुनते हैं सवाल, मूल प्रश्नकर्ता की आवाज में ।
(पप्पू राम पोटाई, ग्राम कंदाई, अबुझमाड़ जिला नारायणपुर आदिवासी महोत्सव में अबुझमाड़ की ओर से हम भाग लिये थे। यह महोत्सव बहुत ही अच्छा लगा था। मुख्यमंत्री जी ने इसमें लोक कला परिषद का गठन किया है इसमें आदिवासी लोगों को क्या फायदा मिलेगा पूछना था।)
(सतीश उपाध्याय, मनेन्द्रगढ, जिला कोरिया सबसे पहले मैं आपको आदिवासी अस्मिता और संस्कृति के विकास, छत्तीसगढ़ के विकास उसके वास्तविक स्वरूप में लाने के लिये साधुवाद देता चाहता हूं। माननीय मुख्यमंत्री जी आदिवासी विकास में शासन की योजना ‘‘नरवा, गरवा, घुरवा और बारी’’- मील का पत्थर, साबित हो रही है। आदिवासी वर्ग का विकास तभी हो सकता है जब उनकी सभ्यता और संस्कृति की रक्षा की जाये। राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव से आपने छत्तीसगढ़ की संस्कृति को वैश्विक पहचान देने का कार्य किया है मैं समझता हूं इस महोत्सव के माध्यम से छत्तीसगढ़ के समृ़़द्ध और गौरवशाली इतिहास को उसके कई सुनहरे पन्ने खुलने जा रहे हैं जैसे गांधी जी का ग्राम स्वराज वापिस लौट रहा है और छत्तीसगढ़ की जो आदिवासी लोक संपदा छटपटा रही थी उसको जीवन देने का कार्य प्रदेश में हुआ है, मैं आपके पूरे छत्तीसगढ़ की करोड़ों जनता की ओर से बधाई देना चाहता हूं।)
माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब
– पप्पू पोटाई जी, सतीश जी और ऐसे सवाल करने वाले तमाम साथियों को साधुवाद।
– मेरा मानना है कि संस्कृति और परम्पराएं हमारी मां के समान हैं, जो हमारा रास्ता तय कर देती हैं कि आगे की ओर कैसे जाना है।
– हमें अपने प्रदेश के साथ देश के सभी राज्यों के आदिवासी समाज पर गर्व है।
– आपके प्रकृति और संस्कृति से जुड़ाव पर मुझे गर्व है।
– धरती के संसाधनों को, हवा, पानी, पर्यावरण को बचाने के आपके सतत् योगदान पर मुझे गर्व है।
– हम चाहते हैं कि देश का सारा आदिवासी समाज अपने कलाकारों, कला मर्मज्ञों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की धरती पर इकट्ठा हो।
– राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव इसी दिशा में की गई पहल है।
– जिसके माध्यम से एक ओर हम आदिवासी समाज की लोक कलाओं से प्रदेश, देश और दुनिया को अवगत करायेंगे। साथ ही आपके समाज की आशाओं, आकांक्षाओं को और करीब से समझेंगे।
– हमारे प्रदेश के नृत्य दलों का गठन करने के लिए हमने ब्लॉक, जिला, संभाग स्तरीय प्रतियोगिताएं आयोजित की है।
– मुझे खुशी हैं कि इन प्रतियोगिताओं में हर स्तर पर आदिवासी समाज का बहुत उत्साह और जुड़ाव देखने को मिला है और सबसे विशेष बात युवाओं के उल्लास और जुड़ाव की है।
– मुझे विश्वास है कि जिस तरह ग्रामीण स्तर पर उत्साह का सैलाब उभरा, उसी तरह राष्ट्रीय आयोजन के दौरान भी युवाओं का कौशल और उल्लास 27, 28, 29 दिसम्बर को भी दिखाई पड़ेगा।
– मेरी शुभकामनाएं है कि आप लोग खूब अच्छा प्रदर्शन करें और लोगों का दिल जीतें।
– जहां तक ‘लोक कला परिषद’ का सवाल है, तो यह संस्था लोक कला व संस्कृति के उत्थान में अहम भूमिका अदा करेगी। यह लोक कलाकारों की अधिकार संपन्न सर्वोच्च संस्था होगी, जिसके पास अपना बजट होगा, अपनी समझ होगी, अपनी योजनाएं व कार्यक्रम होंगे। यह नौकरशाही से अलग सक्रिय कलाकारों और विशेषज्ञों द्वारा संचालित होगी। ये सरकारी नहीं बल्कि असरकारी तरीके से काम करने में सक्षम होगी।
एंकर
– माननीय मुख्यमंत्री जी, हमारे अनेक साथी यह जानना चाहते हैं कि आपकी सरकार ने जो नई औद्योगिक नीति लागू की है, उससे अभी तक सर्वाधिक उपेक्षित, सर्वाधिक पिछड़े रहे आदिवासी अंचलों और वहां रहने वाली ग्रामीण जनता को क्या लाभ मिलेगा।
माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब
– हमारी नई औद्योगिक नीति, ‘गढ़बो नवा छत्तीसगढ़’ की मूल भावना पर आधारित है।
– हमने नई उद्योग नीति के माध्यम से सीधे आगामी 5 सालों का लक्ष्य और कार्ययोजना सामने रख दिया है कि वर्ष 2024 का छत्तीसगढ़ कैसा होगा?
– नई नीति में हमने प्रदेश के सभी विकासखण्डों को चार श्रेणियों बांटा है।
– जो क्षेत्र या विकासखण्ड सबसे पिछड़े रह गये थे उन्हें हमने ‘द’ श्रेणी में रखा है और सबसे पिछड़े को सबसे अधिक लाभ/रियायतें/ संसाधन देने का फैसला किया है।
– जो नए उद्योग लगेंगे उनमें स्थानीय लोगों को अनिवार्यतः रोजगार देने का प्रावधान रखा गया है।
– जिसके तहत अकुशल श्रेणी में 100 प्रतिशत, कुशल श्रेणी में कम से कम 70 प्रतिशत और प्रशासकीय और प्रबंधकीय श्रेणी में कम से कम 40 प्रतिशत रोजगार स्थानीय लोगों को मिलेगा।
– खेती, उद्यानिकी, हस्तशिल्प आदि को हमारी नई नीति में उच्च प्राथमिकता श्रेणी में रखा गया है।
– खाद्य और वनोपज प्रसंस्करण की अधिकाधिक इकाइयां लगंे, इस पर हमारा जोर होगा।
– हमारा लक्ष्य है कि वर्ष 2024 तक अनुसूचित जनजाति व अनुसूचित जाति के कम से कम 300 उद्यमी उद्योग लगायें।
– ‘मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना’ के माध्यम से 3500 से अधिक नये उद्योग लगें जो इस योजना के नाम को सार्थक करें।
– मुझे विश्वास है कि इन प्रयासों से आदिवासी अंचलों के विकास में तेजी आएगी, साथ ही रोजगार के अवसर भी बहुत तेजी से बढ़ेंगे।
एंकर
– माननीय मुख्यमंत्री जी, जगदलपुर से महेश्वर नाग, नगरनार से रोहित नाग, ग्राम कस्तुरी जगदलपुर से रमेश कश्यप और गरियाबंद से गजेश्वर दीवान सहित बहुत से साथी यह जानना चाहते हैं कि एन.एम.डी.सी. के द्वारा ही नगरनार संयंत्र चलाया जाएगा या नहीं ? उनकी चिंता उनके शब्दों में ही सुन लीजिए और फिर आप अपने विचार रखिएगा।
(महेश्वर नाग, जगदलपुर- मैं एनएमडीसी स्टील प्लांट, नगरनार, जगदलपुर में कार्यरत हूं। इस स्टील प्लांट को केन्द्र सरकार द्वारा निजीकरण करने का फैसला लिया गया है, चूंकि आदिवासी क्षेत्र के पांचवीं अनुसूची में हम आने के कारण निजीकरण नहीं चाहते। कृृपया इस समस्या का समाधान करें।
(रोहित नाग, नगरनार, जगदलपुर- नगरनार मंे जो स्टील प्लांट है, उसे केन्द्र सरकार ने निजीकरण में डाल दिया और डीमर्जन कर रहा है। ये पांचवीं अनुसूची आदिवासी क्षेत्र है। हम आवाज उठा रहे हैं, निजीकरण नहीं होना चाहिए। कृपया समस्या निदान करें।)
(रमेश कश्यप, ग्राम कस्तुरी, जगदलपुर, जिला बस्तर-केन्द्र सरकार द्वारा नगरनार में स्टील फैक्ट्री को निजीकरण करने का फैसला लिया गया है, हम इसका विरोध करते हैं। यदि निजीकरण हुआ तो निजी लोगों के हाथों में जायेगा और यहां आदिवासी लोगों का शोषण होगा।)
माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब
– दोस्तों, एन.एम.डी.सी. और नगरनार को लेकर आपकी चिंता एकदम वाजिब और जायज है।
– मुझे खुशी है कि इस मंच के माध्यम से आप लोगों ने अपनी जमीन, अपनी हवा, अपने पानी और अपने संसाधनों को लेकर, अपनी आवाज मुखर की है।
– आपको पता ही है कि हमारे महान नेता पंडित जवाहर लाल नेहरू ने पंचवर्षीय योजनाओं, सार्वजनिक उपक्रमों के विकास के माध्यम से जनता के प्रति जिम्मेदारी निभाने वाले अनेक संस्थानों की सौगात दी थी।
– जिसमें भिलाई स्टील प्लांट भी है। एन.एम.डी.सी./एन.टी.पी.सी./एस.ई.सी.एल. जैसे तमाम उपक्रमों का स्थानीय जनता, स्थानीय विकास, प्रदेश और देश के विकास में अद्भुत योगदान रहा है।
– हमारे नेताओं ने तो बैंकों, बीमा कंपनियों, बिजली उपक्रम, आकाशवाणी, दूरदर्शन जैसी सारी संस्थाएं भी सार्वजनिक उपक्रम के रूप में विकसित की थी, जिसके कारण हम लोकतंत्र को मजबूत बनाने व वैश्विक मंदी से उबरने में सफल हो रहे हैं।
– सैद्धांतिक रूप से हम चाहते हैं कि नगरनार का प्लांट एन.एम.डी.सी. द्वारा ही संचालित हो।
– यदि कोई विपरीत फैसला ऊपर से आता है तो हम प्रदेश की जनता और आप लोगों के साथ खड़े होंगे।
– आपके हितों को संरक्षण देने की जिम्मेदारी हमने हमेशा निभाई थी, निभा रहे हैं और निभाते रहेंगे।
एंकर
– माननीय मुख्यमंत्री जी, आदिवासी अंचलों में रहने वाले ग्रामीण युवा सरकारी नौकरी पाने में बहुत सफल नहीं हो पाते, इसके लिए आपने क्या व्यवस्था की है।
माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब
– हमारी सरकार ने वन अंचलों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी युवाओं को प्राथमिकता से रोजगार देने के लिए अनेक बड़े कदम उठाए हैं।
– बस्तर, सरगुजा संभाग की तरह कोरबा जिले के ग्रामीण युवाओं का संकोच टूटे और वे आगे बढं़े, इसके लिए हमने जिला संवर्ग के तृतीय तथा चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों की पूर्ति स्थानीय लोगों से करने की समय-सीमा बढ़ा दी है।
– विशेष पिछड़ी जनजाति के युवाआंे को स्थानीय स्तर पर नौकरी देने के लिए नियमों को शिथिल किया गया है।
– बस्तर, सरगुजा तथा बिलासपुर संभाग के लिए कनिष्ठ कर्मचारी चयन बोर्ड का गठन का निर्णय लिया जा चुका है।
– प्री. मैट्रिक छात्रावास एवं आवासीय विद्यालयों सहित आश्रमों में रहने वाले बच्चों की शिष्यवृत्ति दर बढ़ाकर 1000 रू. प्रतिमाह की गई है।
– इस एक वर्ष में 16 नवीन एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय शुरू किए गए हैं, जिसमें 960 बच्चों को प्रवेश मिलेगा। इनके लिए 16 नए भवन भी स्वीकृत किए गए हैं।
– मैट्रिकोत्तर छात्रावास के विद्यार्थियों की ‘छात्र भोजन सहाय’ राशि 500 रू. प्रतिमाह से बढ़ाकर 700 रू. प्रतिमाह की गई है।
– हम आदिवासी अंचलों में अच्छी शिक्षा, सेहत और रोजगार के अवसरों का सेतु बना रहे हैं।
– आदिवासी अंचलों में 2 किलो आयोडीन युक्त नमक निःशुल्क तथा 5 रू. प्रति किलो की दर से प्रोटिनयुक्त चना दिया जा रहा है।
– रियायती दरों पर शक्कर तथा बस्तर संभाग में बीपीएल परिवारों को 2 किलो गुड़ निःशुल्क दिया जा रहा है।
– गैर अनुसूचित ग्रामीण क्षेत्रों में बीपीएल परिवारों को केरोसीन की पात्रता बहाल की गई है। इसके साथ ही हाट बाजार में चिकित्सा सुविधा दी गई है, ताकि जो लोग अस्पताल नहीं पहुंच पाते थे, उन्हें बाजार आने पर अस्पताल की सुविधा मिल सके।
– मुझे खुशी है कि ‘सुपोषित छत्तीसगढ़ अभियान’, ‘मेहरार चो मान’ जैसे कार्यक्रम लोक अभियान बनकर आदिवासी अंचलों में लोगों की जुबान पर चढ़ गए हैं।
– अब 1 दिसम्बर से धान खरीदी शुरू हो चुकी है।
– मैंने स्वयं 1 दिसम्बर को अनेक धान खरीदी केन्द्रों का जायजा लिया।
– आपको विदित है कि हमें केन्द्र के नियमों के तहत फिलहाल धान का दाम केन्द्र द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य के समान देना पड़ रहा है, लेकिन हमने पूरी व्यवस्था कर रखी है कि आपकी जेब में 2500 रू. प्रति क्विंटल की दर से पूरी राशि जाए।
– मैं चाहूंगा कि किसान भाई-बहन किसी भी तरह के बहकावे में न आएं और धीरज से अपना काम करें।
– आज के कार्यक्रम के समापन के पहले मैं याद करना चाहता हूं अमर शहीद वीर नारायण सिंह को जिनका बलिदान दिवस 10 दिसम्बर को है। हम उनके योगदान को याद करते हुए सादर नमन करते हैं।
– 18 दिसम्बर को गुरू बाबा घासीदास जी की जयंती है, जिन्होंने ‘मनखे-मनखे एक समान’ का संदेश देकर विश्व बंधुत्व की अलख जगाई थी। 25 दिसम्बर को क्रिसमस है। प्रभु यीशु का जन्म दिवस है। मैं गुरू बाबा घासीदास और प्रभु यीशु को सादर नमन करते हुए कामना करता हूं कि प्रदेश की खुशहाली के लिए अपना आशीर्वाद प्रदान करें।
एंकर
– मैं एक बार फिर यह बताना चाहता हूं कि लोकवाणी के लिए बहुत से सवाल मिले लेकिन समय-सीमा में सभी सवालों को लेना संभव नहीं था इसलिए कुछ प्रतिनिधि सवालों के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री जी के विचार जानने का प्रयास किया गया। हमें लगता है कि मुख्यमंत्री जी ने काफी विस्तार से अपनी बात कही है, जिससे लगभग हर सवाल का जवाब मिल गया है।
– अब लोकवाणी का आगामी प्रसारण 12 जनवरी, 2020 को होगा। विषय होगा ‘सेवा का एक साल’ इस विषय पर हमारे श्रोता अपने विचार 23, 24 एवं 25 दिसम्बर, 2019 के बीच रख सकेंगे। पहले की तरह ही आप फोन नम्बर 0771-2430501, 2430502, 2430503 पर अपरान्ह 3 से 4 बजे के बीच फोन करके अपने सवाल रिकार्ड करा सकते हैं।

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