जमशेदपुर : ट्रिपल मर्डर केस में सीवान के पूर्व सांसद शहाबुद्दीन को जमशेदपुर के एडीजे- 4 अजीत कुमार सिंह के कोर्ट ने सोमवार को बरी कर दिया. सुबह करीब नौ बजे नयी दिल्ली के तिहाड़ जेल से वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के जरिये शहाबुद्दीन की जमशेदपुर कोर्ट में पेशी हुई. शहाबुद्दीन एलइडी स्क्रीन पर करीब 15 मिनट तक ऑनलाइन उपस्थित रहे.  शहाबुद्दीन के अधिवक्ता केवल किशोर जी बराट बाबला ने कोर्ट के समक्ष अपनी दलील दी. इसके बाद कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में शहाबुद्दीन को बरी कर दिया गया. इस मामले में नौ लोगों की कोर्ट में गवाही करायी गयी थी.
2 फरवरी, 1989 को हुई थी प्रदीप मिश्रा, आनंद राव व जनार्दन चौबे की हत्या. 2 फरवरी, 1989 को कार पर सवार अपराधियाें ने जुगसलाई थाने के सामने अंबेसडर कार (डबल्यूएमए-5399 ) पर कारबाइन से अंधाधुंध फायरिंग कर कांग्रेसी नेता प्रदीप मिश्रा, आनंद राव व जनार्दन चौबे की हत्या कर दी थी. घटना के संबंध में पुलिस के पास दर्ज शिकायत के अनुसार प्रदीप मिश्रा दो फरवरी को अपनी मोटरसाइकिल से शाम करीब 5:30 बजे सोनारी-कदमा जाने के लिए निकले थे. उनके साथी सच्चिदानंद तिवारी भी साथ थे.
जब छह बजे बिष्टुपुर के बैंक ऑफ बड़ौदा के पास पहुंचे, तो उनकी बाइक खराब हो गयी. उसके बाद श्री मिश्रा ने एक व्यक्ति को 20 रुपये देकर पान लाने को कहा. इसी बीच आनंद राव अपनी कार से आये और प्रदीप मिश्रा को देख कर रुके. इस दौरान जर्नादन चौबे, लोको कॉलोनी के केटी राव भी कार पर सवार थे. आनंद राव के कहने पर प्रदीप मिश्रा भी कार पर बैठ गये. उसके बाद सभी करीम सिटी काॅलेज गये. कॉलेज बंद था.
उसके बाद वे सोनारी सीडी सिंह ठेकेदार के पास गये. जहां प्रदीप मिश्रा ने लकड़ी के बकाये बिल के बारे में जानकारी ली. उसके बाद कदमा बाजार के सरकार फर्नीचर के पास कुछ काम से गये. लेकिन दुकान बंद पाया गया. वहां से सभी एक साथ कार से जुगसलाई की ओर लौटने लगे. उसी दौरान करीब 7.30 बजे जुगसलाई के पावर हाउस गेट के पास बंपर पर गाड़ी धीरे होने के साथ ही पीछे से एक अन्य एंबेसडर कार पर सवार अपराधियों ने अंधाधुंध फायरिंग कर तेजी से फरार हो गये. उस वक्त आनंद राव कार चला रहे थे.
फायरिंग में आनंद राव, प्रदीप मिश्रा, जर्नादन चौबे की मौत हो गयी जबकि केटी राव को अंगुली में गोली लगी थी. इस कांड में गरमनाला गिरोह के साहेब सिंह उर्फ अरुण कुमार सिंह, वीरेंद्र सिंह उर्फ दाढ़ी बाबा, कल्लू सिंह, फौजी के अलावा सीवान के प्रतापपुर निवासी शहाबुद्दीन (पूर्व सांसद) व हाजीपुर के महनार निवासी रामा सिंह का नाम आया था.
इस हत्याकांड में शहाबुद्दीन, रामा सिंह समेत अन्य लोग आरोपित बनाये गये थे. लगभग एक दशक पहले शहाबुद्दीन को जमशेदपुर कोर्ट से जमानत मिल गयी थी और एक अन्य आरोपित रामा सिंह को जमशेदपुर कोर्ट ने 17 अप्रैल, 2006 को बरी कर दिया था.