पुलिस और नक्सलियों के बीच सांठगांठ की सीबीआई जांच हो: भूपेश बघेल

झीरम कांड से पहले सरकार ने नक्सलियों को करोड़ों रुपए भिजवाए थे : भूपेश

रायपुर: कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल ने एक सुचना का हवाला देते हुवे पत्रकारवार्ता लेकर आरोप लगाया है कि झीरम कांड से पहले सरकार ने किसी के जरिए नक्सलियों को करोड़ों रुपए भिजवाए थे, यह सूचना एक बार फिर साबित करती है कि राज्य में पुलिस और नक्सलियों के बीच गहरी सांठगांठ है। उन्होंने कहा है कि सरकार खुद तो इसकी जांच करवाएगी नहीं इसलिए इसकी जांच सीबीआई से करवानी चाहिए।
कांग्रेस भवन में आयोजित एक पत्रवार्ता में श्री बघेल ने कहा कि एसपी वीके चैबे की कथित मुठभेड में मौत, एलेक्स पॉल मेनन के अपहरण और रिहाई से लेकर झीरम कांड तक कई मामले हैं जिसमें लगता है कि राज्य के पुलिस अधिकारी भी नक्सलियों से मिले हुए हैं।
उन्होंने कहा कि जब आईएएस एलेक्स पॉल मेनन को नक्सलियों ने अगवा कर लिया था और एकाएक रिहा कर दिया था तब भी हमारे नेता महेंद्र कर्मा जी ने आरोप लगाया था कि नक्सलियों से पैसों का लेन देन हुआ था। कर्मा जी के आरोपों की भी कभी कोई जांच नहीं हुई और सरकार ने कुछ नहीं कहा। उन्होंने कहा कि अभी हमें एक सूचना और प्राप्त हुई है जिससे पता चला है कि झीरम कांड से ठीक पहले सरकार की ओर से किसी व्यक्ति के जरिए नक्सलियों को करोड़ों रुपयों की रकम पहुंचवाई गई थी।
भूपेश बघेल ने कहा कि दो दिन पहले वे जेल में अभय सिंह से मिलकर लौटे हैं। नक्सलियों से कथित लड़ाई में पुलिस का सहयोग देने वाले एक व्यक्ति अभय सिंह ने जब यह पोल खोली कि नक्सलियों और पुलिस के बीच गहरी सांठगांठ है तो पुलिस को यह नागवार गुजरा।
उन्होंने कहा, “हमें संदेह है कि पुलिस किसी भी तरह से अभय सिंह को जान से मार देना चाहती है और इसीलिए कई तरह के फर्जी मामले दर्ज करके उन्हें जेल में रखा हुआ है।”
श्री बघेल ने कहा कि जेल भेजने से पहले उन्हें कोई इंजेक्शन लगाया गया था और हमें संदेह है कि इस अज्ञात इंजेक्शन के बाद से ही उनकी तबियत भी खराब है। अभय सिंह घोषित रूप से पुलिस का सहयोगी या इंफॉर्मर रहा है और उनके योगदान की सरगुजा रेंज के तीन अलग-अलग आईजी ने प्रमाण पत्र देकर सराहना की है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि हाईकोर्ट के निर्देश पर पुलिस ने अभय सिंह से कई घंटों की पूछताछ की। इस पूछताछ की रिपोर्ट तो हाईकोर्ट में प्रस्तुत की गई लेकिन इस अनुरोध के साथ कि इस रिपोर्ट को सार्वजनिक न किया जाए क्योंकि अभय सिंह के पास ऐसी जानकारियां हैं जो अगर सार्वजनिक हो जाएं तो छत्तीसगढ़ में सुरक्षा व्यवस्था को खतरा पैदा हो जाएगा।
श्री बघेल ने कहा कि जाहिर है कि अभय सिंह के पास वो जानकारियां हैं जो पुलिस को बेनकाब कर सकती है। इसीलिए इसके बाद से उन्हें झूठे मामलों में फंसाने की कोशिश शुरु हई।
उन्होंने बताया कि इस बीच अभय सिंह से पुलिस के आला अफसर मिलने गए थे। अगर वह साधारण अपराधी है तो क्यों पुलिस के आला अफसर उनसे मिलने पहुंच रहे हैं? अफसर लगातार उनसे झीरमकांड की सीडी मांग रहे है। इसका मतलब यह है कि जिस तरह से एसपी वीके चैबे के मुठभेड़ की सीडी बनाई गई थी, उसी तरह से झीरम कांड की भी कोई सीडी बनी है, जो पुलिस की जानकारी में है।
श्री बघेल ने कहा, “हम चाहते हैं कि नक्सली – पुलिस सांठगांठ की पूरी जांच सरकार की ओर से अविलंब सीबीआई को सौंप दी जाए। चूंकि पूरे मामले में सरकार की भूमिका संदिग्ध है इसलिए वह तो इस मामले की जांच करवाने से रही।”
उन्होंने कहा कि सीबीआई ही पता लगा सकती है कि वह कौन व्यक्ति है जिसने सरकार के कहने से झीरम कांड से पहले नक्सलियों को करोड़ों रुपए पहुंचाए थे और सरकार में वह कौन है जो नक्सलियों को पैसे पहुंचवाता है?
उन्होंने अभय सिंह को पूरी सुरक्षा देने और उनके खिलाफ फर्जी मामले वापस लेने की भी मांग की।

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