बाबरी विध्वंस केस में आडवाणी, जोशी और उमा समेत 13 पर आज अहम् सुनवाई

आडवाणी

आडवाणीनई दिल्ली। बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले में बीजेपी नेता लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती समेत अन्य को साजिश रचने का आरोपी बनाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट बुधवार को फैसला सुनाएगा। कोर्ट में सीबीआई ने इन सभी पर साजिश का आरोप बहाल करने की अपील की है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे पर भी फैसला देगा कि क्या इन नेताओं के खिलाफ लंबित मामला रायबरेली से लखनऊ ट्रांसफर किया जा सकता है या नहीं।
हालांकि, सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया था कि दोनों ही ट्रायल साथ चलाए जा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई दो साल में पूरी किए जाने और रोज सुनवाई के भी संकेत दिए थे। अब बुधवार को सुप्रीम कोर्ट मामले में अपना फैसला सुनाएगा।

सीबीआई की दलील
सीबीआई की ओर से दलील दी गई है कि बीजेपी नेता लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी समेत अन्य 13 बीजेपी नेताओं के खिलाफ आपराधिक साजिश का केस चलना चाहिए। गौरतलब है कि तकनीकी आधार पर इनके खिलाफ साजिश का केस रद्द किया गया था जिसके बाद सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। लखनऊ में कार सेवकों के खिलाफ केस लंबित है जबकि रायबरेली में बीजेपी नेताओं के खिलाफ चल रहा है।

नेताओं ने जॉइंट ट्रायल का किया है विरोध
आडवाणी और जोशी की ओर से पेश वकील वेणुगोपाल ने जॉइंट ट्रायल का विरोध किया था साथ ही केस ट्रांसफर का भी विरोध किया था। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया था कि हम रायबरेली से केस लखनऊ ट्रांसफर करना चाहते हैं और इसके लिए हम अनुच्छेद-142 का इस्तेमाल कर सकते हैं। अदालत ने कहा था कि हम जस्टिस चाहते हैं।

सिब्बल की दलील
मामले में पक्षकार हाजी महमूद की ओर से पेश होते हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि आपराधिक साजिश का केस एक साथ चलना चाहिए और हाई कोर्ट ने तकनीकी आधार पर आरोप हटाए हैं केस को मेरिट पर कभी नहीं देखा गया।

क्या है मामला
1992 में बाबरी मस्जिद गिराने को लेकर दो मामले दर्ज किए गए थे। एक मामला (केस नंबर 197) कार सेवकों के खिलाफ था जबकि दूसरा मामला (केस नंबर 198) मंच पर मौजूद नेताओं के खिलाफ। केस नंबर 197 के लिए हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से इजाजत लेकर ट्रायल के लिए लखनऊ में दो स्पेशल कोर्ट बनाए गए जबकि 198 का मामला रायबरेली में चलाया गया। केस नंबर 197 की जांच सीबीआई को दी गई जबकि 198 की जांच यूपी सीआईडी ने की थी। केस नंबर 198 के तहत रायबरेली में चल रहे मामले में नेताओं पर धारा 120 B नहीं लगाई गई थी लेकिन बाद में आपराधिक साजिश की धारा जोड़ने की कोर्ट में अर्जी लगाई। कोर्ट ने इसकी इजाजत दे दी।
हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा गया कि रायबरेली केस को भी लखनऊ लाया जाए। हाई कोर्ट ने मना कर दिया और कहा कि यह केस ट्रांसफर नहीं हो सकता क्योंकि नियम के तहत 198 के लिए चीफ जस्टिस से मंजूरी नहीं ली गई। इसके बाद रायबरेली में चल रहे मामले में आडवाणी समेत अन्य नेताओं पर साजिश का आरोप हटा दिया गया। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 20 मई 2010 के आदेश में ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया।
इस फैसले को सीबीआई ने 2011 में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। चुनौती देने में आठ महीने की देरी की गई। अब मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *