आडवाणीनई दिल्ली। भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और कैबिनेट मंत्री उमा भारती की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इन तीनों नेताओं सहित भाजपा और विहिप के 14 नेताओं पर अयोध्या में ढांचा ढहाने की साजिश का मुकदमा चलाने का आदेश दिया। सीबीआइ की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने इन नेताओं को आरोपमुक्त करने का इलाहाबाद हाई कोर्ट का आदेश रद कर दिया।

कोर्ट ने नेताओं के खिलाफ रायबरेली की अदालत में चल रहा मुकदमा लखनऊ की अदालत में स्थानांतरित कर दिया है। सत्र अदालत को मुकदमे की रोजाना सुनवाई कर दो साल में फैसला सुनाने को कहा गया है। यह फैसला न्यायमूर्ति पीसी घोष और आरएफ नरीमन की पीठ ने सीबीआइ की याचिका पर सुनाया है। जांच एजेंसी ने ढांचा ढहने के मामले में तकनीकी आधार पर आरोपमुक्त हुए नेताओं पर आपराधिक साजिश का मुकदमा चलाने की मांग की थी। सीबीआइ ने हाई कोर्ट के 20 मई, 2010 के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें 21 नेताओं को आरोपमुक्त कर दिया गया था।

इनमें से आडवाणी और जोशी सहित आठ नेताओं पर रायबरेली की अदालत में मुकदमा चल रहा है। लेकिन, उसमें साजिश के आरोप नहीं हैं। आठ में से दो लोगों की मृत्यु हो चुकी है। बाकी के 13 लोग पूरी तरह छूट गए थे। इन 13 में चार की मृत्यु हो चुकी है। बचे लोगों में कल्याण सिंह प्रमुख हैं, जो ढांचा ढहने के समय प्रदेश के मुख्यमंत्री थे और इस समय राजस्थान के राज्यपाल हैं। लखनऊ की विशेष अदालत में एफआइआर नंबर 197-1992 (कारसेवकों का मुकदमा) चल रहा है जिसमें आपराधिक साजिश के आरोप हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि संविधान में राज्यपाल को मुकदमे से मिली छूट का लाभ कल्याण सिंह को भी मिलेगा। जब तक वे राज्यपाल के पद पर हैं, उन पर न तो आरोप तय होंगे और न ही मुकदमा चलेगा। कल्याण सिंह इस समय राजस्थान के राज्यपाल हैं। लेकिन, कोर्ट ने यह भी कहा है कि उनके पद से हटने के बाद उन पर आरोप निर्धारित होंगे और मुकदमा चलेगा।

25 वर्षो से हम आडवाणी और जोशी के मौलिक अधिकारों की दुहाई की बात सुन रहे हैं। आसमान गिरे तो गिरे, न्याय होना चाहिए। 25 साल पहले हुए अपराध ने संविधान के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को हिलाकर रख दिया था। इलाहाबाद हाई कोर्ट को जो फैसला बहुत पहले करना चाहिए था वह अब हो रहा है। – सुप्रीम कोर्ट