हाट-बाजारों में 10 लाख से अधिक लोगों का इलाज

मलेरिया, एचआईव्ही, मधुमेह, एनिमिया, टीबी, कुष्ठ, उच्च रक्तचाप और नेत्र विकारों की जांच के साथ ही शिशुओं व गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण

प्रदेश के 1851 हाट-बाजारों में ग्रामीणों की निःशुल्क जांच, उपचार व दवाईयां

रायपुर। छत्तीसगढ़ के वनांचलों और ग्रामीण इलाकों के हाट-बाजारों में स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीमों द्वारा दस लाख तीन हजार 678 लोगों को इलाज मुहैया कराया गया है। हाट-बाजारों की क्लिनिक में पहुंचे नौ लाख पांच हजार 473 मरीजों को जांच व उपचार के बाद निःशुल्क दवाईयां दी गई हैं। मुख्यमंत्री हाट-बाजार क्लिनिक योजना के अंतर्गत प्रदेश के एक हजार 851 हाट-बाजारों में क्लिनिक लगाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा योजना शुरू होने के बाद से कुल 17 हजार 150 हाट-बाजार क्लिनिक आयोजित किए गए हैं।

हाट-बाजार क्लिनिक में जरूरतमंदों को निःशुल्क उपचार, चिकित्सीय परामर्श और दवाईयां उपलब्ध कराने के साथ ही मोबाइल मेडिकल यूनिट द्वारा मलेरिया, एचआईव्ही, मधुमेह, एनिमिया, टीबी, कुष्ठ रोग, उच्च रक्तचाप और नेत्र विकारों की जांच भी की जा रही है। इन क्लिनिकों में शिशुओं और गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण भी किया जा रहा है। अप्रैल-2019 से वनांचलों में और 2 अक्टूबर 2019 से ग्रामीण क्षेत्रों में शुरू मुख्यमंत्री हाट-बाजार क्लिनिक योजना के अंतर्गत अब तक 90 हजार 464 लोगों की मलेरिया जांच की गई है। पॉजिटिव पाए गए तीन हजार 821 मरीजों का उपचार भी इन क्लिनिकों में किया गया है।

योजना के अंतर्गत चार लाख 25 हजार 011 लोगों के उच्च रक्तचाप, दो लाख 99 हजार 011 लोगों की मधुमेह, 84 हजार 201 लोगों की रक्त-अल्पता (एनिमिया) और 23 हजार 584 लोगों के नेत्र विकारों की जांच की गई है। हाट-बाजार क्लिनिकों में तीन हजार 619 लोगों की टीबी (क्षय रोग), दो हजार 869 लोगों की कुष्ठ और तीन हजार 016 लोगों की एचआईव्ही जांच भी की गई है। इस दौरान 21 हजार 176 गर्भवती महिलाओं की जांच और तीन हजार 720 शिशुओं को टीके लगाए गए हैं। हाट-बाजार क्लिनिकों में 16 हजार 357 डायरिया पीड़ितों का भी उपचार किया गया है।

मुख्यमंत्री हाट-बाजार क्लिनिक योजना इस साल 10 फरवरी तक प्रदेश के एक हजार 851 हाट-बाजारों में शुरू की जा चुकी है। राज्य शासन द्वारा लगातार इसका विस्तार किया जा रहा है। इन क्लिनिकों के माध्यम से अब तक धमतरी जिले में चार लाख 14 हजार 908, बालोद में एक लाख 984, राजनांदगांव में 78 हजार 579, गरियाबंद में 38 हजार 894, बिलासपुर में 36 हजार 841, दंतेवाड़ा में 30 हजार 753, जशपुर में 27 हजार 795, कांकेर में 23 हजार 597, महासमुंद में 22 हजार 818, रायगढ़ में 22 हजार 571, बलरामपुर-रामानुजगंज में 20 हजार 559, कोरिया में 20 हजार 412, दुर्ग में 19 हजार 311 और कोंडागांव में 17 हजार 658 लोगों का इलाज किया गया है।

मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से कबीरधाम जिले में 17 हजार 577, सरगुजा में 15 हजार 768, बीजापुर में 15 हजार 105, सूरजपुर में 14 हजार 589, बस्तर में 12 हजार 706, कोरबा में 12 हजार 554, सुकमा में 11 हजार 522, बेमेतरा में दस हजार 069, रायपुर में पांच हजार 697, मुंगेली में चार हजार 415, जांजगीर-चांपा में चार हजार 266, बलौदाबाजार-भाटापारा में दो हजार 814 तथा नारायणपुर जिले में 916 लोगों को निःशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

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