माँ नर्मदा की कृपा से लगातार मिल रहा है कृषि कर्मण अवार्ड : मुख्यमंत्री चौहान

भोपाल : मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश में कृषि क्षेत्र की प्रगति का श्रेय नर्मदा से मिलने वाली सिंचाई और विद्युत आपूर्ति को दिया है। श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश कृषि के क्षेत्र में लगातार उन्नति कर रहा है। देश के कई राज्यों को पीछे छोड़ते हुए निरन्तर कृषि कर्मण अवार्ड अर्जित करने में हम सफल हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि डिण्डौरी जिले से ही मुझे नर्मदा सेवा-यात्रा का विचार आया। उन्होंने बताया कि मालपुर पुल के शिलान्यास के समय नदी की टूटती धार से उपजी चिंता के परिणाम स्वरूप माँ नर्मदा के संरक्षण और संवर्धन के लिए यह अभियान आरम्भ हुआ। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज डिण्डोरी जिले के कनेरी ग्राम में ‘नमामि देवि नर्मदे’-सेवा यात्रा के जन-संवाद को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि माँ नर्मदा के जल का स्त्रोत ग्लेशियर नहीं अपितु वृक्षों से मिलने वाला जल है। इसी के मद्देनजर 2 जुलाई को अमरकंटक से अलीराजपुर तक एक साथ 6 करोड़ पेड़ लगाकर नर्मदा माँ के जीवन स्त्रोत को संवर्धित किया जायेगा। फलदार वृक्षों के साथ-साथ पानी रोकने वाले पेड़ जैसे पीपल, नीम, महुआ आदि भी लगाये जायेंगे।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि तेन्दूपत्ता तोड़ने वालों की सुविधा की दृष्टि से पहनने के लिए जूते और पानी की कुप्पी दी जायेगी। उन्होंने कहा कि वनोंपज का सही मूल्य मिले यह सुनिश्चित करने के लिए महुआ फूल और महुआ की गुल्ली का मूल्य 30 रू. प्रति किलो तथा अचार गुठली का मूल्य 100 रू. प्रति किलो निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने जन-संवाद में उपस्थित लोगों को माँ नर्मदा के संरक्षण, संवर्धन, वृक्षारोपण, स्वच्छता, प्रदूषण की रोकथाम, जैविक खेती को प्रोत्‍साहित करने, नशामुक्ति तथा निर्मलता बनाये रखने के लिए निरन्तर प्रयासरत रहने की शपथ दिलाई।

जन-संवाद में केन्द्रीय जल-संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती ने कहा कि लंबित सिंचाई परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण करने से प्रदेश के सिंचाई क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। यह वृद्धि ही प्रदेश की विकास दर में लम्बी छलांग का आधार है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री चौहान की यह पहल देश के लिए रोल मॉडल है। इस पहल का अनुसरण करते हुए केन्द्र सरकार ने देश की लंबित 99 सिचांई परियोजनाओं को चिन्हित कर उन्हें समय-सीमा में पूर्ण करने का अभियान आरम्भ किया है। इससे देश को एक करोड़ हेक्टेयर सिचिंत भूमि उपलब्ध होगी।

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