शिवराज की नर्मदा सेवा यात्रा बनी नदी संरक्षण की मिशाल

कृष्णमोहन झा

(लेखक राजनीतिक विश्लेषक और आईएफडब्ल्यूजे के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं)

शिवराज11 दिसंबर 2016 से 15 मई 2017 तक लगभग पांच माह निरंतर उपलब्धियों से भरी नर्मदा सेवा यात्रा के जरिए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नदियों के प्रति जो प्रेम दिखाया है उसी का परिणाम है कि प्रदेश सहित राष्ट्रीय स्तर पर इस यात्रा ने जो अलख जगाई है वह बेमिसाल है। अब इस यात्रा का समापन 15 मई, 2017 को मॉ नर्मदा नदी के उदगम स्थल अमरकंटक में ही होने जा रहा है इस कार्यक्रम को यादगार बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी आमंत्रित किया गया है।

आज विश्व के इतिहास में पहली बार नदी संरक्षण के लिए ठोस कार्रवाई जाएगी। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदर दास मोदी, नर्मदा पुत्र प्रदेश के लोकप्रिय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के अथक प्रयास से तैयार नर्मदा सेवा कार्ययोजना को जारी करेंगे। इतना ही नहीं इस अवसर पर नर्मदा नदी में न्यूनतम जल के प्रवाह के लिए कानूनी प्रावधान किया जाएगा। नर्मदा नदी के तटों पर नैसर्गिंक प्रजातियों के पौधों का रोपण करने, जल के उपयोग की दक्षता पर काम करने, रासायनिक खाद के उपयोग को कम करने, वैज्ञानिक आधार पर उत्खनन नीति बनाने और नदी जल संरक्षण का सकल्प भी उपस्थितों को प्रधानमंत्री दिलवाने वाले है। 11 दिसंबर 2016 से अमरकंटक से प्रारंभ इस यात्रा का समापन इतिहास बन जाएगा यह कभी किसी ने सोचा भी नहीं था। लगभग 150 दिनों तक चली इस यात्रा को एतिहासिक बनाने जनअभियान परिषद के उपाध्यक्ष प्रदीप पाण्डे, राघवेन्द्र गौतम आक्र उनकी टीम के साथ ही भाजपा के प्रदेश महामंत्री विष्णुदत्त शर्मा और इस पूरे अभियान के संयोजक मध्यप्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री गौरीशंकर शेजवार की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की पहल पर जीवनदायिनी मां नर्मदा के संरक्षण एवं संवर्धन के लिये निकाली जा गई मामि देवि नर्मदे सेवा यात्रा को जनता के साथ ही देश के विभिन्न धर्मों के गुरूओं, संत-महात्माओं, खिलाडिय़ों, समाजसेवियों, फिल्म कलाकारों, जल-विशेषज्ञों आदि प्रबुद्धजनों का भी समर्थन मिला है। अभी तक देश-विदेश के समाज के विभिन्न क्षेत्रों के 570 से भी ज्यादा विशिष्ट हस्ताक्षर ने शामिल होकर यात्रा को अपना समर्थन दिया। इनमें साधु-संत, संस्कृति, कला और फिल्म और जल-पर्यावरण संरक्षण और समाज सेवा से जुड़े प्रख्यात लोग शामिल हैं। साधु-संतों में जूनापीठाधीश्वर आचार्य मण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी जी महाराज, स्वामी चिदानंद सरस्वती जी महाराज, संत सुखदेव नंद, संत विवेक, साध्वी प्रज्ञा भारती, स्वामी श्री कल्याण अमरकंटक,  हरिहरानंद सरस्वती जी, अमरकंटक, पंडित देवप्रभाकर शास्त्री (दद्दाजी), भानपुरापीठ के शंकराचार्य श्री दिव्यानंद तीर्थ, स्वामी श्री रामभूषण दास, स्वामी श्री गिरीशानंद महाराज, श्री रविशंकर महाराज (रावतपुरा सरकार), श्री देवकीनंदन ठाकुर जी, स्वामी प्रज्ञानंद, श्री श्री 1008 रामदास जी महाराज (ददरौआ सरकार), श्री कृष्णध्यानानंद जी, स्वामी एश्वर्यानंद सरस्वती जी, स्वामी निर्विकारानंद जी, पद्मभूषण स्वामी तेजोमयानंद जी, साध्वी ऋतंभरा जी, स्वामी बाबा रामदेवजी, आचार्य लोकेश मुनि, आचार्य पुण्डरीक गोस्वामी जी महाराज, स्वामी शिवानंद सरस्वती जी, हृदय गिरीजी महाराज, मोनीबाबा, राष्ट्रसंत भय्यूजी महाराज, पं. कमलकिशोर नागर जी, पं. सुभाष भार्गव जी, स्वामी विज्ञानानंदजी, राजयोगिनी ब्रह्मकुमारी डॉ. रीना दीदी माउण्ट आबू राजस्थान, राजयोगिनी ब्रह्मकुमारी भावना दीदी माउण्ट आबू राजस्थान, श्री सुधांशु महाराज  शामिल है। राजनेताओं में गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी, उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह, केन्द्रीय जल-संसाधन मंत्री उमा भारती, केन्द्रीय पंचायत राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, केन्द्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री श्री थॉवरचंद गहलोत, केन्द्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते, केन्द्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री पीयूष गोयल, केन्द्रीय वन तथा जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री अनिल माधव दवे, केन्द्रीय राज्य मंत्री रामकृपाल यादव, केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, सांसद प्रभात झा की अभियान में सार्थक भागीदारी की। फिल्म जगत से अभिनेता गोविन्दा, अभिनेत्री पदमिनी कोल्हापुरे और मीता वशिष्ठ, अनुपम खेर, विवेक ओबेराय, आशुतोष राणा, गोविन्द नामदेव, मुकेश तिवारी, श्री राजा बुन्देला, अन्नू कपूर, रजा मुराद, रघुवीर यादव, मनीष तिवारी, भजन गायक अनूप जलोटा, श्री लखवीर सिंह लक्खा, पार्श्व गायक कैलाश खेर, सुरेश वाडकर, दुर्गा जसराज, गजल गायक तलत अजीज, गायिका पिनाज मसान ने भी नर्मदा सेवा यात्रा के लिए अपना समय दिया।

यात्रा में तकरीबन 200 लोग ऐसे हैं जो श्रद्धा, भक्ति और एक मिशन के साथ शुरू से साथ चलते रहे। अमरकंटक से शुरू हुई यात्रा अपनी पूर्णता के जिले अनूपपुर में ही संचालित है। अब तक 615 ग्राम पंचायत, 1093 गांव और 51 विकास खंड से गुजर चुकी है। मुख्य यात्रा में 1862 उप यात्राएँ शामिल हो चुकी हैं। लगभग 85 हजार लोगों ने नर्मदा सेवा की वेबसाइट पर पंजीयन करवाया है। अब तक 40 हजार पौधे सांकेतिक रूप से रोपे गये हैं। यात्रा दल के सदस्यों के भोजन और अन्य व्यवस्थाओं में 2032 सामाजिक एवं स्वयंसेवी संस्थाएं सहयोग कर रही हैं। तटीय ग्राम पंचायतों में 712 नर्मदा सेवा समितियों का गठन भी किया गया है।

विगत पांच माह पहले शुरू की गई नर्मदा सेवा यात्रा ने प्रदेश ही नहीं पूरे देश में जनआंदोलन का रूप लेकर लोकप्रिय हो गई। शिवराज सरकार अपने स्तर पर निरंतर प्रयासरत है जिसमें नर्मदा को जीवित इंसान का दर्जा देने के लिए विधानसभा में संकल्प पारित किया गया है। इसी के साथ नर्मदा नदी को सदानीरा रखने के लिये कानूनी प्रावधान की व्यवस्था की जा रही है। नर्मदा के उदगम स्थल अमरकंटक में सभी प्रकार के उत्खनन पर प्रतिबंध लगाया जायेगा। युकेलिप्टस के पेड़ों के स्थान पर बरगद, पीपल, साल, नीम जैसे पौधे लगाये जायेंगे। नर्मदा संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिये 1014 जन-संवाद में से 47 स्थानों पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की भी उपस्थिति रही है। जन-संवाद कार्यक्रमों में नर्मदा जल-धारा को अविरल बनाने के लिये पौध रोपण, तटों की साफ-सफाई, जल-धारा में विसर्जन न करने, नशा मुक्ति, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओं आदि की समझाईश दी गई।   मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है नर्मदा सेवा यात्रा अब एक सामाजिक आंदोलन बन चुकी है। नर्मदा सेवा जीवन का मिशन है। यह राजनैतिक कर्मकांड नहीं है। उन्होंने कहा कि नदियों, पर्यावरण और जल को बचाना सरकार और हर नागरिक का कर्त्तव्य है। इस काम में सरकार और समाज दोनों को साथ-साथ चलना होगा।

नर्मदा सेवा यात्रा को जिस तरह से सफलता मिली है उससे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी काफी उत्साहित है। उन्होंने यात्रा के दौरान लोगों से नर्मदा को प्रदूषण से बचाने के लिए कई अपेक्षाएं सामने रखी, जिससे लोगों ने भी सहर्ष स्वीकार कर लिया। मध्यप्रदेश की जीवन रेखा पुण्य सलिला नर्मदा के तट पर बसे छोटे से गांव जैत में जन्म लेकर मुख्यमंत्री की कुर्सी तक सफर तय करने वाले सेवाभावी राजनेता शिवराज सिंह चौहान ने गत 11 दिसंबर को जब अमरकंटक में नमामि देवी नर्मदा प्रार्थना के साथ नर्मदा सेवा यात्रा का श्ुाभारंभ किया था तब उन्होंने यह घोषणा की थी कि मध्यप्रदेश सरकार के इस आयोजन को व्यापक जन अभियान का रूप देने के आकांक्षी हैं जिसमें समाज के हर तबके के लोग अपना योगदान प्रदान करें। लगभग पांच माह तक अनवरत चली इस जन जागरण यात्रा का उद्देश्य नर्मदा नदी के पावन जल को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए जनता में जागरूकता पैदा करना रहा। इस यात्रा के पहले माह में ही प्रदेश की जनता ने इसमें अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए जो अटूट उत्साह प्रदर्शित किया है वह इस बात का प्रमाण है कि मुख्यमंत्री अपने उद्देश्य में पूरी तरह सफल हुए हैं। इस अभियान की सफलता के लिए समाज के हर तबके से मिले सहयोग से मुख्यमंत्री भाव विभोर हो उठे हैं। साथ ही मुख्यमंत्री के मन में यह कसक भी है कि प्रदेश की जीवन रेखा मानी जाने वाली पावन नर्मदा नदी के जल में गंदगी बहाकर उसे विगत वर्षों में इतना प्रदूषित कर दिया गया है कि आज उसे प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए जन जागरण अभियान प्रारंभ करने की अपरिहार्यता महसूस होने लगी थी। संकल्प सेवा समर्पण की त्रिवेणी मुख्यमंत्री चौहान अब यह प्रण कर चुके हैं कि जब तक नर्मदा जल को पूरी तरह प्रदूषण मुक्त नहीं बना दिया जाता तब तक वे चैन से नहीं बैठेंगे। नर्मदा सेवा यात्रा के दौरान उन्होंने अनेकों बार अपने उद्बोधन में यह स्वीकार करने में तनिक भी संकोच नहीं किया कि पुण्य सलिला नर्मदा के जल को प्रदूषण से बचाने के लिए यह अभियान वास्तव में बहुत पहले शुरू हो जाना चाहिए था परंतु अब अपनी इस जिम्मेदारी के निर्वहन में कहीं कोई कोताही नहीं बरती जाएगी। जनजन तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री स्वयं भी मीलों पैदल चले और लोगों को यह संदेश दिया कि नर्मदा के पावन जल में गंदगी बहाकर उसे प्रदूषित करने का अपराध अब हम न करें। नर्मदा मैईया के प्रति अगाध श्रद्धा रखने वाले मुख्यमंत्री चौहान को बड़ी संख्या में साधु संतों से भी इस पुनीत अभियान की सफलता के लिए आशीर्वाद मिला। गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने अमरकंटक मेें नर्मदा सेवा यात्रा के शुभारंभ के अवसर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी और इस पुनीत आयोजन से प्रभावित होकर उन्होंने यह घोषणा की थी कि वे अपने राज्य में भी इसी तरह का एक जन जागरण अभियान प्रारंभ करेंगे।

मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान का कहना है कि यह किसी से छुपा हुआ नहीं है कि नर्मदा नदी मध्यप्रदेश की जीवन-रेखा है। यह भारतीय उप महाद्वीप की पाँचवीं सबसे बड़ी नदी होने के साथ ही भारत की सात पवित्र नदियों में से एक है। नर्मदा सेवा यात्रा का उद्देश्य प्रदेश की इस सबसे बड़ी नदी के संरक्षण के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना है। आज मुझे प्रसन्नता है कि यह यात्रा एक बड़ा जन-आन्दोलन बन गई है। माँ नर्मदा और उसके परिस्थितिकीय तंत्र को संरक्षित और संवर्धित करने का संकल्प लेने के लिये लोग आगे आये। यात्रा ने पूरे विश्व में करोड़ों लोगों के दिल में जगह बनाई। माँ नर्मदा को बचाने के इस अभियान में जाति, रंग, वर्ग के भेदभाव के बिना समाज के सभी क्षेत्रों के लोग पूरे मनोयोग से शामिल हुए। लोगों ने नर्मदा नदी के दोनों तटों पर बड़ी संख्या में पौध-रोपण कर उनका संरक्षण करने, नर्मदा तटों को अतिक्रमण से मुक्त रखने, नर्मदा जल को प्रदूषण मुक्त रखने और नदी को साफ और स्वच्छ बनाने का संकल्प लिया है। आदि-काल से नर्मदा में अपने सगे-संबंधियों के शव बहा देने वाले लोग अब ऐसा नहीं करने का संकल्प ले रहे हैं। साथ ही, नदी के आस-पास खुले में शौच करने वाले लोग भी अब शौचालयों का प्रयोग कर रहे हैं। इस तरह नर्मदा के किनारों पर एक बड़ा बदलाव हो रहा है और पूरा विश्व इस बदलाव को महसूस कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि 2700 किलोमीटर लम्बे नर्मदा तट पर अधिक से अधिक फलदार पौधे रोपित करने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सरकार उन्हें आर्थिक सहयोग भी प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री का मानना है कि मध्यप्रदेश में नर्मदा तट पर वैज्ञानिक विधि से पौधारोपण का यह अभियान दूसरे राज्यों के लिए आदर्श बन जाएगा। गौरतलब है कि नर्मदा नदी के दोनों तटों पर एक एक किलोमीटर क्षेत्र में फलदार पौधों के रोपण के लिए सरकार ने 668 करोड़ की राशि आवंटित करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री के मन में इस बात को लेकर गहरी पीड़ा है कि मध्यप्रदेश की जीवनदायिनी मानी जाने वाली पुण्य सलिला नर्मदा के जल को विगत वर्षों में इतना प्रदूषित कर दिया गया है कि अब इसे प्रदूषण मुक्त बनाने का काम समाज के सभी वर्गों के सहयोग के बिना संभव नहीं हो सकता इसलिए उन्होंने नर्मदा नदी के संरक्षण हेतु लोगों में जागरूकता फैलाने के नर्मदा सेवा यात्रा की पहल की और उन्हें इस बात की प्रसन्नता है कि उनकी अपेक्षा के अनुसार समाज के हर वर्ग के लोग बड़ी संख्या में इससे जुड़े गए।

चूंकि नर्मदा जल को पूर्णत: प्रदूषण मुक्त बनाना ही इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य है इसलिए सरकार इस काम में धन की कमी को आड़े नहीं आने देगी। सरकार ने 1403 करोड़ की लागत से 18 शहरों में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने का फैसला किया है। सरकार ने नर्मदा नदी के किनारे स्थित क्षेत्रों के अधिकारियों एवं संबंधित निकायों को निर्देश दिए हैं कि इस कार्य में दु्रतगति लाने के लिए वे जल्दी से जल्दी प्रोजेक्ट तैयार कर सरकार को भेजे। ताकि नर्मदा जल को प्रदूषण मुक्त बनाने की योजना को शीघ्राति शीघ्र मूर्तरूप दिया जा सके।

मुख्यमंत्री चौहान का मानना है कि पुण्य सलिला नर्मदा का ही आशीर्वाद है कि मप्र को देश में कृषि के क्षेत्र में नंबर एक होने का गौरव हासिल हुआ है जिसके कारण लगातार पांच बार इस प्रदेश को केन्द्र में कृषि कर्मण अवार्ड से नवाजा है। विभिन्न क्षेत्रों में इसके तट का सौंदर्य बरबस ही लोगों को आकर्षित कर लेता है। इसलिए सरकार ने नर्मदा के दोनों तटों के समानांतर 8-8 मीटर चौड़े पाथवे का निर्माण करने का निर्णय लिया है। चूंकि प्रस्तावित पाथवे ग्रीन बेल्ट के बीच से गुजरेगा इसलिए मां नर्मदा की परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। मुख्यमंत्री ने नर्मदा नदी के तट पर बने पर्यटन स्थलों एवं धार्मिक स्थलों में सुविधाओं के विकास तथा नर्मदा के उदगम स्थल अमरकंटक को देश का सबसे सुन्दर तीर्थ बनाने का लक्ष्य रखा है और इस अभियान की सफलता के लिए उनके समर्पण भाव को देखकर कोई भी विश्वास पूर्वक कह सकता है। प्रदेश में पांच माह तक चली नर्मदा सेवा यात्रा ने जनमानस पर जो छाप छोड़ी है उससे यह अंदाजा लगाना कठिन नहीं होगा कि नदियों का मानव जीवन के लिए कितना महत्व है और ऐसे अभियान से नदियों को बचाकर हम जल संरक्षण के साथ ही भविष्य की पीढ़ी को बहुत कुछ दे सकते है। यह समझा है प्रदेश सरकार और मुखिया शिवराज सिंह चौहान ने क्योंकि उन्होंने जो कदम उठाया है उसकी पूरे देश में प्रशांसा हो रही है। अब तो सिर्फ यही उम्मीद की जा सकती है कि ऐसे अभियान की सफलता भी तभी सार्थक है जब सरकार और जनता एक साथ मिलकर नदियों को प्रदूषण से बचाने का बीड़ा उठा लें ।

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