बापू को चतुर बनिया कहने पर अमित शाह के खिलाफ राजनैतिक विवाद शुरु

रायपुर: भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जाति के संदर्भ में उनके लिए ‘बहुत चतुर बनिया’ शब्द का उल्लेख कर राजनैतिक विवाद को जन्म दे दिया. कांग्रेस और अन्य दलों ने राष्ट्रपिता का अपमान करने के लिए शाह को माफी मांगने को कहा.

शाह ने रायपुर में शुक्रवार को प्रबुद्ध नागरिकों के एक समूह को संबोधित करते हुए, महात्मा गांधी का जिस बनिया जाति में जन्म हुआ था उसका उल्लेख किया था. उन्होंने कहा था, ‘महात्मा गांधी दूरदर्शी होने के साथ ही बहुत ‘चतुर बनिया’ थे. उन्हें मालूम था कि आगे क्या होनेवाला है. उन्होंने आजादी के बाद तुरंत कहा था कि कांग्रेस को भंग कर दिया जाना चाहिए. यह काम महात्मा गांधी ने नहीं किया, लेकिन अब कुछ लोग कांग्रेस को भंग करने का काम कर रहे हैं.’ उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने ऐसा इसलिए कहा था क्योंकि कांगे्रस की स्थापना विचारधारा के आधार पर नहीं हुई थी. यह एक तरह से आजादी हासिल करने के लिए ‘विशेष उद्देश्य उपक्रम’ सरीखा था.

आलोचना का सामना करने के बाद भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अघ्यक्ष अमित शाह ने कहा कि सभी जानते हैं कि उन्होंने किस संदर्भ में यह बात कही है. यहां शनिवार को एक संवाददाता सम्मेलन में शाह से जब पूछा गया कि महात्मा गांधी को लेकर टिप्पणी के बाद अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने उनसे माफी मांगने के लिए कहा है. इस पर शाह ने कहा कि उन्होंने जिस संदर्भ में कहा है वह सब लोगों ने सुना है. सुरजेवाला जी को अभी गांधी जी के बहुत सारे सिद्धांतों का जवाब देना है. कांग्रेस ने महात्मा गांधी के बारे में अमित शाह की टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि राष्ट्रपिता का ‘अपमान’ किया गया है. उन्होंने भाजपा अध्यक्ष शाह एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी मांगने को कहा.

विपक्ष की तरफ से हमला बोलते हुए पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने पूछा, ‘‘जातिवाद से लड़ने के बजाय उन्होंने (भाजपा) राष्ट्रपिता की ही जाति बताना शुरू कर दिया. इससे सत्तारुढ़ दल और उसके अध्यक्ष का चरित्र और विचारधारा का पता चलता है. ऐसे लोग देश को कहां ले जायेंगे.’ उन्होंने मांग की अमित शाह, भाजपा एवं प्रधानमंत्री को नरेंद्र मोदी को देश, स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों तथा प्रत्येक नागरिक-राष्ट्रपिता से स्वतंत्रता आंदोलन का अपमान करने के लिए माफी मांगनी चाहिए.’

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बयान को दुर्भाग्यपूर्ण, गैरजरूरी और अनैतिक बताया. वहीं भाकपा महासचिव एस सुधाकर रेड्डी ने अपमानजनक टिप्पणी के लिए शाह से माफी मांगने को कहा. माकपा के पूर्व महासचिव प्रकाश करात ने कहा कि शाह ने महात्मा गांधी के बारे में भाजपा-आरएसएस के वास्तविक विचार का सिर्फ खुलासा किया है.

सुरजेवाला ने कहा, ‘अमित शाह स्वयं सत्ता के व्यापारी हैं और आज कह रहे हैं कि स्वतंत्रता आंदोलन एक बिजनेस माॅडल है. पर सच्चाई यह है कि अंग्रेजों ने आरएसएस एवं हिंदू महासभा का इस्तेमाल देश के विभाजन के लिए एक विशेष उपक्रम के रूप में किया था.’ भाकपा के राष्ट्रीय सचिव डी राजा ने कहा कि सत्तारुढ दल के प्रमुख होने के नाते शाह को महात्मा गांधी जैसे कद के नेता के बारे में टिप्पणी करते समय अपनी भाषा का ध्यान रखना चाहिए. राजा ने कहा, ‘जब वह कांग्रेस या अन्य विपक्षी दलों की (राजनीतिक परिचर्चा में) आलोचना करते हैं तो हमें कोई समस्या नहीं है. लेकिन महात्मा गांधी का नाम घसीटना, ऐसी भाषा का इस्तेमाल करना उनका अपमान है.’

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