नई दिल्ली। केआर नारायणन के बाद देश को दूसरा दलित राष्ट्रपति मिलने जा रहा है। भाजपा ने सबको चौंकाते हुए बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद को सर्वोच्च संवैधानिक पद के लिए राजग का उम्मीदवार बनाने का एलान किया है।

दो बार राज्यसभा सदस्य रहे कोविंद भाजपा के अनुसूचित जाति-जनजाति मोर्चा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। सोमवार को प्रधानमंत्री की मौजूदगी में संसदीय बोर्ड की बैठक के दौरान कोविंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने का फैसला किया गया। इसकी घोषणा खुद शाह ने की। कोविंद की योग्यता का हवाला देते हुए शाह यह बताने से नहीं चूके कि वह गरीब दलित परिवार से आते हैं।

राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने के बाद मोदी ने ट्विटर पर भी उन्हें बधाई दी। जवाब में कोविंद ने कहा कि धन्यवाद आपका जो आपने एक दलित चेहरे को सबसे ऊंचा पद सौंपा है। नरमपंथी दलित चेहरे को पेश कर भाजपा ने विपक्षी धड़े में दोफाड़ का बीज बो दिया है।

राजनीतिक विवशता के कारण विपक्षी दल तत्काल समर्थन की घोषणा से भले ही बच रहे हों, लेकिन कई दलों के लिए पीछे हटना मुश्किल होगा। उत्तर प्रदेश से आने वाले कोविंद का विरोध मायावती को कितना महंगा पड़ेगा यह किसी से नहीं छिपा है। सपा भी मात्र विपक्षी गोलबंदी के लिए प्रदेश से आनेवाले चेहरे का विरोध करने का जोखिम नहीं उठाएगी।

दूसरे राज्यों में भी ऐसी स्थिति बनेगी। यही कारण है कि कोविंद के नाम का एलान होते ही अन्नाद्रमुक , टीआरएस और बीजद ने उनके समर्थन की घोषणा कर दी। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी व्यक्तिगत रूप से इसका स्वागत किया है।