मोदी के जन्मदिन को बेरोजगार दिवस के रूप में मना के देश ने अपना आक्रोश जताया -कांग्रेस

देश के लोगो के घरों में चूल्हे जलने के हालात नही भाजपाई मोदी के जन्म से लेकर छट्ठी तक की दावत कर रहे

रायपुर /17 सितम्बर 2020/देश भर के युवाओं द्वारा स्वफूर्त रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन को बेरोजगार दिवस के रूप में मनाया गया ।प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि प्रधानमंत्री के जन्मदिन को “रास्ट्रीय बेरोजगार दिवस “के रूप में मना कर पूरे देश ने बेरोजगारी और बेकारी के खिलाफ अपनी एक जुटता को प्रदर्शित किया है।शोशल मीडिया मंचो ट्यूटर फेसबुक पर मोदी सरकार की बेरोजगारी के खिलाफ चले महा ट्रेंड ने यह बता दिया कि आज देश के लोगो मे रोजगार को ले कर वर्तमान केंद्र सरकार के प्रति कितना जादा आक्रोश है।युवा केंद्रीय सरकार के प्रतिष्ठानों में नौकरियो में रोक के विरोध और देश मे नए रोजगार के अवसरों की मांग कर रहे हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि मोदी और उनके भक्तों ने रोम जल रहा था नीरो वंशी बजा रहा था कि कहावत को चरितार्थ कर दिया ।एक तरफ देश में बेरोजगारी चरम पर है ।बेरोजगारी दर स्वतंत्र भारत के इतिहास में सबसे ज्यादा 44 प्रतिशत पर है । मोदी सरकार के द्वारा लिए गए आत्मघाती निर्णयों नोटबन्दी और जीएसटी ने उद्योग व्यापार की कमर तोड़ कर रख दिया ।फैक्ट्रियां व्यवसाय धंधे बन्द हो गए।लोगो की नौकरियां चले गयी है । रही सही कसर कोरोना की आपदा में पूरी हो गयी ।सारा देश रोजी रोटी और जीवन बचाने के झंझावत में लगा हुआ है ।ऐसे समय देश भर में भाजपाई मोदी के जन्मदिवस को जन्मसप्ताह के रूप में मना कर देश की जनता के जले पर नमक छिड़कने का काम कर रहे हैं। जिस देश मे 53 लाख लोग महामारी से पीड़ित हो 85 हजार की जान चली गयी हो उस देश का प्रधानमंत्री जश्न कैसे मना सकता है ?
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि जब देश को कोरोना से बचाव के लिए केंद्र सरकार के ठोस मदद की जरूरत है।लोगो के घरों में चूल्हे जलने के हालात नही है तब ऐसे समय सत्तारूढ़ दल के लोग प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन से शुरू कर उनकी छट्ठी तक के आयोजनों के दावतों में व्यस्त हैं ।भाजपाई मोदी के जन्म महोत्सव का आयोजन कर रहे मोदी अपने जन्ममहोत्सव के इन आयोजनों को देख कर गदगद हो रहे हैं।एक बार भी कोरोना काल का हवाला दे कर उन्होंने भाजपाइयों से इस महोत्सव के ढोंग को रोकने की अपील करने की जरूरत नही समझी।

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