वैसे तो रत्नों में गिने-चुने नौ रत्न ही ऐसे हैं, जिन्हें आम लोग जानते हैं, जबकि इन रत्नों के अलावा बहुत से ऐसे रत्न हैं जिनकी बहुत कम लोगों को जानकारी होती है। ऐसा ही एक रत्न है हकीक, जो धरती पर मिलने वाले अनेक कीमती रत्नों और पत्थरों में से एक हैं। यह गोदावरी नदी व नर्मदा नदी के बिल्कुल नीचे के तल में पाया जाता हैं।

ज्योतिष शास्त्र में हकीक का बड़ा महत्व है, हकीक के रत्न एवं उन रत्नों से बनी हुई माला को ज्योतिष के लिहाज से बेहद फायदेमंद माना गया है। यह जीवन के बड़े से बड़े दुखों के पहाड़ को तोड़ सकने में सक्षम है, ऐसा दावा किया जाता है।

हकीक के रंग :  ये पत्थर विभिन्न रंगों में पाया जाता है  लेकिन भारत में काला, सफेद, पीला, लाल, हरा एवं नीले रंग का पत्थर ही पाया जाता है। हकीक के रंगीन पत्थर बहुत ही लाभकारी एवं उपयोगी होते हैं. इनका प्रयोग कई प्रकार की समस्याओं से निदान पाने के लिए भी किया जाता हैं.

1. काले रंग के हकीक का प्रयोग करने से शरीर को रोगों व कष्टों से मुक्ति मिलती हैं.

2. सफेद रंग के हकीक का प्रयोग करने से मानसिक तनाव दूर हो जाता हैं.

3. नीले रंग के हकीक का इस्तेमाल शनि देवता को प्रसन्न करने के लिए तथा पूजा या साधना में मन्त्रों का जप करने के लिए किया जाता हैं.

हकीक के प्रयोग : हकीक का प्रयोग अधिकतर माला एवं पत्थर के रूप में किया जाता हैं. हकीक को हक्क दिलाने वाला पत्थर भी माना जाता हैं.

विशेषताएं:

1. हकीक विष अर्थात जहर के प्रभाव को भी नष्ट कर देता हैं। इसलिए प्राचीन समय के कुछ राजा–महाराजा हकीक से बने प्यालों का प्रयोग रस पान करने के लिए करते थे।

2. हकीक का पत्थर मनुष्य की रक्षा करने के लिए भी महत्वपूर्ण होता हैं।

3. हकीक के पत्थर का प्रयोग करने से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं तथा आने वाले संकटों से भी मुक्ति मिल जाती हैं।

4. प्रेत आदि बुरी शक्तियों को दूर करने के लिए तथा नजर बाधा को दूर करने के लिए बेहद उपयोगी होता हैं।