लखनऊ। यूपी में अखिलेश सरकार के राज में अपनो का कितना ख्याल रखा गया था इसका उदाहरण अब सामने आया है। खबरों के अनुसार अखिलेश से सीएम रहते अपर्णा यादव के एनजीओ को जमकर पैसा दिया गया था। अखिलेश सरकार की मेहरबानी का आलम यह था कि तीन वर्ष तक सारा पैसा उनको ही दे दिया। सारा मामला जन सूचना में सामने आ गया है।

प्रदेश में अखिलेश यादव सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव तथा पत्नी अपर्णा यादव की संस्था जीव आश्रय पर खासा मेहरबान रहा। आयोग ने वित्तीय वर्ष 2012 से 2017 के पांच वर्षों के दौरान गोरक्षा व गो सेवा के अनुदान में से 86.4 फीसद सिर्फ इसी संस्था को दे दिया।

यही नहीं, 2012-15 के दौरान आयोग से अनुदान पाने वाली यह एकमात्र संस्था रही। जन सूचना अधिकार के तहत सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नूतन ठाकुर की मांगी गई सूचना पर यह जानकारी गो सेवा आयोग के जन सूचना अधिकारी डॉ. संजय यादव ने दी।

अपर्णा व प्रतीक यादव की संस्था लखनऊ के कान्हा उपवन में गोशाला का संचालन करती है। प्रतीक इस संस्था के संरक्षक हैं। पत्नी अपर्णा यादव भी संस्था के क्रियाकलापों से जुड़ी रही हैं। डॉ. यादव से मिली सूचना के अनुसार वित्तीय वर्ष 2012-2017 के पांच वर्षों में आयोग ने गोशालाओं को दिए गए 9.66 करोड़ रुपये के अनुदान में से 8.35 करोड़ रुपये जीव आश्रय संस्था को दिया। वर्ष 2012-13, 2013-14 तथा 2014-15 में इस निधि से सिर्फ इसी संस्था को क्रमश: 50 लाख,1.25 करोड़ और 1.41 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया।

वित्तीय वर्ष 2015-16 में इस संस्था को 2.58 करोड़ और श्रीपाद बाबा गोशाला वृंदावन को 41 लाख का अनुदान मिला। 2016-17 में 3.45 करोड़ के कुल अनुदान में 2.55 करोड़ रुपये जीव आश्रय को मिले। श्रीपाद गोशाला को इस मद से 63 लाख रुपये दिए गए। डॉ. नूतन ने कहा कि एक ही गोशाला पर इस कदर मेहरबानी पिछली सरकार में राजनीतिक भाई-भतीजावाद का सुबूत है।

आरटीआई ऐक्टिविस्ट नूतन ठाकुर के अनुसार, समाजवादी सरकार के शासन काल में 80 प्रतिशत से अधिक का आर्थिक अनुदान एक विशेष एनजीओ को दिया गया। यह बड़े पैमाने पर हुए राजनीतिक पक्षपात और भाई-भतीजावाद का उदाहरण ही है।