रांची: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश एसएस प्रसाद की अदालत में हाजिर हुए. अदालत में चारा घोटाले से जुड़े मामले आरसी 68 ए/96 में मंगलवार को लालू प्रसाद का बयान दर्ज किया गया. दिन के 11 बजे से लेकर 11:48 बजे तक लालू प्रसाद का बयान दर्ज किया गया. अदालत ने लालू प्रसाद से 22 बिंदुअों पर सवाल पूछे.
सवाल-जवाब के बाद अंत में अपनी सफाई में लालू ने कहा : सर राबड़ी देवी बिहार की चीफ मिनिस्टर थीं. उन पर कोई मुकदमा नहीं था. मुझे, राबड़ी देवी और हमारे बच्चों को राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया कि कैसे बिहार का लड़का दिल्ली में आकर बढ़-चढ़ कर काम कर रहा है. आगे बढ़ रहा है. गड़बड़ियों की जांच हमारी ही सरकार ने करायी थी़.

हमलोगों ने गड़बड़ी की जांच रिपोर्ट तैयार की थी़  उसी  आउचर-वाउचर को सीबीआइ ने ट्रक में लाद कर हमें फंसाया.  हुजूर हमें न्याय पर भरोसा है. जब हमने पैसा ही नहीं लिया, तो क्राइम कैसा? लालू प्रसाद ने लिखित रूप में भी अपनी सफाई देने अौर गवाह लाने की बात कही. कोर्ट में लालू प्रसाद ने अपने ऊपर लगाये सभी आरोपों को खारिज किया. सीबीआइ के अधिवक्ता के टोके जाने पर उन्होंने कहा कि आपके सवालों का भी जवाब देंगे. गड़बड़ी की जांच रिपोर्ट के संबंध में लालू प्रसाद ने कहा कि जांच रिपोर्ट सीधे मुख्यमंत्री को नहीं भेजी जाती है. कैबिनेट के जरिये यह पब्लिक एकाउंट यूनिट (पीएसी) के पास जाती है. इसमें विपक्ष के लोग भी होते हैं. कुछ गड़बड़ी होती है, तो जांच की अनुशंसा होती है. उन्होंने कहा कि शुरुआती जांच में कहीं भी गड़बड़ी का जिक्र नहीं है. लालू प्रसाद ने कहा कि सब कुछ संचिका में है.

लिखतन के आगे बकतन नहीं चलता है. एक सवाल के जवाब में लालू प्रसाद ने कहा कि वह दयानंद कश्यप को नहीं जानते हैं, न ही उनसे फोन पर बात की है. मुख्यमंत्री आवास में फोन मुख्यमंत्री नहीं उठाता है, पीए उठाते हैं. पशुपालन विभाग के पदाधिकारियों के सेवा विस्तार से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि दो साल के सेवा विस्तार की अनुशंसा थी, उन्होंने एक साल का दिया. लालू ने कहा कि राबड़ी देवी ने बच्चों के नामांकन के लिए 81000 रुपये आरके राणा अौर कारू राम को दिये, उसे भी आय से अधिक संपत्ति में जोड़ दिया.