असंगठित क्षेत्र को कर्ज देने पर ध्यान दें बैंक: जेतली

नई दिल्ली: वित्त मंत्री अरुण जेतली ने आज नाबार्ड और बैंकों सहित वित्तीय संस्थानों से ऐसे लोगों को ऋण देने को कहा जो अभी तक इससे वंचित रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे असंगठित क्षेत्र में रोजगार बढ़ाने में मदद मिलेगी। जेतली ने यहां राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘यह तथ्य है कि असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की संख्या संगठित क्षेत्र से कहीं अधिक है लेकिन उन्हें ऋण पाने में काफी परेशानी झेलनी पड़ती है।

उन्होंने कहा कि यदि बैंकों और वित्तीय संस्थानों के संसाधनों को विभिन्न योजनाओं के जरिए असंगठित क्षेत्र को स्थानांतरित किया जाता है तो इससे रोजगार के अधिक अवसर पैदा होंगे। स्वयं सहायता समूहों (एस.एच.जी.) के फायदे गिनाते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि वे काफी तेजी से आगे आए हैं और उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में लाखों लोगों को रोजगार दिया है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर एस.एच.जी. महिलाओं की अगुवाई वाले हैं, इससे ग्रामीण इलाकों की महिलाओं को वित्तीय सुरक्षा मिली है। स्वयं सहायता अभियान 25 साल पहले कुछ इकाइयों के साथ शुरू हुआ था। आज इन इकाइयों की संख्या 85 लाख को पार कर गई है।

स्वयं सहायता समूहों से बढ़ा महिलाओं का आत्मविश्वास
जेतली ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के जरिए न सिर्फ महिलाओं की वित्तीय स्थिति मजबूत हुई है बल्कि उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है। नाबार्ड के माध्यम से इस समय 85 लाख से ज्यादा स्वयं सहायता समूह बैंकों से जुड़े हुए हैं तथा 61581 करोड़ रुपए का ऋण दिया जा चुका है। इन समूहों की 90 प्रतिशत सदस्य महिलाएं हैं। नाबार्ड के 35 साल के साथ स्वयं सहायता समूहों के बैंक ङ्क्षलकेज के पहल की रजत जयंती कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों से बड़ी संख्या में महिलाओं के जुडऩे से उनका आत्मविश्वास, आत्म सम्मान और आॢथक क्षमता बढ़ती है।

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