नई दिल्ली। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बताया कि इराक में तीन साल पहले जून 2014 में आतंकी संगठन आइएस के हाथों अगवा किए गए 39 भारतीय उत्तर-पश्चिम मोसुल के बादुश गांव की जेल में हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि 24 जुलाई को जब इराक के विदेश मंत्री भारत आएंगे तो वह इस बारे में ताजा जानकारी देंगे।

सुषमा ने रविवार को विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह और एमजे अकबर के साथ सभी लापता 39 भारतीयों के परिवारों से मुलाकात की। वीके सिंह को इराक के प्रधानमंत्री के मोसुल को आजाद घोषित करने के बाद वहां भेजा गया था। वीके सिंह जो जानकारी लेकर आए हैं, उससे सुषमा स्वराज ने लापता भारतीयों के परिवार को अवगत कराया है।

बाद में सुषमा स्वराज ने पत्रकारों को बताया कि सक्षम अधिकारियों ने खुफिया सूत्रों के हवाले से वीके सिंह को बताया है कि सभी 39 भारतीय एक अस्पताल के निर्माणाधीन स्थल पर तैनात थे। बाद में उन्हें एक खेत में काम पर लगाया गया। इसके बाद उन्हें पश्चिम मोसुल में बादुश की जेल भेज दिया गया। इसके बाद से उनकी कोई जानकारी नहीं है। बादुश में आइएस और इराकी बलों के बीच लड़ाई अभी भी जारी है। यहां जंग खत्म होने पर ही लापता भारतीयों की तलाश शुरू की जा सकेगी। बादुश मोसुल के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में स्थित एक गांव है।

स्वराज ने बताया कि इराक के विदेश मंत्री इब्राहिम अल जाफरी 24 जुलाई को भारत आएंगे। संभवत: वह लापता भारतीयों की ताजा जानकारी लेकर आएंगे। उन्होंने कहा कि पूर्वी मोसुल को आइएस से पूरी तरह आजाद करा लिया गया है और अभी वहां सफाई अभियान चल रहा है। आम नागरिकों को वहां जाने की अनुमति नहीं है क्योंकि वहां बम और अन्य विस्फोटक हो सकते हैं। पश्चिम मोसुल में अभी लड़ाई जारी है।

सुषमा ने आश्वासन दिया है कि भारत सरकार इन सभी को सुरक्षित वापस लाने की हरसंभव कोशिश कर रही है। विदेश मंत्री ने कहा कि हवाई अड्डों पर काम कर रहे एअर इंडिया के अधिकारियों को भी उनकी वापसी में मदद करने का निर्देश दिया गया है और उनका मंत्रालय हर तरीके से लापता भारतीयों का पता लगाने की कोशिश कर रहा है।