मेरे लिए दुनिया एक गलियारे की तरह है, जिससे गुजरने के लिए मन बेचैन हो जाता है

नई दिल्ली : “मैं एक बार जहाज से सफर का आनंद उठाते हुए उरुग्वे से अर्जेंटीना जा रहा था। उसी दौरान मुझे यह अहसास हुआ कि हमारे चारों ओर दो समानांतर जीवन हैं और यह जहाज दरअसल एक ऐसा अद्भुत जहाज है जो इन दोनों समानांतर जीवन को आपस में जोड़ सकता है। इसने मुझे यह अहसास कराया कि यह किसी भी दो संभावित जीवन या जीवों को आपस में जोड़ सकता है। यह एक ऐसा अनोखा विचार है जो उसी समय से मेरे मन में उमड़ता रहा है जब मैं सिर्फ दस साल का था। कुछ इसी तरह से उरुग्वे के निर्देशक एलेक्स पिपेरनो ने यह बताया कि उन्‍हें अपनी पहली फीचर फिल्म ‘विंडो ब्‍वॉय वुड ऑल्‍सो लाइक टू हैव ए सबमैरीन’ को बनाने का ख्‍याल आखिरकार उन्‍हें किस तरह से आया जिसका भारतीय प्रीमियर कल 17 जनवरी, 2021 को आईएफएफआई में किया गया। वह भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के 51वें संस्करण के तीसरे दिन सह-निर्माता अर्कवेन रोड्रिग्ज के साथ गोवा में फि‍ल्‍म महोत्सव स्थल पर आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

इस फिल्म में ऐसे विरोधाभासी स्थानों और स्थितियों का अहसास होने की सुंदरता और रहस्य को चित्रित किया गया है जो स्पष्ट रूप से एक दूसरे के साथ जुड़े हुए नहीं हैं। निर्देशक ने बताया: ‘यह उस अद्भुत अहसास और फंतासी के बारे में है जो किसी व्‍यक्ति को किसी और स्‍थान पर रहने के दौरान हो सकता है। यदि आपको कोई दरवाजा मिलता है तो आप इसे खोलते हैं और उससे होकर आप आगे चले जाते हैं। इसी तरह कभी-कभी आप यह पाते हैं कि दरवाजे के दूसरी ओर कुछ भी नहीं है। अत: यह फि‍ल्‍म आपको इस बात का निराशाजनक, लेकिन उन्‍मुक्ति से भरा अहसास कराती है कि कुछ और नहीं, बल्कि हमारे आसपास की जो दुनिया है केवल वही विशेष मायने रखती है। काव्यात्मक अहसास दरअसल उस चीज की प्रतिध्वनि की तरह है जिसे हम पहले से जानते हैं और रोजमर्रा की जिंदगी में अनुभव करते हैं।’

इस फि‍ल्‍म, जिसकी शूटिंग चार देशों में की गई है, की विषय-वस्‍तु के बारे में निर्देशक ने बताया, ‘पूरी दुनिया ही फिल्म की विषय-वस्‍तु का हिस्सा है। इसमें एक अजीब तरीके से उरुग्वे को दर्शाया गया है, एक अजीब तरीके से अर्जेंटीना को दर्शाया गया है। आप किसी संस्कृति की पहचान ठीक उसी तरह से कर सकते हैं जिस तरह से किसी फिल्म में संबंधित दुनिया का नाम रखा जाता है। आप इसे सीधे तौर पर कोई नाम नहीं दे सकते हैं। मैं इस अस्पष्टता के साथ-साथ सिनेमा में दुनिया के नामकरण की असंभवता को बनाए रखना पसंद करता हूं।’

उरुग्वे की फिल्मों के बारे में उन्होंने बताया कि वे दरअसल विभिन्न प्रकार की फिल्मों का मिश्रण होती हैं। उन्‍होंने कहा, ‘मेरा मानना है कि केवल एक ही राष्ट्रीय सिनेमा नहीं होना चाहिए, कई राष्ट्रीय सिनेमा होने चाहिए।’

कई लघु फिल्मों के निर्देशक पिपेरनो से जब यह पूछा गया कि उनकी फिल्मों के नाम काफी लंबे क्‍यों होते हैं तो उन्‍होंने कहा कि फिल्मों के नाम लंबे होने में मुझे कुछ भी अजीब नजर नहीं आता है। आखिरकार इनका नाम लंबा क्यों नहीं होना चाहिए। उन्‍होंने कहा, ‘फिल्म का शीर्षक या नाम एक खुला दरवाजा होता है जो हमें फिल्म का अनुभव करने के लिए आमंत्रित करता है। यह हमें फिल्म के पात्रों का आकलन करने में भी सक्षम बनाता है।’ उन्‍होंने निकट भविष्य में भारत में अपनी किसी फिल्म की शूटिंग किए जाने की उम्‍मीद जताई।

पिपेरनो ने कहा कि अपनी ही किसी फिल्म में विदेशी होना उनके लिए एक अच्छा अनुभव है।

फिल्म के बारे में

फिल्म ‘विंडो ब्‍वॉय वुड ऑल्‍सो लाइक टू हैव ए सबमैरीन’ में एक अनाम नाविक के बारे में बताया गया है जिसे बार-बार गायब हो जाने के लिए जल्‍द ही नौकरी से निकाला जाना है। हालांकि, बाद में यह पता चलता है कि उसके गायब होने का कारण यह है कि जहाज पर उसे एक रहस्यमय द्वार मिला है जो उसे मोंटेवीडियो में एक महिला के अपार्टमेंट की ओर ले जाता है।

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