लखनऊ। मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद यूपी के शिक्षा मित्रों ने आन्दोलन को स्थगित करते हुए बुधवार से स्कूलों में पठन-पाठन बहाल करने का ऐलान किया। 25 जुलाई को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से ही शिक्षा मित्र पूरे प्रदेश में धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार के साथ वार्ता और धरना-प्रदर्शन, स्कूलों का बहिष्कार एक साथ नहीं हो सकता। पहले शिक्षामित्र स्कूलों में वापस जाए और सरकार को समय दे। सरकार ने बातचीत के सारे रास्ते खुले रखे हैं। शिक्षामित्र भी इसमें सहयोग करे।

शिक्षा मित्रों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के सामने राज्य सरकार से सुप्रीम कोर्ट के फैसले खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की मांग रखी। वहीं शिक्षामित्रों के समायोजन को लेकर सदन में नया आधिनियम पारित करने, जब तक शिक्षा मित्र टीईटी न पास करे तब तक वेतन की धनराशि मानदेय के रूप में दिए जाने, प्रदर्शन के दौरान मरे या आत्यहत्या करने वाले शिक्षा मित्रों के परिवारों को मुआवजा दिए जाने की मांग भी रखी।

शिक्षामित्र अनुभव के आधार पर प्रतिवर्ष सात अंक के भारांक की मांग भी कर रहे हैं। हालांकि शिक्षा मित्रों ने ऐलान किया है कि यदि दो हफ्ते भीतर समाधान नहीं निकला तो वे फिर सड़कों पर उतरेंगे। मुलाकात के बात बेसिक शिक्षा मंत्री अनुपमा जायसवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री शिक्षाम‌ित्रों के प्रत‌ि संवेदनशील हैं। उनकी समस्याओं पर गंभीरतापूर्वक विचार किया जा रहा है, लेकिन इससे पहले शिक्षामित्र स्कूलों में जाकर पढ़ाए।

सोमवार को बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव आरपी सिंह से मुलाकात के दौरान शिक्षा मित्रों ने 10 हजार रुपये मानदेय पर काम करने से इनकार कर दिया था। उन्होंने वेतन के रूप में मिल रही धनराशि को मानदेय के रूप में देने की मांग रखी थी। बैठक में बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव आरपी सिंह, विभागीय निदेशक सर्वेन्द्र विक्रम बहादुर सिंह के साथ आदर्श शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष आरपी सिंह, प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष गाजी इमाम आला समेत कई शिक्षामित्र मौजूद रहे।