पटना : बढ़िया आवास होने की ख्वाहिश सबको रहती है. उसमें भी सरकारी बंगला अगर बढ़िया दिखे तो उसे पाने की होड़ मच जाती है. उसे पाने के लिए तरह-तरह की जुगत शुरू हो जाती है. कुछ यही स्थिति नीतीश मंत्रिमंडल में शामिल नये मंत्रियों की है.

नये मंत्री भी वेल फिनिस्ड सरकारी बंगला पाने की कवायद अपने-अपने तरीके से शुरू कर दी है. अधिकांश नये मंत्रियों की नजर पांच, देशरत्न मार्ग स्थित सरकारी बंगला पर है. इसकी वजह है कि वह सरकारी बंगला वेल फिनिस्ड है. बंगला में साजो-सामान के लिए काफी काम हुए हैं. यहां तक कि अतिरिक्त कमरे का निर्माण के अलावा अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध है. यह सरकारी बंगला पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव का है.

महागठबंधन सरकार में उपमुख्यमंत्री बनने के बाद तेजस्वी प्रसाद यादव को पांच, देशरत्न मार्ग सरकारी बंगला आवंटित हुआ था. वे भवन निर्माण मंत्री भी थे. इसके बाद भवन निर्माण विभाग की ओर से उसे नये तरीके से तैयार किया गया. इसमें बहुत सारे काम अतिरिक्त हुए. अब नये मंत्रियों की नजर उस बंगले पर है. हालांकि मंत्रियों की नजर उस बंगले पर बेकार पड़ी है. वह सरकारी बंगला मंत्री के बाद प्रतिपक्ष के नेता के रूप में इस्तेमाल हुआ.

उस बंगले में भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी, नंदकिशोर यादव प्रतिपक्ष के नेता के रूप में रहे. परंपरा के अनुसार ऐसी परिस्थिति में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव ही उसके हकदार होंगे. जानकारों के अनुसार नीतीश मंत्रिमंडल के दो टर्म में रहे भाजपा के मंत्रियों ने जिन सरकारी बंगला को अपने तरीके से वेल फिनिस्ड किये थे. यहां तक कि मछलियों के पालने के लिए तालाब भी बनाये गये थे.

उसमें इस बार मंत्री जाने से कतरा रहे हैं. इसकी वजह कुछ और बतायी जा रही है. अब मंत्री नया बढ़िया आवास देने की मांग कर रखी है. कांग्रेस के मंत्री ने भी अपने सरकारी बंगले में बैठकी के लिए हवादार कुटिया बनवा रखी थी. उनसे पहले उसमें आइएएस अधिकारी रहते थे. उस आवास पर भी मंत्रियों की नजर टिकी है.

ऐसे नये मंत्रियों को आवास आवंटन भवन निर्माण विभाग को करना है. नयी सरकार में जदयू, भाजपा लोजपा से कुल 12 नये मंत्रियों को सरकारी बंगला की दरकार है. नये मंत्रियों ने सरकारी बंगला के लिए आवेदन देना शुरू किया है. जानकारों के अनुसार जदयू के एक मंत्री के अलावा भाजपा के पांच मंत्रियों ने आवेदन दिया है.

भाजपा के एक मंत्री ने विधायक रहने के दौरान मिले सरकारी बंगला को केवल दुरुस्त करने के संबंध में कहा है. उनका बंगला मंत्रीस्तर का है. मंत्रियों ने वेल फिनिस्ड सरकारी बंगला के लिए अपने-अपने तरीके से प्रयास शुरू कर दिये हैं. मंत्रियों को सरकारी बंगला का आवंटन भवन निर्माण विभाग की आवास कमेटी तय करती है. कमेटी के अध्यक्ष विभागीय मंत्री होते हैं.

मिली जानकारी के अनुसार विभाग द्वारा अभी प्रस्ताव तैयार हो रहा है.पूर्व मंत्रियों को सरकारी बंगला खाली करने का 30 दिनों का समय होता है. निर्धारित समय में बंगला खाली नहीं करने पर विभाग की ओर से नोटिस भेजा जाता है. इसके बाद भी खाली नहीं करने पर प्रशासन द्वारा खाली कराया जाता है.