पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि मनरेगा का नालंदा प्रोजेक्ट सभी जिलों के लिए रोल मॉडल बनेगा. खासकर दक्षिण  बिहार के जिलों में इसे प्रमुखता से लागू किया जायेगा. मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित संवाद कक्ष में ग्रामीण विकास विभाग तथा पंचायती राज विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षात्मक बैठक में उन्होंने अधिकारियों को यह निर्देश दिया.
समीक्षा बैठक में दोनों विभाग के सभी बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की गयी. ग्रामीण विकास विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने नालंदा जिला में मनरेगा के तहत  कराये गये प्रोजेक्ट जल संचय को रोल मॉडल बनाते हुए इसे राज्य के सभी जिले विशेष कर दक्षिण बिहार के जिले में लागू करने का निर्देश दिया.
उन्हाेंने सामाजिक वानिकी के तहत निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप पौध रोपण का निर्देश दिया, ताकि राज्य में वन आच्छादन में वृद्धि हो सके. साथ ही वंचित वर्ग, महिलाओं, वृद्ध, दिव्यांगों को वन पोषक के रूप में मनरेगा के तहत  रोजगार मुहैया कराया जा सके. मुख्यमंत्री ने सभी सक्रिय मनरेगा मजदूरों का शत-प्रतिशत आधार सीडिंग दिसंबर माह तक पूर्ण करने का निर्देश दिया.
2018 तक 10 लाख स्वयं सहायता समूह के गठन का लक्ष्य निर्धारित जीविका की समीक्षा के क्रम में मुख्यमंत्री ने दिसंबर, 2018 तक 10 लाख स्वयं सहायता समूहों के गठन का लक्ष्य निर्धारित किया. उन्होंने  परिवार के स्तर पर आजीविका के संसाधनों को बढ़ाने हेतु पशुपालन एवं मत्स्य संसाधन विभाग के साथ समन्वय स्थापित करने को टास्क दिया.
इसके तहत  बकरी एवं भेड़ विकास योजना कार्यक्रम, मुर्गी ग्राम योजना एवं समेकित गव्य विकास योजना को व्यापक स्वरूप देने हेतु निर्देश दिया गया. मुख्यमंत्री ने नीरा के उत्पादन एवं विपणन की सफलता को संज्ञान में लेते हुये राज्य स्तर पर विस्तारित करने का निर्देश दिया.
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना की समीक्षा के क्रम में वास भूमिहीन लोगों को जल्द भूमि उपलब्ध कराने की व्यवस्था करने के लिए ग्रामीण विकास विभाग और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को समन्वय स्थापित करने को कहा. समीक्षा के दौरान ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, पंचायती राज मंत्री कपिलदेव कामत, मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, विकास आयुक्त शिशिर सिन्हा समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे.