पार्टी से बाहर होंगे शरद, राज्यसभा की सदस्यता भी जायेगी!

पटना : जदयू के वरिष्ठ नेता शरद यादव के पार्टी लाइन से खिलाफत की सजा पार्टी से निष्कासन से होगी. साथ ही राज्यसभा की सदस्यता से भी उन्हें बेदखल किया जा सकता है. पार्टी उनके बयानों और आगे की रणनीति पर पूरी नजर बनायी हुई है.  सूत्र बताते हैं कि शरद यादव की पार्टी लाइन से अलग होनेकी वजह टटोलने में जुटे नेताओं ने जो कारण खोज निकाला है वह शरद के बेटे शांतनु तक जाता है. सूत्रों के मुताबिक शरद यादव अपने पुत्र शांतनु बुंदेला को राजनीति में उतारना चाहते हैं.
लंदन से पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री लेकर लौटे शांतनु के लिए पहला राजनीतिक ग्राउंड बिहार से बेहतर और क्या हो सकता है. खबर है कि शांतनु बुंदेला को 2019 के लोकसभा चुनाव में मधेपुरा से राजद की टिकट पर उम्मीदवर बनाया जा सकता है. अगले साल विधान परिषद की खाली हो रही 11 सीटों में राजद के खाते में कम से कम चार सीटें आ सकती हैं. सूत्रों का कहना है कि लालू प्रसाद से करीबी रिश्ते का लाभ शरद के बेटे या उनके साथियों को मिल सकता है.
फिलहाल जदयू के अंदरखाने में शरद के विद्रोही तेवर के पीछे इसे ही मुख्य वजह बताया जा रहा है. मधेपुरा की सीट अभी राजद से अलग हो चुके पप्पू यादव के कब्जे में है. 2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर भाजपा ने अपने उम्मीदवार दिये थे. जदयू के भाजपा के साथ समझौते में मधेपुरा की सीट शायद ही शरद यादव को मिल पाये. जदयू के प्रदेश प्रवक्ता डाॅ अजय आलोक ने शरद यादव को पुत्रमोह में लालू प्रसाद के रास्ते पर चलने का आरोप लगाया है.
शरद यादव को केतु और शिवानंद तिवारी को राहु बताते हुए डाॅ अजय आलोक ने कहा कि इन दोनों के होते हुए राजद को जदयू से लड़ने की कोई जरूरत नहीं है. राजद के मूल नाश के लिए यह दोनों काफी हैं.  छात्र आंदाेलन से राजनीति में आये शरद यादव को नीतीश की पहल पर 2006 में जार्ज फर्नांडीज की जगह जदयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया था. लगातार दो बार जदयू के अध्यक्ष रह चुके शरद यादव के इन्कार के बाद पिछले साल नीतीश कुमार ने राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद ग्रहण किया था.

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