नई दिल्ली: यूपी में अखिलेश सरकार के राज में यश भारती पुरस्कार बांटने में जमकर भाई-भतीजावाद हुआ. उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित पुरस्कार यश भारती सम्मान वितरण मामले में सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सवालों के घेरे में हैं. पूर्व सीएम पर आरोप है कि उन्होंने अपने कुछ चहेतों को ये पुरस्कार दिए.ये खुलासा ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की आरटीआई के जरिए मांगी गई जानकारी के आधार पर किया गया है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अखिलेश यादव के कार्यकाल के दौरान यश भारती पुरस्कार पाने वालों में नेताओं के दोस्त, अफसर और समाजवादी पार्टी के छोटे-बड़े नेताओं के परिजन तक शामिल हैं.

मीडिया सूत्रों के मुताबिक साल 2012 से 2017 के बीच जिन 200 लोगों को इस पुरस्कार से नवाजा गया उनमें करीब 150 लोगों का संबंध कहीं ना कहीं समाजवादी पार्टी से था. सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मिली जानकारी के अनुसार महज मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखने भर के बाद 21 लोगों को ये पुरस्कार दे दिया गया.

गौरतलब कि इस पुरस्कार की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने साल 1994 में की थी. यश भारती सम्मान में व्यक्ति को 11 लाख रुपए नकद, एक शॉल और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाता है. इसके साथ ही व्यक्ति को पचास हजार रुपए महीने की पेंशन भी दी जाती है.

हालांकि चुनिंदा लोगों ये पुरस्कार देने पर सवालों में घिरे अखिलेश यादव ने सूबे की सरकार पर पलटवार किया है. मीडिया सूत्रों के मुताबिक अखिलेश यादव ने कहा, ‘हम तो कहते हैं आपकी सरकार है आप भी अपने खास लोगों को दे दो. हम कौनसा आपको रोक रहे हैं.’ पूर्व सीएम अखिलेश ने आगे कहा कि हमने 11 लाख और पचास हजार पेंशन दी. आपकी सरकार तो केंद्र में भी है. आपको तो एक लाख रुपए की पेंशन सुनिश्चित करनी चाहिए.