रांची : जल संसाधन तथा पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री चंद्र प्रकाश चौधरी ने कहा कि 22 सितंबर को वर्तमान सरकार के 1000 दिन पूरे हो रहे हैं और इन 1000 दिनों में जल संसाधन तथा पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने विकास के कई नये आयाम गढ़े हैं. 2022 तक राज्य के सभी घरों को पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य है.

उन्होंने कहा कि किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराना भी सरकार की प्राथमिकता में है. इस दिशा में भी लगातार कार्य किया जा रहा है. विभाग ने बजटीय प्रावधान के तहत प्राप्त राशि का 99 प्रतिशत खर्च किया है और वर्ष 2017–18 के दौरान लगभग 2000 करोड़ से अधिक की लागत वाली पेयजल योजनाओं को शुरू कराया जा रहा है.

श्री चौधरी मंगलवार को सूचना भवन सभागार में पत्रकारों को एक हजार दिनों की उपलब्धियां गिना रहे थे. श्री चौधरी ने कहा कि विगत तीन वर्षों में राज्य में 74 वृहद पाइप जलापूर्ति योजना एवं 1836 लघु ग्रामीण पाइप जलापूर्ति योजना पूर्ण की गयी है. नीर निर्मल परियोजना के तहत राज्य मेें 150 लघु ग्रामीण पाइप जलापूर्ति योजना पूर्ण की गयी है. राज्य मेें पहली बार आदिम जनजाति टोलों मेें 192 ग्रामीण जलापूर्ति योजना को क्रियान्वित करने का सार्थक प्रयास किया गया है और उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में 576 ग्रामीण जलापूर्ति योजना चलायी जा रही है. राज्य के छह जिलों रामगढ़, धनबाद, बोकारो, चतरा, पश्चिमी सिंहभूम और गोड्डा में जलापूर्ति योजना को डीएमएफ के अंतर्गत आच्छादित किया जा रहा है.

मंत्री ने कहा कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में 14 लाख से अधिक व्यक्तिगत शौचालय का निर्माण कराया गया है और कोडरमा, रामगढ़ तथा लोहरदगा जिले को खुले में शौच से मुक्त करा लिया गया है. इस वर्ष के अंत तक 10 और जिलों को खुले में शौच से मुक्त करा लिया जायेगा. सरकार हाइवे के किनारे पेट्रोल पंप संचालकों, ढाबों के पास भी कम्युनिटी शौचालय की व्यवस्था करने के लिये लोगों को प्रेरित कर रही है. उन्होंने कहा कि उच्च पथों पर हर 20 से 25 किलोमीटर की दूरी पर सार्वजनिक शौचालय बनवाने से खुले मेें शौच से मुक्ति का अभियान सफल होगा. एनएच-33 में रांची से बहरागोड़ा तक टाटा स्टील यह काम करेगी.

जल संसाधन विभाग का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि राज्य जल संसाधन आयोग के गठन की स्वीकृति दे दी गयी है. सिंचाई की क्षमता बढ़ कर 36.70 प्रतिशत हो गयी है. चार नयी योजनाओं तिलैया नहर, डोमनी नाला बराज, दाहरबाटी जलाशय और दुगनी बराज योजनाओं के लिए 237.82 करोड़ की स्वीकृति दी गयी है. पुनासी जलाशय परियोजना के लिए केंद्र सरकार से स्वीकृति प्राप्त कर ली गयी है. सरकार द्वारा गढ़वा जिले में सिंचाई एवं पेयजल की व्यवस्था के लिए 1064 करोड़ की लागत से डीपीआर तैयार करा लिया गया है.